आंखें बंद करने पर दिखता था खौफनाक मंजर, श्रद्धालुओं ने सड़कों पर बिताई रात
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जम्मू के भयावह माहौल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमरनाथ यात्रा से वापस लौटने के बाद भी यात्री दो-दो रात सो नहीं पाए। वहां चीखने-चिल्लाने के बाद भी मदद के लिए किसी के नहीं आने का खौफनाक मंजर हमेशा उनकी आंखों के सामने आ जाता है।
गामा-वन सेक्टर निवासी अरविंद शर्मा अपने दोस्तों के साथ 8 जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर गए थे। उनके साथ प्रशांत मावी, अनिल शर्मा निवासी सेक्टर-63 नोएडा, गाजियाबाद के दिनेश पांडेय और लखनऊ के सतेंद्र सिंह थे।
पांचों ने सीधे अमरनाथ पहुंचकर शिवलिंग के दर्शन किए। बाबा अमरनाथ का दर्शन कर 10 जुलाई को वापस लौटने वाले ही थे कि उससे पहले ही लोगों को बवाल के बारे में बताया जाने लगा। हर कोई पथराव और आगजनी की बात सुनकर दहशत में था।
वहां हालात बहुत खराब थे
अरविंद ने बताया कि इसी दौरान परिवार के लोगों के भी फोन आने शुरू हो गए। लोग बार-बार फोन करके हालात के बारे में पूछ रहे थे। परिवार के लोगों को कुछ नहीं बताया। वहां से एक मिनी बस में सवार होकर चले, जिसमें करीब तीस यात्री और थे।
बवाल के चलते खाने-पीने का सामान भी मंहगा हो गया था। मजबूरी में महंगा सामान खरीदना पड़ रहा था। मिनी बस सोनवर्ग पहुंची। वहां हालात बहुत खराब थे। बस को सेना ने रोक दिया। आगे नहीं जाने दिया जा रहा था।
जिस स्थान पर बसों को रोका जा रहा था, वहां हजारों की संख्या में लोग सड़कों के दोनों ओर खडे़ थे। रात के 12 बज गए। यात्री सड़क पर ही रात बिता रहे थे। लगभग डेढ़ बजे सेना ने करीब तीन सौ गाड़ियों के काफिले को रवाना किया।
चारो ओर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं
सभी वाहन बालटाल पहुंचे। वहां कई स्थानों पर लोगों ने निजी वाहनों और बसों को रुकवाकर उसमें तोड़फोड़ की। लोग पत्थर फेंक रहे थे, जिससे वाहनों के शीशे भी टूटे। वाहनों में सवार लोगों को चोटें भी लगीं। बावजूद इसके पथराव का सिलसिला जारी था।
हर कोई अपने आप को बचाने का प्रयास कर रहा था। केवल गाड़ियों में बैठे लोग ही एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। अरविंद ने बताया कि वहां पर चारों ओर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थी। लोग मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन मदद के लिए कोई नहीं आ रहा था। वहां पर घूम रहे वाहनों पर पाकिस्तान के झंडे लगे थे। उनमें सवार लोग पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
जैसे-तैसे पुलिस फोर्स की मदद से निकल आए। 11 जुलाई देर रात ग्रेटर नोएडा पहुंचे। परिवार के बीच पहुंचकर राहत की सांस ली। उन्होंने बताया कि अमरनाथ यात्रा से लौटने के बाद भी वहां के खौफनाक मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं। आने के बाद रात में दो दिन नींद नहीं आई। आंख बंद करने के बाद वहां का खौफनाक मंजर दिखने लगता था।