दिल्ली समेत कई हिस्सों में हुआ चांद का दीदार, पहला रोजा आज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चांद दिखने के साथ ही बृहस्पतिवार को मकद्दस रमजान की शुरुआत हो गई। देश के कई हिस्सों में बृहस्पतिवार शाम को चांद देखा गया। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम ने चांद दिखने की तसदीक की।
30 दिन चलने वाले मुकद्दस रमजान को लेकर मस्जिदों में सभी तैयारियां पहले से ही पूरी कर ली गई थी। सभी मस्जिदों को दुल्हन की तरह सजाया-संवारा गया है।
चांद देखने के बाद ही ईशा की नमाज (रात की नमाज) के बाद तरावीह (कुरान का पाठ) शुरू हो गई। जैसे ही रमजान का चांद दिखा लोगों ने एक दूसरे को चांद की बधाई देना शुरू कर दिया।
ज्यादा से ज्यादा खुदा का जिक्र करें
फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मकर्रम ने बताया कि साल के 12 महीनों में रमजान सबसे खास महीना है। पूरे महीने रोजे रखकर अल्लाह की इबादत की जाती है। अन्य दिनों के मुकाबले एक नेकी पर सवाब (पुण्य) भी बहुत ज्यादा मिलता है।
मौलाना ने लोगों को नसीहत देते हुए कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा खुदा का जिक्र करें, जकात और अन्य दान दें। आम दिनों के मुकाबले लोगों से नर्म दिल से पेश आएं। रमजान का एक महीना एक तरह से ट्रेनिंग का महीना है।
इस महीने में लोग रोजे रखते हैं। रोजा रखकर रोजेदार को उस व्यक्ति का एहसास होगा जो दो वक्त की रोटी भी नही जुटा पाता। लोगों में ऐसे लोगों का ख्याल रखने का जज्बा पैदा होगा। अल्लाह ने इसलिए सभी मुसलमानों पर रोजे फर्ज किए थे।