अब घुटने लगा दम: NCR में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बाद दिल्ली सबसे ज्यादा प्रदूषित, तीन इलाकों में AQI 300 पार
Delhi-NCR Air Pollution: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक शनिवार को तीन इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। इसमें सबसे अधिक मुंडका का एक्यूआई 337, शादीपुर का 318 व बवाना का 306 दर्ज किया गया।
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राजधानी में हवा की दिशा बदलने से वायु प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है। शनिवार को भी दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में बरकरार रही है। एनसीआर के मुकाबले ग्रेटर नोएडा व नोएडा के बाद दिल्ली में हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही।
शनिवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 216 दर्ज किया गया, जोकि खराब श्रेणी में है। शुक्रवार के मुकाबले चार सूचकांक अधिक बढ़ गया है। दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) का पहले चरण की बंदिशें लागू हैं।
तीन इलाकों में एक्यूआई 300 के पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक शनिवार को तीन इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। इसमें सबसे अधिक मुंडका का एक्यूआई 337, शादीपुर का 318 व बवाना का 306 दर्ज किया गया। वहीं, एनसीआर में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित रहा, यहां एक्यूआई 292 दर्ज किया गया। यह खराब श्रेणी में है। इसके बाद नोएडा का 250, गाजियाबाद में एक्यूआई 210, गुरुग्राम में 172 और फरीदाबाद में 198 दर्ज किया गया।
सोमवार तक खराब श्रेणी में रहने का अनुमान
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के अनुसार शनिवार को हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रही। इस दौरान हवाओं का रुख उत्तर-पश्चिम व उत्तर दिशा की ओर रहा। हवा चार से 12 किलोमीटर प्रतिघंटे से गति से चली। इसी तरह हवा सोमवार तक हवा खराब श्रेणी रहने का अनुमान है।
इस दौरान हवा की गति चार से 16 किलोमीटर प्रतिघंटा रहेगी और आसमान साफ रहने की संभावना है। हालांकि, सुबह के वक्त हल्की धुंध नजर आ सकती है। शुक्रवार को एक्यूआई 212, बृहस्पतिवार को 177, बुधवार को 176, मंगलवार को 155 व सोमवार को 146 दर्ज किया गया था।
धूल प्रदूषण पर होगा वार, 591 टीमें तैनात
राजधानी में धूल प्रदूषण को रोकने के लिए एंटी डस्ट कैंपेन की शनिवार से शुरुआत हो गई है। इस अभियान के तहत दिल्ली में 13 विभागों की 591 टीमें तैनात की गई हैं। सभी कंस्ट्रक्शन साइटों पर निर्माण संबंधी 14 नियमों को पालन करना जरूरी है। इसके लिए विभागों को निर्माण साइट्स की लगातार निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके साथ ही प्रदूषण को रोकने के लिए 82 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग (एमआरएस) मशीनों, 530 वाटर स्प्रिंकलर और 258 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन की तैनात की गई हैं।
अभियान के तहत शनिवार को पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने वजीरपुर हॉट स्पॉट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यहां बढ़ते प्रदूषण का मुख्य वजह अवैध पार्किंग, यातायात जाम की समस्या, सड़क के पास निर्माण का कार्य आदि है। ऐसे में राय ने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैंं। सुबह-शाम सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। राय ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली सरकार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी
राय ने बताया कि वायु प्रदूषण में और सुधार लाने के लिए विंटर एक्शन प्लान के तहत सरकार ने एक महीने के लिए एंटी डस्ट कैंपेन शुरू किया है। अभियान में 13 विभाग, जिसमें डीडीए, एमसीडी, डीपीसीसी, जल बोर्ड, डीएसआईआईडीसी , पीडब्ल्यूडी, राजस्व, सीपीडब्लूडी, एनडीएमसी की 591 टीमें तैनात की गई हैं। इस बार प्रदूषण कम करने के लिए हॉट स्पॉट पर विशेष निगरानी की जा रही है। 13 हॉट स्पॉट के लिए अलग-अलग लोकल स्तर पर कार्य योजना बनाई गई है। जिसके आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
नए कचरा डंपिंग पॉइंट्स को खत्म करना चुनौती
नए कचरा डंपिंग पॉइंट्स खत्म करना निगम के लिए बड़ी चुनौती है। पिछले हफ्ते नए सिरे से ऐसे कचरा पॉइंट्स खत्म करने का काम शुरू किया गया। आठ दिन का समय तय किया था, लेकिन इन्हें साफ करने में कामयाबी नहीं मिली। ऐसे कचरा पॉइंट्स निरंतर बढ़ रहे हैं।
निगम ने नए कचरा पॉइंट्स को महीनेभर में खत्म करने के लिए फिर से समय निर्धारित किया है। इसके लिए सरकारी एजेंसियों, आरडब्ल्यूए, एनजीओ और आम नागरिकों के साथ निगम तालमेल बनाकर काम करने की रणनीति तैयार कर रहा है। निगम को उम्मीद है कि जन भागीदारी से ही सटीक समाधान निकलेगा। नए कचरा पॉइंट्स बनने के पीछे निगम के सफाई कर्मचारी और कॉलोनियों के लोग मजबूरन इसकी वजह बन रहे हैं।
कई स्थानों पर निगम के सफाई कर्मचारी कचरा इकट्ठा कर रहे हैं और एक से दो दिन बाद यहां से कचरा उठता है। पूर्वी दिल्ली में सफाई व्यवस्था की स्थिति अधिक खराब है। सफाई कर्मचारियों से पता चला कि इनके पास पर्याप्त संख्या में कूड़ा उठाने के लिए वाहन नहीं हैं। इन्हें जब वाहन मिलते हैं तो वह कचरा उठाते हैं, नहीं तो कूड़ा एक जगह एकत्र कर छोड़ देते हैं। इसके अलावा उनके पास दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है।
इधर कॉलोनियों में कचरा उठाने वाला टिप्पर एक से दो दिन में आता है, इसलिए रहवासियों के सामने कचरा डालने की चुनौती है, इसलिए लोग गलियों के नुक्कड़ पर कचरा डालने के लिए मजबूर होते हैं।