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Master Plan 2047: अब दिल्ली भी होगी वर्टिकल, आसमान की ओर बढ़ेगा ऐतिहासिक शहर, इमारतों की 'ऊंचाई का अंत' खत्म
Fri, 21 Aug 2026 06:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 21 Aug 2026 06:33 AM IST
सार
जमीन की कमी और बढ़ती आबादी के बीच दिल्ली के विकास का तरीका बदलने जा रहा है। अब शहर का विस्तार जमीन पर होने की जगह ऊंचाई में होगा। मास्टर प्लान-2047 में हाइराइज इमारतों को बढ़ावा देने की योजना है।
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- फोटो : AdobeStock
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विस्तार
जमीन की कमी और बढ़ती आबादी के बीच दिल्ली के विकास का तरीका बदलने जा रहा है। अब शहर का विस्तार जमीन पर होने की जगह ऊंचाई में होगा। मास्टर प्लान-2047 में हाइराइज इमारतों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे आने वाले समय में दिल्ली की पहचान कम ऊंची इमारतों वाले शहर से बदलकर गगनचुंबी इमारतों वाले शहर के रूप में हो सकती है।
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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि लुटियंस बंगला जोन, एयरपोर्ट और सघन बसावट वाले क्षेत्रों को छोड़कर बाकी जगहों पर कितनी भी ऊंचाई की इमारत बनाई जा सकती है। तय एफएआर और मौके पर जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ ऊंचाई की सीमा तय करने वाले प्रावधान का इस मास्टर प्लान में खत्म कर दिया गया है।
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अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 के आसपास शहर के इस तरह के विस्तार का खाका भी पेश किया गया है। योजना जमीन पर उतरने से यह पहला इलाका बन सकता है, जहां इस मॉडल पर विकास होगा। अलीपुर से शुरू होकर बवाना, रोहिणी, नजफगढ़ और द्वारका होते हुए महिपालपुर तक जाने वाली इस सड़क के दोनों तरफ करीब 250 मीटर के क्षेत्र में हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित होंगे। इस कॉरिडोर के आसपास आने वाले समय में कम जमीन पर ज्यादा आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
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फैलाव की जगह ऊंचाई पर विकास
दिल्ली में जमीन सीमित है, जबकि 2047 की अनुमानित 3.2 करोड़ की आबादी और आवास की जरूरत को देखते हुए मास्टर प्लान में शहर को ऊंचाई में बढ़ाने का याेजना है। जमीन घेरकर शहर को फैलाने के बजाय ऊंची इमारतों के जरिये ज्यादा लोगों के रहने और काम करने की व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे खाली जमीन, सड़क और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह बचाने में भी मदद मिल सकती है।
आधी जमीन सार्वजनिक सुविधाओं के लिए
हाईराइज विकास 100 मंजिल से ऊपर हो सकता है। इसके लिए जमीन मालिकों को भी योजना में प्रोत्साहन दिया गया है। बड़े भूखंड का एक हिस्सा सड़क, पार्क और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए देने के बदले बची जमीन पर अधिक निर्माण की अनुमति देने का प्रावधान है। जमीन का कुछ हिस्सा सार्वजनिक इस्तेमाल में जाएगा और बाकी हिस्से में ऊंची इमारतें विकसित की जा सकेंगी।
हर इमारत में छोटे घर भी
ऊंची इमारतों में केवल महंगे फ्लैट न बनें, इसका भी ध्यान रखा गया है। योजना में हाईराइज परियोजनाओं के कुल फ्लोर एरिया का 20 फीसदी हिस्सा छोटे आवासों के लिए रखने का प्रावधान है। इन घरों का कारपेट एरिया 60 वर्गमीटर से कम होगा। इससे कम और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए भी आवास उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
मेट्रो से जुड़ेगा हाईराइज विकास
हाईराइज इमारतों को मेट्रो से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए स्काईवॉक, पैदल मार्ग या भूमिगत रास्ते बनाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
कितनी ऊंची होंगी इमारतें, तय नहीं
योजना में हाईराइज इमारतों की अधिकतम ऊंचाई की कोई एक सीमा तय नहीं की गई है। इमारत की ऊंचाई एयरपोर्ट अथॉरिटी, दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की मंजूरी पर निर्भर करेगी। साथ ही परियोजनाओं में हरियाली और पार्किंग की व्यवस्था जरूरी होगी। कम से कम 15 फीसदी क्षेत्र में हरियाली रखने का प्रावधान है।
सघन बसावट वाले क्षेत्रों में भी मंजूरियों के साथ बनेंगी ऊंची इमारतें
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का मानना है कि दिल्ली के बहुत से इलाकों की बसावट सघन है। इस दबाव को कम करने का भी मास्टर प्लान में प्रावधान है। यह स्थानीय निवासियों की सहमति के बाद ही होगा। इसके लिए आरडब्ल्यूए का गठन होगा। सरकार आरडब्ल्यूए से बातचीत कर इन सीटू डेवलपमेंट मॉडल पर इन इलाकों का पुनर्विकास करेगी।