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अमरनाथ यात्रा में खौफनाक स्थिति से गुजर रहे भक्त, गाड़ी देखते ही पत्थर मारते हैं लोग

Tue, 12 Jul 2016 01:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 12 Jul 2016 01:06 PM IST
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Amarnath yatra going through creepy man, saw the car hit the stone people
अमरनाथ यात्री - फोटो : amar ujala
सेक्टर- 19 में रहने वाले संजय बाली अपने तीन दोस्तों के साथ 9 जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर गए थे। वहां के हालात इतने खराब हैं कि उन्हें रात में हेलीकॉप्टर से यात्रा पूरी करनी पड़ी। 
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दिन के उजाले में वे कश्मीर को देख तक नहीं पाए। घाटी के हालात को देखते हुए इन चारों दोस्तों को दिन भर का समय होटल में ही गुजारना पड़ा। गाड़ी तक होटल से बाहर नहीं निकाल पा रहे थे। 
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गाड़ी देखते ही लोग पत्थर मार रहे थे। बड़ी संख्या में भक्त वापस भी लौट रहे हैं। संजय बाली, पुनीत शुक्ला, धर्मेंद्र चौहान और भव्य वैद्य जब नोएडा से अमरनाथ यात्रा पर निकले थे, तो इन्हें नहीं पता था कि वहां जाकर ये हालात हो जाएंगे।
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तीन हजार की जगह दिए 10,000 रुपये
संजय ने बताया कि जब हम वहां पहुंचे, तो कर्फ्यू लगा हुआ था। होटल से बाहर निकलने तक के लिए मना कर दिया गया था, लेकिन इतनी दूर गए थे तो दर्शन करना ही था। 

हम लोगों ने रात को श्रीनगर से बालटाल के लिए गाड़ी ली। चालक ने वहां जाने के लिए 8000 रुपये लिए, जबकि आम दिनों में 3000 रुपये में गाड़ी चली जाती है। वहां से हेलीकॉप्टर से ऊपर गए और दर्शन किए। 

10 जुलाई की रात को दर्शन करके वापस बालटाल पहुंचे, लेकिन वहां से होटल आने के लिए कोई चालक तैयार नहीं था। देर रात करीब 2:30 बजे एक गाड़ी वाला 10,000 रुपये में होटल चलने के लिए तैयार हुआ। बड़ी मुश्किल से जान बचाकर हम लोग होटल पहुंच पाए।

सेना न हो तो जान बचाना है मुश्किल

Amarnath yatra going through creepy man, saw the car hit the stone people
amarnath yatra - फोटो : Amar Ujala

शीशे तक नहीं खोलने दिए
आपबीती सुनाते हुए पुनीत ने बताया कि ड्राइवर ने हमें साफ बोल दिया था कि आप अपने जोखिम पर जा रहे हैं। अगर कुछ होगा, तो इसमें मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है। हम लोगों को गाड़ी के शीशे तक खोलने के लिए मना कर दिया गया था। बालटाल से होटल तक के रास्ते को पार करना सबसे मुश्किल था। लोग गाड़ियों पर पत्थर फेंक रहे थे।

पर्ची पर नाम लिखकर भेजा अंदर
धर्मेंद्र ने बताया कि माहौल बहुत खराब हो चुका था, इसलिए हमने वहां से निकलना ही बेहतर समझा। वापस लौटने के लिए फ्लाइट तक नहीं मिल रही थी। बड़ी मुश्किल से 11 जुलाई की रात की फ्लाइट मिल पाई। हालात ये थे कि एयरपोर्ट प्रबंधन को कागज की पर्ची पर हम लोगों के नाम लिखकर अंदर भेजना पड़ा।

सेना न हो तो जान बचाना मुश्किल
संजय ने बताया कि घाटी के हालात बेहद खराब हैं। अगर वहां सेना न हो, तो जाने क्या हो जाए। वहां का व्यक्ति जब मिलता है, तो पूछता है कि भारत से आए हो क्या। वहां पर लोग खुलेआम पाकिस्तान का नाम लेते हैं। घरों में आपको भारत के नहीं पाकिस्तान के झंडे दिखाए देंगे।

व्हाट्स ऐप और एसएमएस सेवा बंद
वहीं, भव्य ने बताया कि घाटी में इन दिनों व्हाट्स ऐप और एसएमएस सेवा बंद है। लोग चाहकर भी फोटो या मैसेज इधर-उधर नहीं भेज सकते। अमरनाथ यात्रा के रास्ते में आपको जगह-जगह वाहनों के शीशे टूटे मिल जाएंगे। कहीं-कहीं आगजनी भी दिख जाएगी।

भंडारे न हों तो भूखे मर जाएं यात्री
संजय का कहना है कि अमरनाथ यात्रा के रास्ते में जगह-जगह भक्तों ने भंडारे लगा रखे हैं। कई बार स्थिति ऐसी आई कि होटल बंद मिले। रास्ते में लगे भंडारों के विश्राम स्थल पर लोग रुक गए। उनके खाने-पीने की व्यवस्था वही लोग करते हैं। जब यात्रा रुकी थी, तब भंडारा आयोजन करने वाले भक्त ही भगवान नजर आए। भंडार न हो, तो यात्रा पर जाने वाले भूखे मर जाएं।

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