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AIIMS Research: खराब लीवर का हर दूसरा मरीज 'शराबी', 20 साल में दोगुने हुए सिरोसिस के केस; ऐसे हो रहे लोग बीमार

Thu, 15 Jan 2026 06:52 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Thu, 15 Jan 2026 06:52 PM IST
सार

शोध में शामिल कुल मरीजों में से करीब 43 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिनका लिवर केवल शराब के अत्यधिक सेवन की वजह से खराब हुआ। पहले सिरोसिस को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन कम उम्र में ही शराब पीने से अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अध्ययन के अनुसार, 2005 से पहले देश में शराब के कारण लिवर सिरोसिस के मामले करीब 20 फीसदी थे, जबकि हेपेटाइटिस बी के कारण यह आंकड़ा 22 फीसदी से ज्यादा था।

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AIIMS study reveals alcohol addiction in every second liver patient cirrhosis cases doubled in 20 years
देश में तेजी से बढ़ रहे सिरोसिस के मामले - फोटो : adobe stock

विस्तार

देश में शराब पीने की बढ़ती आदत अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। लिवर से जुड़ी बीमारियों के हर दूसरे वयस्क मरीज में शराब की लत पाई जा रही है। कई अध्ययन के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में शराब के कारण होने वाले लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक शोध के अनुसार, शोध में शामिल कुल मरीजों में से करीब 43 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिनका लिवर केवल शराब के अत्यधिक सेवन की वजह से खराब हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली, सामाजिक स्वीकार्यता और तनाव के कारण शराब अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनती जा रही है, जिसका सीधा असर लिवर की सेहत पर पड़ रहा है।

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युवाओं में तेजी भी बढ़ रही लिवर सिरोसिस की समस्या
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अनुसार, 25 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में लिवर सिरोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विभाग के प्रोफेसर डॉ. शालीमार के अनुसार, शराब पीने की बढ़ती आदत के कारण बड़ी संख्या में मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई मामलों में बीमारी तब सामने आती है, जब लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। डॉ. शालीमार के अनुसार, पहले लिवर सिरोसिस को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह कम उम्र में ही शराब पीना शुरू करना है।

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बच्चों तक पहुंच रही शराब की आदत
विशेषज्ञों के अनुसार, चिंता की बात यह है कि शराब पीने की आदत अब स्कूल जाने वाले बच्चों तक भी पहुंच रही है। जिन परिवारों में शराब पीना आम बात है, वहां बच्चों में भी कम उम्र में ही इसकी लत देखने को मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार, यह भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत हैं।

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शराब कैसे खराब करती है लिवर
अधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। इससे लिवर में सूजन (हैपेटाइटिस) हो जाती है, जो धीरे-धीरे लिवर की कार्यक्षमता को कम कर देती है। शराब के कारण लिवर में चर्बी जमा होने लगती है, जिसे फैटी लिवर कहा जाता है। अगर समय रहते शराब न छोड़ी जाए, तो यही स्थिति आगे चलकर लिवर सिरोसिस में बदल जाती है, जिसमें लिवर सिकुड़ने लगता है और उसका काम करना लगभग बंद हो जाता है।

बीयर भी है उतनी ही नुकसानदेह
कई लोग यह मानते हैं कि बीयर पीना शराब की तुलना में सुरक्षित है, लेकिन डॉक्टर इस धारणा को गलत बताते हैं। डॉ. शालीमार के अनुसार, ओपीडी में आने वाले कई मरीज यह स्वीकार करते हैं कि वे बीयर पीते हैं, लेकिन मात्रा बहुत अधिक होती है। ज्यादा मात्रा में बीयर पीने से भी लिवर को उतना ही नुकसान होता है, जितना अन्य शराब से। कुछ मरीजों में यह समस्या बहुत जल्दी गंभीर हो जाती है, जबकि कुछ में धीरे-धीरे बढ़ती है।

देशभर के आंकड़े क्या कहते हैं
भारत में सिरोसिस का एटियोलॉजिकल स्पेक्ट्रम विषय पर हुए एक बड़े शोध में देशभर के 41,432 मरीजों को शामिल किया गया। इस दौरान 147 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि
-43.2 फीसदी मरीजों में सिरोसिस का कारण शराब था
-11.5 फीसदी मरीज हेपेटाइटिस बी से पीड़ित थे
-6.2 फीसदी मरीजों में हेपेटाइटिस सी पाया गया
-14.4 फीसदी मरीज नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर या अन्य कारणों से बीमार थे
-2005 के बाद तेजी से बढ़े शराब से जुड़े मामले

अध्ययन के अनुसार, 2005 से पहले देश में शराब के कारण लिवर सिरोसिस के मामले करीब 20 फीसदी थे, जबकि हेपेटाइटिस बी के कारण यह आंकड़ा 22 फीसदी से ज्यादा था। लेकिन 2005 से 2022 के बीच शराब से जुड़े सिरोसिस के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है, वहीं वायरल हेपेटाइटिस से जुड़े मामलों में कमी आई है।

विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों के अनुसार, अगर समय रहते शराब का सेवन कम या बंद कर दिया जाए, तो लिवर को होने वाले गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है। साथ ही, लोगों को यह समझने की जरूरत है कि बीयर या हल्की शराब भी सुरक्षित नहीं है। जागरूकता, सही जीवनशैली और समय पर जांच ही इस बढ़ते खतरे से बचाव का रास्ता है।

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