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बच्ची की पीठ में घुस गई थी सूई, एम्स ने बामुश्किल निकाला

Wed, 11 Sep 2019 07:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 11 Sep 2019 07:00 AM IST
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AIIMS got the operation done again after needle not found in Nehru Hospital
पीठ में सूई... - फोटो : अमर उजाला

10 वर्षीय बच्ची की पीठ में घुसी सूई को निकालने में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को बड़ी कामयाबी मिली है। सूई की लंबाई करीब 2 इंच थी। सूई बच्ची की रीढ़ की हड्डी के काफी नजदीक थी।

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चुनौतियों से घिरे इस ऑपरेशन को करने से पहले डॉक्टरों ने दो सप्ताह का इंतजार किया ताकि सूई बच्ची की पीठ में मौजूद उत्तकों में जम जाए। 

ऐसा इसलिए ताकि ऑपरेशन के दौरान सूई की स्थिति में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आए। दो सप्ताह तक बच्ची को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया था।

बार- बार सूई की स्थिति जानने के लिए डॉक्टरों को एक्सरे भी करना पड़ता, लेकिन रेडिएशन से दूर रखते हुए उसका अल्ट्रासाउंड किया गया। अंत में बच्ची की पीठ से सूई निकालने में डॉक्टरों को कामयाबी मिली। 
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बच्ची की मां ने डॉक्टरों को बताया कि वह भूलवश बिस्तर पर सूई छोड़ दी थी। कुछ देर बाद बच्ची ने बिस्तर पर लेटते ही पीठ में भयानक दर्द होने की जानकारी दी। पीठ में सुई घुसने के बाद परिजन बच्ची को लेकर पूर्वी दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल पहुंचे।  
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यहां डॉक्टरों ने एक्सरे में सुई की पुष्टि की, लेकिन ऑपरेशन के दौरान उन्हें सुई  नहीं मिली। सुई निकालने के लिए डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद मरीज को एम्स ट्रामा सेंटर रैफर कर दिया गया। 

एम्स के बाल सर्जरी विभाग की डॉ. शिल्पा शर्मा ने बताया कि बच्ची की हालत काफी गंभीर थी। उसे पीठ में काफी दर्द था। उसकी मांसपेशियों में सुई घुसी हुई थी जिसकी पहचान एम्स में दोबारा कराए एक्सरे में हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने फिर से ऑपरेशन करने का फैसला लिया। लेकिन इससे पहले उन्होंने थोड़ा इंतजार करना जरूरी समझा। 


ऑपरेशन के दौरान सूई का दाएं या बाएं या फिर अंदर घुसने की आशंका होने के कारण कुछ समय इंतजार करना सबसे जरूरी था। डॉ. शिल्पा शर्मा ने बताया कि सूई रीढ़ की हड्डी के काफी नजदीक थी। बच्ची को रेडिएशन के खतरे से बचाने के लिए बार-बार एक्सरे के बजाए अल्ट्रासाउंड किया गया।

सुई को बिल्कुल धीरे-धीरे निकाल लिया गया। इससे बच्ची को कोई परेशानी नहीं हुई और कुछ घंटों बाद उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। 

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