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जीवित नवजात जिसे मैक्स अस्पताल ने बताया था मरा, आज हुई उसकी मौत

Wed, 06 Dec 2017 05:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 06 Dec 2017 05:14 PM IST
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alive baby declared dead by max hospital passes away on wednesdaynse for guilty

मैक्स अस्पताल में जीवित नवजात को मृत बताकर परिजनों को सौंपने के मामले में एक दर्दनाक मोड़ आ गया है। इस मामले में जीवित बचे दूसरे बच्चे की भी बुधवार को मौत हो गई।

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बच्चे के जीवित पाए जाने पर जो खुशी उसके मां-बाप को मिली थी आज वो भी उनसे छिन गई। 22 हफ्ते का नवजात शिशु 30 तारीख़ से वेंटिलेटर पर था, जिसकी बुधवार को मौत हो गई। उसका पीतमपुरा के अग्रवाल अस्पताल में इलाज चल रहा था।
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दिल्ली सरकार की तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने शुरुआती जांच में मैक्स अस्पताल को बताया दोषी 
मैक्स अस्पताल में जिंदा नवजात को मृत बताकर परिजनों को सौंपने के मामले में अस्पताल प्रशासन घिरता दिख रहा है। दिल्ली सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अस्पताल को दोषी पाया है।
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प्राथमिक रिपोर्ट बताती है कि प्रसव से लेकर परिजनों को शव सौंपने तक में अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरती है। कमेटी ने मंगलवार शाम प्राथमिक रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को सौंप दी।

मैक्स अस्पताल का रद्द हो सकता है लाइसेंस

alive baby declared dead by max hospital passes away on wednesdaynse for guilty

उधर, दिल्ली सरकार का कहना है कि फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। तीन-चार दिनों में कमेटी फाइनल रिपोर्ट सरकार को दे देगी।

अधिकारियों ने एक बार फिर दोहराया है कि अगर अस्पताल प्रशासन मामले में सीधे तौर पर दोषी साबित होता है कि उसका लाइसेंस तक रद्द करने में सरकार नहीं हिचकेगी। कमेटी ने जांच में पाया कि अस्पताल प्रशासन ने नवजात की डिलीवरी के लिए तयशुदा नियमों का पालन नहीं किया।

बच्चे के जिंदा होने का पता करने के लिए कोई ईसीजी टेस्ट नहीं किया गया। वहीं, बिना किसी लिखित दिशा-निर्देश के बच्चों को परिजनों को सौंप दिया गया। इसके अलावा मृत व जीवित बच्चे को एक साथ रखा गया।

रिपोर्ट बताती है कि प्राथमिक तौर पर अस्पताल प्रशासन की इस मामले में गलती दिख रही है। बता दें कि 30 नवंबर को शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में जिंदा नवजात को मृत बताकर परिजनों को सौंप दिया गया था।

दो डॉक्टरों को बर्खास्त भी कर दिया

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रास्ते में एक नवजात के शरीर में हरकत हुई। परिजनों ने आनन-फानन में उसे नजदीक के दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया। मामले की जांच के लिए दिल्ली सरकार ने तीन सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया।

वहीं, अस्पताल प्रशासन ने भी आंतरिक जांच कमेटी गठित की। अस्पताल की कमेटी ने दो दिन पहले लापरवाही बरतने वाले दो डॉक्टरों को बर्खास्त भी कर दिया था।

मेडिकल बोर्ड गठित करने की सिफारिश
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सरकार से एक मेडिकल बोर्ड गठित करने की सिफारिश की है। पुलिस कहना है कि बोर्ड यह तय करेगा कि डिलीवरी से लेकर नवजात को मृत बताकर परिजनों को सौंपने के बीच अस्पताल प्रशासन ने तयशुदा प्रोटोकॉल का पालन किया था या नहीं। वहीं बोर्ड इस मामले में विशेषज्ञों की भी सलाह लेगा।

दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अस्पताल के चार डॉक्टरों, गार्ड और कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि मामले में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही दिख रही है। जांच के लिए पुलिस ने एक स्पेशल टीम गठित की है। जिसका नेतृत्व उत्तर पश्चिम जिला की पुलिस उपायुक्त असलम खान कर रही हैं।

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