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तीन महीने बाद ये है जीएसटी की डरा देने वाली सच्चाई, सुनिए व्यापारियों की जुबानी

Sat, 07 Oct 2017 09:32 AM IST
शुभम अरोड़ा/अमर उजाला, गुरुग्राम
शुभम अरोड़ा/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sat, 07 Oct 2017 09:32 AM IST
सार

-30 वर्षों में कभी नहीं रहा है इतना खराब बाजार 
-जीएसटी के 100 दिन::
जीएसटी से 60 फीसदी घटा %फर्नीचर बाजार’
-30 वर्षों में कभी नहीं रहा है इतना खराब बाजार 
-फेस्टिवल सीजन में भी धंधा है मंदा

गुरुग्राम।

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adverse effect of gst after three month on gurugran businessmen

विस्तार

जीएसटी लागू हुए तीन माह बीत चुके हैं लेकिन शहरभर में फर्नीचर बाजार अभी तक थमा हुआ है। फेस्टिवल सीजन से आस लगाए बैठे फर्नीचर विक्रेताओं के हाथ निराशा के अलावा कुछ नहीं लग पाया है।

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फर्नीचर विक्रेताओं की मानें तो पहले नोट बंदी व अब जीएसटी से एक साल में कारोबार काफी मंदा हो गया है। जीएसटी लागू होने के बाद पहले की तुलना फर्नीचर बाजार में 60 फीसदी से भी अधिक की गिरावट आई है। 
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कारोबारियों के अनुसार वस्तु एवं सेवा कर के स्लैब में फर्नीचर को लग्जरी गुड्स की श्रेणी में डालने के बाद इस पर लगने वाले टैक्स की दरें 12 फीसदी से बढ़ाकर सीधा 28 फीसदी कर दी गई हैं।
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जिससे बाजार में फर्नीचर की कीमतों में भारी उछाल आया है। कच्चे माल से लेकर ब्रांडिड कंपनियों के फर्नीचर महंगे हो गए हैं। जिसके कारण लोगों का फर्नीचर खरीदने का रुझान खत्म होता जा रहा।

30 साल के कारोबार में यह सबसे मंदी का दौर

adverse effect of gst after three month on gurugran businessmen

जीएसटी लागू होने के बाद 30 साल के कारोबार में यह सबसे मंदी का दौर है। दिवाली के मौके पर भी फर्नीचर कारोबार में रौनक नहीं है। महंगाई के साथ-साथ जीएसटी की प्रणाली अभी भी कारोबारियों के लिए उलझन बनी हुई है। रिटर्न भरने सहित अन्य संबंधित कार्यों के लिए कारोबारियों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिसने धंधे में मंदी के साथ कारोबारियों की मुश्किले और बढ़ा दी हैं।

एलएन यादव, प्रधान, फर्नीचर एसोसिएशन गुरुग्राम: जीएसटी लागू होने से व्यापारी वर्ग परेशानियों का सामना कर रहा है। उत्पादों में मंहगाई के कारण कारोबार में 60 फीसदी तक गिरावट आई है।  त्योहार के सीजन में भी फर्नीचर की ब्रिकी पर कोई असर नहीं पड़ा। कारोबारी मंदी की मार झेल रहे हैं।

दीपक कुमार, फर्नीचर विक्रेता: जीएसटी ने जहां एक ओर व्यापार की गति पर रोक लगा दी है वहीं दूसरी ओर कारोबारियों के लिए यह एक सिर्द दर्दी बन गया है। जीएसटी प्रणाली को लेकर व्यापारी अब भी उलझनों में अटका हुआ है। पहले तीमाही टैक्स जमा करवाना पड़ता था लेकिन अब हर माह रिटर्न भरने के लिए यहां-वहां चक्कर काटने पड़ते हैं। धंधे में मंदी के इस दौर में रिटर्न भरने वाले अकाउंटेंट व वकीलों ने भी अपनी फीस दोगुना कर दी है। जो कारोबारियों की जेब पर बोझ  है।

हरदीप वर्मा, फर्नीचर विक्रेता: दिवाली जैसे पर्व पर भी कारोबार में कोई फर्क नहीं पड़ा। सुबह से शाम दुकानदार खाली बैठे खरीदारों के आने की आस लगाए बैठे रहते हैं। मंहगाई के इस दौर में कारोबार ठप होने के कारण दुकान का खर्चा, लेबर का वेतन व अन्च खर्चे करना परेशानी बन गई है। जीएसटी ने दिवाली पर व्यापारी वर्ग का दिवाला निकाल दिया है।

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