भारतीय भाषाओं में पढ़ाई की आजादी: AICTE के चंद्रशेखर ने बनाया AI आधारित 'अनुवादिनी' एप, PM मोदी ने भी की तारीफ
कोई भी छात्र किसी भी किताब को इस टूल के माध्यम से खुद भी अनुवाद कर सकता है। इसमें किसी प्रकार का किसी को कोई शुल्क नहीं देना होगा। इस टूल की सभी सेवाएं मुफ्त मुहैया कराई जा रही हैं। अनुवादिनी टूल के माध्यम से इंजीनियरिंग, सोशल साइंस, साइंस, स्किल, लॉ, मैनेजमेंट समेत कई अन्य विषयों की करीब 10 हजार से अधिक किताबों को अनुवाद किया जा चुका है।
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दूरदराज, पिछड़े और आम छात्रों के लिए स्कूल से कॉलेज तक भारतीय भाषाओं में पढ़ाई करने की आजादी विशेष एप अनुवादिनी के कारण संभव हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित इस मेड इन इंडिया टूल को एआईसीटीई के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट बुद्दा चंद्रशेखर ने तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस टूल की तारीफ की है। चंद्रशेखर अपनी प्रौद्योगिकी के हुनर के माध्यम से देश सेवा के लिए 2014 में अमेरिका में अपनी कंपनी का सेटअप छोड़ भारत लौटे और देश के लिए एआई आधारित अनुवादिनी सॉफ्टवेयर टूल तैयार किया है।
एआईसीटीई ने मुफ्त में सेवा देने वाले इस बहुउपयोगी अनुवादिनी टूल का पेटेंट करवा लिया है। शैक्षणिक के अलावा सरकारी कार्यालयों में भी इसका प्रयोग किया जा रहा है। कोई भी छात्र किसी भी किताब को इस टूल के माध्यम से खुद भी अनुवाद कर सकता है। इसमें किसी प्रकार का किसी को कोई शुल्क नहीं देना होगा। इस टूल की सभी सेवाएं मुफ्त मुहैया कराई जा रही हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल से लेकर विभिन्न प्रदेश शिक्षा बोर्ड, डीटीएच चैनल के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई, स्वयं प्लेटफार्म पर ऑनलाइन कोर्स में भी इस टूल का प्रयोग किया जाएगा।
करीब 10 हजार विषयों पर किताब अनुवाद की
अनुवादिनी टूल के माध्यम से इंजीनियरिंग, सोशल साइंस, साइंस, स्किल, लॉ, मैनेजमेंट समेत कई अन्य विषयों की करीब 10 हजार से अधिक किताबों को अनुवाद किया जा चुका है। जबकि केरल, तेलगांना, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के जजमेंट भी इस अनुवादिनी के माध्यम से अंग्रेजी से हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद का काम जारी है। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन, अमृतकाल 2.0, कोऑपरेटिव सोसाइटी, स्किल इंडिया, प्राइम मिनिस्टिर साइंटफिटिक एडवाइजर कार्यालय भी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोध भी इसी के माध्यम से अनुवाद हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी अनुवादिनी से अपने जजमेंट को हिंदी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद की तैयारी कर रहा है। इस अनुवादिनी टूल के माध्यम से 95 फीसदी तक अनुवाद सही होता है। भारतीय के साथ विदेशी भाषाओं में भी इस टूल के माध्यम से अनुवाद किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए वरदान
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए अनुवादिनी वरदान साबित हो रहा है। यूपी इनवेस्टमेंट समिट में योगी सरकार ने हिंदी के सारे दस्तावेज अंग्रेजी समेत भारतीय समेत विदेशी भाषाओं में अनुवाद करवाया था। जबकि यूपी वन ट्रिलियन के पूरे दस्तावेज भी हिंदी से अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं में अनुवादिनी से अनुवाद करवाए जा रहे हैं। यूपी सरकार अन्य योजनाओं में भी इस टूल का प्रयोग करने की तैयारी कर रही है।
पीएम के ब्रेन गेन की अपील ने भारत लौटने को मजबूर किया
मूल रूप से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले बुद्धा चंद्रशेखर ने पुणे यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रानिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन में बीटेक किया। उसके बाद एमबीए मेरीलैंड यूनिवर्सिटी यूएसए से किया और वहीं नौकरी मिलने पर बस गए। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में ही अपनी कंपनी शुरू की। उन्होंने बताया कि इसी दौरान 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आई। पीएम ने कहा ,उनकी सरकार की प्राथमिकता प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) को प्रतिभा पाने (ब्रेन गेन) के रूप में बदलना है, ताकि विदेश में बसे भारतीय निवेश और अपनी काबिलियत के योगदान से भारत के विकास में योगदान दें। पीएम की इसी अपील और सोच के चलते चंद्रशेखर ने अमेरिका छोड़ भारत विकास में अपना योगदान देने को वतन लौटने का फैसला लिया और एआईसीटीई में अधिकारी के रूप में काम करना शुरू किया।
पांच से 10 फीसदी रोजगार के मौके बढ़ेंगे
इस टूल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति कहीं से भी दस्तावेज अनुवाद कर सकता है। क्योंकि इससे भाषा की सभी मुश्किलें दूर हो गई हैं। व्यापार, पढ़ाई, स्किलिंग-रिस्किलिंग में सहायता मिलेगी। दरअसल, स्कैन, पीडीएफ, वर्ड फाइल, एक्सल के माध्यम से कोई भी दस्तावेज मुफ्त में अनुवाद हो सकता है। इस टूल के माध्यम से इंडस्ट्री की मांग के आधार पर छात्रों का कौशल विकास करवाकर उन्हें इंटर्नशिप से भी जोड़ा जा सकता है।