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आचार संहिता की आड़ में अरावली में अवैध कब्जा कर रहे भू-माफिया: एडवोकेट पाराशर
Sat, 04 May 2019 01:45 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क अमर उजाला, फरीदाबाद
Published by: Trainee Trainee
Updated Sat, 04 May 2019 01:45 PM IST
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अरावली की पहाड़ियों में अवैध कब्जा दिखाते हुए एडवोकेट लक्ष्मी नारायण पाराशर
- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद में न्यायिक संघर्ष समिति के प्रधान एडवोकेट लक्ष्मी नारायण पाराशर का आरोप है कि भूमाफिया लोकसभा चुनाव आदर्श आचार संहिता का दुरुपयोग कर अरावली में अवैध कब्जे और निर्माण कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अनजान व्यक्ति ने फोन कर उन्हें सूचना दी कि फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर सड़क से थोड़ा अंदर अरावली पीएलपीए क्षेत्र में 40 एकड़ जमीन पर कब्जा हो रहा है। शुक्रवार को उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया।
उनका दावा है कि वहां उन्हें कई मजदूर दीवार खड़ी करते हुए दिखे जो उनके पहुंचने पर जंगलों में भाग गए। उनका आरोप है कि यह कई अरब रुपये कीमत की इस 40 एकड़ जमीन पर फरीदाबाद का कोई बड़ा भूमाफिया कब्जा करवा रहा है।
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उन्होंने कहा कि जब से आचार संहिता लागू हुई है अरावली में अवैध कब्जे और निर्माण की रफ्तार भी तेज हो गई है। आरोप लगाया कि कब्जे नगर निगम, वन विभाग, खनन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से होते हैं।
माफिया अधिकारियों पर लाखों का चढ़ावा चढ़ाते हैं और अधिकारी अपनी आंखें बंद कर लेते हैं। जब इसकी शिकायत ऊपर की जाती है तो अधिकारी हल्की धाराओं में केस दर्ज कर खुद और माफिया को बचा लेते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि अरावली में अवैध कब्जे और निर्माण के लिए नगर निगम, वन विभाग, खनन विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ भी केस दर्ज कराया जाना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि अनजान व्यक्ति ने फोन कर उन्हें सूचना दी कि फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर सड़क से थोड़ा अंदर अरावली पीएलपीए क्षेत्र में 40 एकड़ जमीन पर कब्जा हो रहा है। शुक्रवार को उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया।
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उनका दावा है कि वहां उन्हें कई मजदूर दीवार खड़ी करते हुए दिखे जो उनके पहुंचने पर जंगलों में भाग गए। उनका आरोप है कि यह कई अरब रुपये कीमत की इस 40 एकड़ जमीन पर फरीदाबाद का कोई बड़ा भूमाफिया कब्जा करवा रहा है।
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उन्होंने कहा कि जब से आचार संहिता लागू हुई है अरावली में अवैध कब्जे और निर्माण की रफ्तार भी तेज हो गई है। आरोप लगाया कि कब्जे नगर निगम, वन विभाग, खनन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से होते हैं।
माफिया अधिकारियों पर लाखों का चढ़ावा चढ़ाते हैं और अधिकारी अपनी आंखें बंद कर लेते हैं। जब इसकी शिकायत ऊपर की जाती है तो अधिकारी हल्की धाराओं में केस दर्ज कर खुद और माफिया को बचा लेते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि अरावली में अवैध कब्जे और निर्माण के लिए नगर निगम, वन विभाग, खनन विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ भी केस दर्ज कराया जाना चाहिए।