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Body Reconstruction: क्षतिग्रस्त शवों को मूलस्वरूप में तैयार करेगा एम्स, सभी पुनर्निर्माण सेवाएं निःशुल्क
Sat, 29 Nov 2025 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 29 Nov 2025 06:05 AM IST
सार
एम्स के इस प्रयास से क्षतिग्रस्त शवों के प्रबंधन के लिए विश्व स्तर पर जारी पहल को भारत में गति मिल गई है। देश में बड़े, आधुनिक और एकीकृत शवगृहों की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए एम्स में शुक्रवार को रेड क्रॉस के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का आयोजन हुआ।
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Delhi AIIMS
- फोटो : ANI
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विस्तार
आपदाओं में क्षत-विक्षत शवों को पुराने स्वरूप में लाकर परिजनों को सौंपने के लिए एम्स ने बॉडी रिकंस्ट्रक्शन प्रणाली शुरू की है। एम्स के इस प्रयास से क्षतिग्रस्त शवों के प्रबंधन के लिए विश्व स्तर पर जारी पहल को भारत में गति मिल गई है। देश में बड़े, आधुनिक और एकीकृत शवगृहों की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए एम्स में शुक्रवार को रेड क्रॉस के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का आयोजन हुआ। इसमें इस कवायद की जानकारी भी दी गई।
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एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. सुधीर गुप्ता ने एक भावुक अपील की कि हर मृतक के साथ, चाहे उसकी मौत किसी भी परिस्थिति में हुई हो, सम्मानजनक व्यवहार का हकदार है। उन्होंने कहा कि मृतक भले बोल न सकें, लेकिन उनके परिवार गहराई से महसूस करते हैं कि उनके प्रियजन के शव के साथ अच्छा व्यवहार हो।
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प्रो. गुप्ता ने बताया कि दुर्घटना, बम विस्फोट या अन्य आपदाओं में शव अक्सर विकृत हो जाते हैं। ऐसे में फोरेंसिक टीम का दायित्व बनता है कि शवों का मानवीय तरीके से पुनर्निर्माण किया जाए, ताकि परिवार को अतिरिक्त मानसिक आघात न झेलना पड़े। उन्होंने खुलासा किया कि एम्स लंबे समय से यह संवेदनशील और श्रमसाध्य कार्य चुपचाप कर रहा है और सभी पुनर्निर्माण सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क हैं।
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एम्स ने शुरू की वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक
दिल्ली सीरियल बम विस्फोट जैसी पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रो. गुप्ता ने कहा कि घटनास्थल पर बिखरे अंगों को एकत्र कर उन्होंने शवों का पुनर्निर्माण किया और परिवारों को सम्मानपूर्वक सौंपा। यह गुप्त कार्य है, लेकिन अत्यंत जरूरी है। परिवारों के दर्द को कम करने के लिए एम्स ने वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक शुरू की है।
राष्ट्रीय आपदा शवगृह की स्थापना की जरूरत
प्रो. गुप्ता ने राष्ट्रीय आपदा शवगृह की स्थापना पर जोर दिया। उनके अनुसार, एक केंद्रीय सुविधा होनी चाहिए, जो एक साथ 400 शवों को संभाल सके और जरूरत पड़ने पर हवाई मार्ग के जरिये तुरंत आपदा स्थल पर पहुंचे।