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Delhi NCR News: आनंद विहार बस अड्डे पर लगा काई का कृत्रिम पेड़
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30 लीटर क्षमता का परीक्षण सफल
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली में एक नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। आनंद विहार बस अड्डे पर मटियारी टेक्नोलॉजी ने काई आधारित एयर प्यूरीफायर का डेमो प्रोटोटाइप स्थापित किया है। यह कृत्रिम पेड़ हवा को साफ करने के साथ-साथ ऑक्सीजन भी बनाता है।
शुरुआती परीक्षण में इसके नतीजे अच्छे मिले हैं। फिलहाल, 30 लीटर काईयुक्त पानी की क्षमता वाले प्रोटोटाइप का परीक्षण चल रहा है। मटियारी टेक्नोलॉजी के संस्थापक सिद्धांत कुमार निषाद ने बताया कि विकास के नाम पर लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। इससे कार्बन डाईऑक्साइड बढ़ रही है और ऑक्सीजन कम हो रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी इमारतों के अंदर पेड़ लगाना संभव नहीं है।
जिस तरह लोग घर और कार्यालयों में इनडोर पौधे लगाते हैं, उसी सोच के साथ यह मशीन तैयार की गई है। मशीन में पानी के अंदर काई का मिश्रण रखा जाता है। रोशनी मिलने पर काई पेड़ों की तरह प्रकाश संश्लेषण करती है। इस प्रक्रिया में काई कार्बन डाईऑक्साइड को सोखती है और ऑक्सीजन छोड़ती है। कंपनी अब 200 लीटर क्षमता वाली मशीन पर काम कर रही है।
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सिद्धांत का कहना है कि एक मशीन कुछ पेड़ों के बराबर ऑक्सीजन बनाने का काम कर सकती है। उनका दावा है कि दुनिया में बनने वाली ऑक्सीजन का बड़ा हिस्सा काई से ही आता है।
दिल्ली में विस्तार की योजना
सिद्धांत कुमार निषाद के अनुसार, 30 लीटर क्षमता वाले प्रोटोटाइप के परीक्षण में अभी तक अच्छे नतीजे मिले हैं। अब कंपनी 200 लीटर क्षमता वाली मशीन पर काम कर रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के साथ मिलकर दिल्ली के कई प्रदूषित इलाकों में इन मशीनों को लगाने की तैयारी है। इसका काम नवंबर तक शुरू होने की उम्मीद है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली में एक नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। आनंद विहार बस अड्डे पर मटियारी टेक्नोलॉजी ने काई आधारित एयर प्यूरीफायर का डेमो प्रोटोटाइप स्थापित किया है। यह कृत्रिम पेड़ हवा को साफ करने के साथ-साथ ऑक्सीजन भी बनाता है।
शुरुआती परीक्षण में इसके नतीजे अच्छे मिले हैं। फिलहाल, 30 लीटर काईयुक्त पानी की क्षमता वाले प्रोटोटाइप का परीक्षण चल रहा है। मटियारी टेक्नोलॉजी के संस्थापक सिद्धांत कुमार निषाद ने बताया कि विकास के नाम पर लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। इससे कार्बन डाईऑक्साइड बढ़ रही है और ऑक्सीजन कम हो रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी इमारतों के अंदर पेड़ लगाना संभव नहीं है।
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जिस तरह लोग घर और कार्यालयों में इनडोर पौधे लगाते हैं, उसी सोच के साथ यह मशीन तैयार की गई है। मशीन में पानी के अंदर काई का मिश्रण रखा जाता है। रोशनी मिलने पर काई पेड़ों की तरह प्रकाश संश्लेषण करती है। इस प्रक्रिया में काई कार्बन डाईऑक्साइड को सोखती है और ऑक्सीजन छोड़ती है। कंपनी अब 200 लीटर क्षमता वाली मशीन पर काम कर रही है।
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सिद्धांत का कहना है कि एक मशीन कुछ पेड़ों के बराबर ऑक्सीजन बनाने का काम कर सकती है। उनका दावा है कि दुनिया में बनने वाली ऑक्सीजन का बड़ा हिस्सा काई से ही आता है।
दिल्ली में विस्तार की योजना
सिद्धांत कुमार निषाद के अनुसार, 30 लीटर क्षमता वाले प्रोटोटाइप के परीक्षण में अभी तक अच्छे नतीजे मिले हैं। अब कंपनी 200 लीटर क्षमता वाली मशीन पर काम कर रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के साथ मिलकर दिल्ली के कई प्रदूषित इलाकों में इन मशीनों को लगाने की तैयारी है। इसका काम नवंबर तक शुरू होने की उम्मीद है।