क्या है आम्रपाली के शिखर से पतन तक पहुंचने की पूरी कहानी, एनबीसीसी पर खरीदारों की निगाहें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने 42 हजार से ज्यादा घर खरीदारों के हक में फैसला सुनाते हुए मंगलवार को आम्रपाली का रेरा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए एनबीसीसी को यह निर्देश दिया है कि वह आम्रपाली की अटकी परियोजनाओं को पूरा करे।
अदालत ने निवेशकों को यह निर्देश भी दिया है कि अब वह पैसे एनबीसीसी को दें। इस मसले पर जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है।
हमारी इस स्टोरी में जानिए क्या है आम्रपाली का पूरा मामला, कैसे एक शख्स ने लोगों को ख्वाब दिखाकर उसे तोड़ा और शोहरत की बुलंदियों के बाद वह जेल की सलाखों के पीछे है। हजारों लोग जिन्होंने अपने घर का सपना देखा था, वह कैसे सालों से उसी सपने को पूरा होता देखने के लिए तरस रहे हैं...
42000 खरीदार प्रभावित
आम्रपाली और अन्य बिल्डरों की लापरवाही से जिस तरह से खरीदार सालों बाद भी अपने फ्लैट्स नहीं पा सके हैं और अपने पैसे डूबते देख रहे हैं वह किसी भयावह सपने से कम नहीं है।
मेरा घर, मेरा अधिकार इस स्लोगन के साथ 2010 में जब आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा सामने आए थे तो लोगों को लगा था कि वाजिब दाम में अपना घर पाने का उनका सपना पूरा हो जाएगा। लेकिन इन बीते सालों में जिसने भी आम्रपाली ग्रुप में निवेश किया वो आज भी अपने फ्लैट्स का इंतजार ही कर रहे हैं। इनकी संख्या अब 42,000 हो चुकी है।
आम्रपाली के मामले में समस्या सिर्फ यही नहीं है कि काम डेडलाइन पर पूरा नहीं हो सका है, बल्कि कंपनी के मालिकों पर फंड में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है जिसके चलते वह आज जेल में हैं।
घर खरीदारों का कहना है कि उनकी चुनौतियां खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। जैसे बचे काम को पूरा करने के लिए फंड की व्यवस्था कहां से होगी, कौन सी कंपनी बचा हुआ काम पूरा कराएगी।
जेपी से बड़ी है आम्रपाली की समस्या
आम्रपाली के बायर्स की समस्या जेपी के खरीदारों से ज्यादा बड़ी है। इसकी वजह ये है कि जेपी की समस्या भले ही ज्यादा जटिल हो लेकिन उन्होंने अपनी समस्याओं को सुलझाना शुरू कर दिया है। वहीं आम्रपाली के खरीदार अंतिम छोर पर खड़े हैं जहां से कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा।
आम्रपाली के एक खरीदार विक्रम चटर्जी कहते हैं कि, 'हम खरीदारों ने अपना फ्लैट पाने के लिए कई दरवाजे खटखटाए लेकिन कहीं हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसका मतलब ये नहीं है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुकर सकता है।'
चटर्जी ही वह शख्स हैं जो सबसे पहले अपने फ्लैट के लिए 2017 में सुप्रीम कोर्ट गए थे। इसके बाद उन्हें सैकड़ों बायर्स का सहयोग मिला। चटर्जी इस वक्त गुरुग्राम में एक किराए के मकान में रहते हैं और 2017 से लेकर अब तक हुए तमाम प्रदर्शन और बैठकों में हिस्सा लेकर बायर्स की बात रख चुके हैं। आम्रपाली की कुल 15 रिहायशी प्रॉपर्टी हैं जिसमें कुल 42000 रिहायशी फ्लैट बनने थे लेकिन सिर्फ 12000 ही पूरे हो सके हैं।
आम्रपाली का उत्थान और पतन
एक समय सस्ते घरों के पोस्टर बॉय के रूप में जाने गए अनिल शर्मा का जिस तरह पतन हुआ वह कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था। आईआईटी से पढ़ाई कर चुके अनिल शर्मा ने 2003 में नोएडा में एक प्रोजेक्ट से आम्रपाली की शुरुआत की थी। उस प्रोजेक्ट में कुल 107 फ्लैट थे। आने वाले सालों में उसने व्यावसायिक इमारत और अन्य परियोजनाएं बनाईं और जल्द ही वह अन्य बिल्डरों पर हावी हो गया। उसे बिल्डर्स कांग्लोमरेट, कंफेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) का अध्यक्ष चुन लिया गया।
