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17वें दिन अपनी गुडिय़ा के साथ वापस घर लौटी जिकरा, डॉक्टरों से लेकर नर्स तक ने की विदाई

Tue, 03 Sep 2019 09:51 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Tue, 03 Sep 2019 09:51 PM IST
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After seventeen days Zikra returns to home with his doll
जिकरा घर लौटी - फोटो : अमर उजाला

जिकरा...ये नाम तो याद है ना। इंटरनेट पर वायरल इस 11 माह की बच्ची के जल्द स्वस्थ्य होने को लेकर लाखों लोगों ने सोशल मीडिया पर दुआएं मांगी थीं। मंगलवार को 17वें दिन जिकरा अपनी गुडिय़ा परी के साथ वापस घर लौटी। दिल्ली के लोकनायक अस्पताल के ऑर्थो ब्लॉक में भर्ती जिकरा बीते 30 अगस्त को उस वक्त सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की चहेती बन गई जब अमर उजाला ने इस मासूम का अपनी गुडिय़ा के प्रति लगाव को प्रकाशित किया। चंद ही घंटों में ये बच्ची फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सएप पर वायरल हो गई।

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16 नंबर को बिस्तर पर दोनों पैर ऊपरी रस्सी से बंधे थे और पैरों में पट्टी थी। जिकरा के बिलकुल पास उसकी गुडिय़ा भी इसी स्थिति में थी। ये केस बाल मनोविज्ञान से जुड़ा होने के कारण चिकित्सा विज्ञान के लिए भी काफी अनोखा था।
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वायरल जिकरा के जल्द से जल्द स्वस्थ्य होने की लोग प्रार्थना करने लगे। इन लोगों तक अमर उजाला हर दिन जिकरा के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करता रहा। बीते सोमवार ही जिकरा और उसकी गुडिय़ा के दोनों पैरों में पक्का प्लास्टर चढ़ाया। फिलहाल डॉक्टरों ने उसे दो सप्ताह के लिए घर पर आराम करने को कहा है।

मंगलवार को अस्पताल के हड्ड़ीरोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गुप्ता और उनकी पूरी टीम ने मिलकर जिकरा को विदाई दी। हंसते खिलखिलाते डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ जिकरा के साथ सेल्फी ले रहे थे। किसी ने खिलौने तो किसी ने चॉकलेट जिकरा को गिफ्ट भी की। 

दरअसल जिकरा के पिता शहजाद ओखला मंडी में सब्जी विक्रेता हैं। वे अपने परिवार के साथ दिल्ली गेट स्थित डिलाइट सिनेमा के पास ही रहते हैं। 17 अगस्त को उनकी बेटी जिकरा बेड से नीचे गिरने की वजह से पैर में फ्रैक्चर आया। रोती बिलखती मासूम को लेकर जब मां-बाप अपने नजदीक लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने एक्सरे में फ्रैक्चर की पुष्टि की। ऐसी स्थिति में बच्ची को भर्ती करना भी जरूरी था और उसे दर्द से राहत देना भी लेकिन जिकरा काफी डरी-सहमी हुई थी।

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डॉक्टर जैसे ही उसे छूते वह अपनी मां की गोद में छटपटाने लगती। काफी मशक्कत के बाद भी जब उस पर नियंत्रण नहीं पा सके तो जिकरा की मां फरीना ने डॉक्टरों से गुडिय़ा लाने की मंजूरी मांगी। ये गुडिय़ा जकिरा को उसकी नानी ने गिफ्ट की थी। इस गुडिय़ा का नाम परी था। जिकरा का परी से लगाव इस कदर था कि दूध पीने से लेकर सोने तक उसे हर दम परी का साथ अच्छा लगता था।

अस्पताल में अपनी सहेली परी को देख जिकरा खिलखिला गई। ये देख हर कोई भौचक्का सा था। परी की आड़ में डॉक्टरों ने इंजेक्शन तो लगा दिया, लेकिन जिकरा को बिस्तर पर नहीं रख पा रहे थे। तभी डॉक्टर के जहन में ख्याल आया और उन्होंने पहले गुडिय़ा को पट्टी बांधी, फिर उसके दोनों पैर रस्सी से बांध कर ऊपर लटका दिए।

परी की इस स्थिति को देख पता नहीं जिकरा ने क्या महसूस किया? वह भी चुपचाप पट्टी बंधवाती गई और डॉक्टरों ने गुडिय़ा की तरह उसके पैरों को भी बांध ऊपर लटका दिया। इस बीच जिकरा न रोई, न कुछ कहा। डॉक्टरों का कहना है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों में हड्डी टूटने पर उन्हें इस तरह रखा जाता है ताकि हड्डी के जुड़ने में आसानी हो, लेकिन जिकरा के मूवमेंट देख डॉक्टर भी दंग थे कि फ्रैक्चर के बाद भी ये बच्ची बिस्तर पर अपनी गुडिय़ा के साथ करवटें लेती रहती थी। 

कमरे में लगाए खबरों के फ्रेम

पिता शहजाद ने बताया कि बच्ची के घर वापस आने की खुशी वे बता नहीं सकते। उन्होंने अमर उजाला में प्रकाशित सभी खबरों को फ्रेम कराकर जिकरा के कमरे में लगाया है। शहजाद ने कहा कि उन्होंने कभी सपने भी नहीं सोचा था कि उनकी बच्ची के लिए देश के लाखों करोड़ों लोगों से इतना प्यार मिलेगा। उन्होंने इसके लिए अमर उजाला का आभार भी व्यक्त किया।

इसी साल दिसंबर में केस होगा तैयार

डॉक्टरों के अनुसार जिकरा की कहानी को जल्द ही मेडिकल जर्नल में रूप देने का प्रयास शुरू कर दिया है। इसी वर्ष दिसंबर में पीडिएट्रिक ऑर्थोपेडिक्स सर्जन सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से इस केस का प्रतिनिधित्व किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि जिकरा की कहानी वाकई पूरे चिकित्सीय विज्ञान के लिए एक बड़ा उदाहरण बन गई है। देश के हर अस्पताल में इस तरह से भी बच्चों के उपचार पर ध्यान दिया जा सकता है। 

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