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गाय, गीता और गुरुग्राम की बयानबाजी से आगे नहीं बढ़ रही सरकार

Sun, 31 Jul 2016 09:09 AM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 31 Jul 2016 09:09 AM IST
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all dialogues and no work by khattar government, social media trolls to gurgaon traffic
jam in gurgaon - फोटो : अमर उजाला
तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है/ मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है...। मशहूर कवि अदम गोंडवी की ये लाइनें गुडग़ांव के विकास को लेकर सरकार के दावों पर बिल्कुल फिट बैठती हैं।
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अपने सॉफ्टवेयर और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए पूरी दुनिया में मशहूर गुडग़ांव का नाम राज्य सरकार ने अप्रैल में बदल दिया था। लोगों को उम्मीद थी कि मनोहर सरकार इसकी सूरत भी बदलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां की स्थिति पहले से भी खराब हो गई।
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सिर्फ सीएम और मंत्रियों की बयानबाजी और कागजों में यह शहर चमकता रहा। अब शहर के लोग कह रहे हैं कि नाम में क्या रखा है, कुछ काम भी कर लोग सरकार। वरना गुडग़ांव पूरी दुनिया में जलभराव और जाम जैसी समस्याओं के लिए शर्मशार होता रहेगा। लोग सोशल मीडिया पर तंज कस रहे हैं कि सरकार इसका नाम बदलकर 'गुरुजाम' रख दो।
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पिछले दिनों हीरो चौक पर ही मुख्यमंत्री का भी काफिला 15 मिनट तक फंसा रहा था, लेकिन उनका हृदय इतना बड़ा है कि किसी अधिकारी से स्पष्टीकरण तक नहीं लिया। ऐसे में अधिकारी क्यों सतर्क रहेंगे, यह आप खुद अंदाजा लगाईए।

अधिकारी बेपरवाह हैं, वह जनसेवा के काम छोड़कर बिल्डरों की सहूलियत के लिए काम कर रहे हैं। यहां की टोपोग्राफी (स्थलाकृति) से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में एक्सप्रेस डूबेगा नहीं तो क्या होगा। लोगों का कहना है कि सीएम ने अफसरों पर सख्ती बरती होती तो आज ये नौबत नहीं आती कि 25 किलोमीटर लंबा जाम लगे और लोगों को भूखे प्यासे एक्सप्रेसवे पर रात बितानी पड़े।

इसी माह की शुरुआत में ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' ने गुडग़ांव को लेकर उठाए थे सवाल

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jam in gurgaon - फोटो : अमर उजाला

इसी माह की शुरुआत में ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' ने गुडग़ांव को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यहां जितना विकास और चकम दमक है वह निजी क्षेत्र की बदौलत है। सरकार ने तो समस्याएं पैदा की हैं।

इसके बाद भी सरकार नहीं चेती और बयानबाजी से आगे नहीं बढ़ी। आरटीआई कार्यकर्ता अभय जैन का कहना है कि मनोहर सरकार गाय, गीता, गुरुग्राम की बयानबाजी से आगे ही नहीं बढना चाहती है। वरना गुडग़ांव की इतनी फजीहत नहीं होती।

एक्सप्रेसवे के जाम और जलभराव पर सरकार की इतनी थू-थू हो गई है कि अब कहने को कुछ बचा नहीं है। सरकारों ने तो गुडग़ांव को सोमनाथ का मंदिर बना दिया है। जो भी आया वह लूटने में लगा रहा।

केंद्रीय मंत्री की भी परवाह नहीं
जाम तो गुडग़ांव के लिए आम हो गया है। आए दिन यहां पर जाम रहता है। यहां के सांसद राव इंद्रजीत सिंह केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री हैं, गुडग़ांव के एक विधायक राव नरबीर राज्य में पीडब्ल्यूडी मंत्री हैं, लेकिन यहां की सड़कों की हालत देखिए, लगता ही नहीं है कि सरकार कहीं इस शहर के विकास के लिए चिंता कर रही है। राव इंद्रजीत सिंह जलभराव की समस्या को लेकर दो बार जिले के अधिकारियों की मीटिंग लेकर उन्हें फटकार लगा चुके हैं लेकिन अधिकारी हैं कि मानते नहीं। न जाने किस मिट्टी के बने हैं।

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