Education News: एआईसीटीई, एनसीटीई और यूजीसी के विलय की तैयारी, हैकी चार स्वतंत्र स्तंभों पर करेगा काम
इसी साल यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई के विलय करने की तैयारी है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत इनकी जगह हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया ( हैकी) काम करना शुरू करेगा। हैकी का ड्रॉफ्ट बिल तैयारी के अंतिम चरण में है और अगले संसद सत्र में प्रस्ताव के रूप में रखा जा सकता है। डिग्री देने वाले व डिग्री नहीं देने वाले विश्वविद्यालय भी बिल में शामिल होंगे।
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यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई का इसी साल विलय हो जाएगा। इसके स्थान पर एक सिंगल विंडो सिस्टम के तहत हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया ( हैकी) काम करना शुरू कर देगा। हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया चार स्तंभों (वर्टिक) रेगुलेशन, एक्रिडिटेशन, फंडिंग और अकादमिक स्टैंडर्ड तय करने पर काम करेगा। कहने को चार अलग-अलग स्तंभ होंगे पर सभी स्वतंत्र पर एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। हैकी का ड्रॉफ्ट बिल तैयारी के अंतिम चरण में है और अगले संसद सत्र में प्रस्ताव के रूप में रखा जा सकता है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के चैप्टर 18 के सुझावों के तहत हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया का बिल बनाने का काम अंतिम चरण में है। यह मुख्य रूप से चार स्तंभों पर आधारित है। हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया के नीचे चार स्तंभ काम करेंगे। ड्रॉफ्ट बिल तैयार करने से पहले बाकायदा राज्य सरकारों, केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, आईआईएम, प्राइवेट, लॉ, मेडिकल यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री, नैसकॉम, फिक्की, एसोचैम, एजुकेशनल, रिसर्च व मेडिकल काउंसिल समेत अन्य संस्थाओं से भी सुझाव लिए गए थे। सबसे ऊपर हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया होगा।
प्रो. कुमार ने कहा है कि हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया के नीचे चारों स्तम्भ काम करेंगे। चारों स्तंभ एक-दूसरे से जुड़े तो होंगे पर स्वंतत्र होकर काम करेंगे। इन चारों स्तंभ में भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव, शिक्षाविद, इंडस्ट्री, एनिमेट प्रोफेसर आदि भी शामिल होंगे, ताकि निगरानी भी हो सके। सिंगल विंडो सिस्टम आने से भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सबसे अधिक बदलाव आएगा। इसमें कम से कम मानवीय दखल होगा। हैकी का ड्रॉफ्ट बिल तैयारी के अंतिम चरण में है और अगले संसद सत्र में प्रस्ताव के रूप में रखा जा सकता है।
ऐसे काम करेगा हैकी
- नेशनल हायर एजुकेशन रैग्यूलेटरी काउंसिल (एनएचईआरसी)- एनएचईआरसी का काम तकनीकी और सामान्य शिक्षा के लिए रेगुलेशन बनाने का होगा। अभी तक यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई अलग-अलग रेगुलेशन का काम देखता है। इसके चलते कई बार एक-दूसरे के काम में टकराव आता है और फैसलों या लागू होने में देरी होती है। एनएचईआरसी में सिंगल विंडो सिस्टम से सभी प्रकार के रेगुलेशन बनने से दिक्कतें और टकराव नहीं होगा।
- नेशनल एक्रेडिटेशन काउंसिल(एनएसी)- एनईसी का काम सभी जनरल से लेकर तकनीकी संस्थानों को एक्रेडिटेशन देने का होगा। यह अगल-अलग राज्यों के एक्रेडिटेशन को भी मंजूरी देगा। एक्रेडिटेशन के लिए स्टैंडर्ड सेट करेगा। अभी तक नेशनल एक्रेडिटेशन काउंसिल (नैक), नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (एनबीए), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) अलग-अलग एक्रेडिटेशन करते हैं। इसके चलते अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं। एक सिंगल विंडो सिस्टम होने से निगरानी, पारदर्शिता और गुणवत्ता आएगी।
- हायर एजुकेशन ग्रांट काउंसिल(एचईजीसी)- अभी तक स्कॉलरशिप, विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को ग्रांट, इंस्टीट्यूट डेवलेपमेंट, रिसर्च ग्रांट, वेतन आदि का पैसा अलग-अलग तरीके से दिया जाता है। एचईजीसी बनने से सभी ग्रांट और वेतन का पैसा सिंगल विंडो सिस्टम से जाएगा। इससे काम में तेजी, पारदर्शिता और समय कम लगेगा।
- जनरल एजुकेशन काउंसिल(जीईसी)-जीईसी के शुरू होने पर जनरल, तकनीकी, शिक्षक, मेडिकल, लॉ आदि डिग्री प्रोग्राम का करिकुलम एक जगह तैयार होगा। अभी तक अलग-अलग होने से अक्सर देरी और विवाद रहता है। करिकुलम डेवलेप करने के अलावा टीचिंग लर्निंग, टीचर ट्रेनिंग स्टैंडर्ड सेट करने के अलावा शिक्षण सहायक सामग्री भी तैयार करना होगा।