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प्रदेश कांग्रेस में फिर नेतृत्व का संकट, नहीं दिख रहा शीला दीक्षित जैसा कोई दूसरा चेहरा
Mon, 22 Jul 2019 09:56 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 22 Jul 2019 09:56 PM IST
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अध्यक्ष शीला दीक्षित के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के संकट का सामना कर रही है। कांग्रेस को दिल्ली में शीला दीक्षित जैसा कोई दूसरा दिग्गज चेहरा नजर नहीं आ रहा है।
कांग्रेस के लिए चुनौती यह भी है कि छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव है। इसके लिए हर तबके को साधना बेहद जरूरी है। लोकसभा चुनाव में आप पर मिली बढ़त के बाद कांग्रेस के रणनीतिकार मानकर चल रहे थे कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी पुराने जनाधार को वापस ला सकती है।
कांग्रेस की कमान अब किसके हाथ होगी, इसका आसान जवाब फिलहाल नहीं है। पार्टी के अंदर गुटबाजी को देखते हुए रणनीतिकारों को भी नए खेवनहार का नाम नहीं सूझ रहा है।
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मौजूदा स्थिति में दिल्ली में ऐसा कोई चेहरा नहीं दिखाई दे रहा, जो शीला दीक्षित का उत्तराधिकारी होने का दावा कर सके। बताया जा रहा है कि हाईकमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, जयप्रकाश अग्रवाल, डॉ. अशोक वालिया, अरविंदर सिंह लवली, हारुन यूसुफ, शर्मिष्ठा मुखर्जी समेत अन्य कार्यकारी अध्यक्षों के नाम पर चर्चा तो की है, लेकिन शीला के जाने के बाद कांग्रेस में जो खालीपन दिखाई दे रहा है, उसे भरना इनके लिए बेहद मुश्किल चुनौती होगा।
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कांग्रेस के लिए चुनौती यह भी है कि छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव है। इसके लिए हर तबके को साधना बेहद जरूरी है। लोकसभा चुनाव में आप पर मिली बढ़त के बाद कांग्रेस के रणनीतिकार मानकर चल रहे थे कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी पुराने जनाधार को वापस ला सकती है।
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कांग्रेस की कमान अब किसके हाथ होगी, इसका आसान जवाब फिलहाल नहीं है। पार्टी के अंदर गुटबाजी को देखते हुए रणनीतिकारों को भी नए खेवनहार का नाम नहीं सूझ रहा है।
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मौजूदा स्थिति में दिल्ली में ऐसा कोई चेहरा नहीं दिखाई दे रहा, जो शीला दीक्षित का उत्तराधिकारी होने का दावा कर सके। बताया जा रहा है कि हाईकमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, जयप्रकाश अग्रवाल, डॉ. अशोक वालिया, अरविंदर सिंह लवली, हारुन यूसुफ, शर्मिष्ठा मुखर्जी समेत अन्य कार्यकारी अध्यक्षों के नाम पर चर्चा तो की है, लेकिन शीला के जाने के बाद कांग्रेस में जो खालीपन दिखाई दे रहा है, उसे भरना इनके लिए बेहद मुश्किल चुनौती होगा।
ऐसा इसलिए भी है क्योंकि राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि आप सरकार बनने के बाद कांग्रेस हर चुनाव में तीसरे नंबर पर चली गई थी। पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कमान शीला दीक्षित को सौंपी तो वे कांग्रेस को सीट भले नहीं दिला सकीं, लेकिन उसे दूसरे नंबर पर जरूर पहुंचा दिया। इससे पूरी कांग्रेस में संदेश गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में थोड़ी और मेहनत की जाए तो खोया हुआ जनाधार वापस आ सकता है।