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5 देशों के साथ मिलकर मांसपेशियों के रोगों का पता लगाएगा एम्स

Sat, 23 Feb 2019 08:21 AM IST
Priyesh Mishra परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 23 Feb 2019 08:21 AM IST
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AIIMS will detect muscle diseases along with 5 countries
एम्स
जीन विकृति के कारण मांसपेशियों में पैदा हुए रोगों की पहचान जल्द होना मुश्किलों भरा है। देश में कई लाख लोग हर साल इस तरह की बीमारियों से पीड़ित मिलते हैं। डॉक्टरों की मानें तो बच्चों से लेकर युवा ज्यादा चपेट में हैं। चूंकि इस तरह के रोगों को दुर्लभ भी माना जाता है। इसलिए अब दुनिया के पांच देशों ने मिलकर इन रोगों को लक्ष्य पर रख नया शोध शुरू किया है।
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भारत की ओर से एम्स और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिक इसमें शामिल हैं। जबकि यूके, ब्राजील, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और तुर्की के वैज्ञानिक भी हैं। इस शोध के लिए शुक्रवार को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) और एम्स ने करार भी किया है।
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इस दौरान एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि दुनिया भर में करीब 170 करोड़ बच्चे और युवा न्यूरो मस्कुलर रोगों से ग्रस्त हैं। मांसपेशियों की इस बीमारी को दुर्लभ भी माना जाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पांच देशों के वैज्ञानिकों को यूके में एक केंद्र स्थापित करने का मौका मिला है।
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डॉ. गुलेरिया का कहना है कि निश्चित ही ये करार न्यूरो मस्कुलर रोगों में जीनोमिक दवाओं की भूमिका के लिए मील का पत्थर साबित होगा। एम्स से तीन माह बाद विद्यार्थियों और डॉक्टरों का दल भी विदेशों में जाकर प्रशिक्षण लेंगे। 

10 मिनट में चलेगा आयरन ब्लॉकेज का पता

नए शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए हुए इस करार के बारे में डॉ. गुलेरिया ने बताया कि आमतौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान खून में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है। धीरे-धीरे ये दिल के नजदीक धमनियों में जमा भी होने लगती है, जिसके कारण दिल तक रक्त संचार रुकता है। थैलेसीमिया मरीजों में ये आशंका ज्यादा रहती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) ने एक तकनीक विकसित की है, जिसे एम्स में लाया जा रहा है। इसके अनुसार 10 मिनट में नई तकनीक से लैस एमआरआई के जरिये मरीज के दिल में ब्लॉकेज का पता चल सकेगा। अभी तक इसमें काफी वक्त लग जाता है। 

 लिवर रोगियों पर हुआ शोध, अब और काम होगा
लिवर फेलियर रोगियों के रक्त में अमोनिया की मात्रा बढ़ने का संकट रहता है। कुछ ही समय पहले यूके के 200 और एम्स के 290 मरीजों पर लंदन और एम्स के डॉक्टरों ने मिलकर अध्ययन किया था जिसमें रक्त में अमोनिया की मात्रा को खत्म करने का तरीका पता चला। इसी शोध को और आगे बढ़ाने के लिए लंदन से टीम भी एम्स आएगी। 

डेंगू-टीबी का इलाज दुनिया में देगा एम्स
एक सवाल पर डॉ. गुलेरिया ने अमर उजाला को बताया कि मच्छर जनित रोग जैसे डेंगू, चिकनगुनिया के अलावा टीबी (क्षय रोग) के मरीज भारत में ज्यादा हैं। जबकि यूके जैसे देशों में इन मरीजों का उपचार मुश्किल है। इसलिए यूके, ब्राजील, जिम्बाब्वे, तुर्की और साउथ अफ्रीका के डॉक्टरों को एम्स के डॉक्टर प्रशिक्षण देंगे। 
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