2009-10 में अनिल शर्मा ने आम्रपाली का पहला सस्ता हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च किया। इसका नाम रखा एक्जॉटिका जो नोएडा सेक्टर 50 में था और उसमें 150 फ्लैट्स थे। धीरे-धीरे आम्रपाली ने पूरे देश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए 25 प्रोजेक्ट पूरे किए और अन्य 50 पर काम चल रहा है। आम्रपाली ने नोएडा, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में अपनी धाक जमा ली।
2013 में आम्रपाली ने एफएमसीजी, हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन के क्षेत्र में कदम रखा। इसने उत्तर प्रदेश के बरेली और झारखंड के देवघर में तीन सितारा होटलों की शुरुआत की। इसकी मनोरंजन शाखा आम्रपाली मीडिया विजन ने भी दो फिल्में, 'गांधी टू हिटलर' 2011 में और 'आई डोंट लव यू' 2013 में आई।
डोनाल्ड ट्रम्प हैं अनिल शर्मा के रोल मॉडल
जैसे-जैसे कंपनी का भाग्योदय हो रहा था डोनाल्ड ट्रंप को रोल मॉडल मानने वाले अनिल शर्मा ने राजनीति में अपना भाग्य आजमाने की सोची। यही वजह थी कि शर्मा ने जेडीयू के टिकट पर बिहार के जहानाबाद से 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह हार गए।
लेकिन आम्रपाली अब भी कामयाबी की दौड़ लगा रही थी। इसके नोएडा में सफायर और प्लेटिनम नाम के प्रोजेक्ट तो गाजियाबाद में अंपायर नाम के प्रोजेक्ट चल रहे थे। भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आम्रपाली के ब्रांड अंबेसडर बने थे, हालांकि बाद में इस ग्रुप से अलग हो गए थे।
2017 वो साल था जब पहली बार आम्रपाली की मुश्किलें सामने आनी शुरू हुई। जब देरी के चलते आम्रपाली अपने खरीदारों के ब्याज का भुगतान कर रहा था और वो सभी चेक बाउंस होने लगे तो अनिल शर्मा के खिलाफ शिकायतों का तांता लग गया।
उसी साल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के पास बैंक ऑफ बड़ौदा ने आम्रपाली सिलिकॉन सिटी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया कानून के तहत कार्यवाही करने की याचिका डाली। एक बार जब कंपनी के खिलाफ दिवालिया की प्रक्रिया की शुरुआत की बात होने लगी तो बायरों में खौफ बैठ गया और फिर वो अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।
अब एनबीसीसी पर होंगी निगाहें
आम्रपाली के खिलाफ याचिका दायर करने वाले एक खरीदार अभिषेक कुमार का कहना है कि, जब हम खरीदार बिल्डर के खिलाफ रैलियां और रोड शो कर रहे थे तब आम्रपाली ने हमारा ध्यान झूठे वादे कर दूसरी तरफ मोड़ना की शुरू कर दिया था। इस दौरान खरीदारों और बिल्डरों के बीच लंबी-लंबी बैठकें हुईं लेकिन इन सब से कुछ हासिल नहीं हुआ। फ्लैट्स के पहले लॉट के बाद खरीदारों को फ्लैट मिलना पूरी तरह बंद हो गया। इसके अलावा बड़ी तादाद में लोग निर्माण की गुणवत्ता में कमियों और सुरक्षा की शिकायत करने लगे।
10 मई 2018 एक ऑडिट में यह पकड़ में आया कि आम्रपाली ने 3000 करोड़ के फंड को गलत जगह लगाया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपर से 250 करोड़ रुपए खरीदारों के हित में जमा कराने को कहा जिसमें वह असफल हो गए। इसके बाद अदालत ने आम्रपाली और इसकी साथी कंपनियों के 40 बैंक अकाउंट फ्रीज करने का आदेश दे दिया। कोर्ट ने बिल्डर से अपने सभी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देने का निर्देश दिया। 2018 फरवरी में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को आदेश दिया कि वह अनिल शर्मा को आम्रपाली के दो अन्य निदेशक शिव प्रिया और अजय कुमार के साथ गिरफ्तार कर ले।
कौन पूरे करेगा काम
दिवालिया की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद आम्रपाली पर कई जांच चल रही है। मंगलवार (23 जुलाई) को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि आम्रपाली के बचे प्रोजेक्ट एनबीसीसी पूरे करेगा। इसके साथ ही ईडी आम्रपाली के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करेगी।