Puneet Issar: 'रावण' बने पुनीत इस्सर से अमर उजाला की एक्सक्लूसिव बातचीत, 'द केरल स्टोरी' पर कही ये बात
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विस्तार
प्रश्न- सबसे पहला प्रश्न तो यही कि आपको सबसे ज्यादा लोकप्रियता दुर्योधन का किरदार निभाने से मिली है। लेकिन जब आपने नाटक के लिए विषय का चुनाव किया, तो आपको भगवान राम याद आ गए। ऐसा क्यों?
उत्तर- यह बात बिल्कुल सही है कि मुझे सबसे ज्यादा प्रसिद्धि दुर्योधन के किरदार से मिली है। लेकिन एक बात मैं अकसर कहता हूं कि रामायण हमें यह सिखाती है कि किसी व्यक्ति को क्या करना चाहिए, जबकि महाभारत हमें यह बताती है कि हमें क्या नहीं करना चाहिए। लगभग चार-पांच साल पहले मेरे मन में यह विचार आया था कि रामायण का नाटक मंचन के जरिए नई पीढ़ी को राम की कहानी सुनानी चाहिए।
लेकिन जो आपने प्रश्न किया था, मैं बता दूं कि इसके पहले भी मैं महाभारत के कथानक पर कार्य कर चुका हूं। इस नाटक में मैं रावण की भूमिका निभा रहा हूं, मेरे पुश्र सिद्धांत इस्सर राम के रूप में दिखाई पड़ेंगे। अभी तो इस नाटक का दिल्ली के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में 10 जून को पहली बार मंचन होगा। इसके बाद इसे देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने की योजना है। इस नाट्य मंचन के बाद महाभारत के एक कथानक पर भी काम करने की योजना है।
प्रश्न- इस मंचन में दर्शकों को क्या विशेष मिलने जा रहा है?
उत्तर- मैं नई पीढ़ी को उसकी भाषा में राम की बात सुनाने की कोशिश करने जा रहा हूं। मुझे लगा कि इसका तरीका वह होना चाहिए जिसमें नई पीढ़ी बात करती है, बात समझती है। यही कारण है कि इस सजीव नाटक मंचन में आप केवल तीन घंटे में एक फिल्म की तरह वह सब कुछ देखेंगे जिसकी कल्पना आप सबसे अच्छी फिल्मों से करते हैं। इसमें लाइव डॉयलॉग, ऑडियो-विजुअल इफेक्ट्स, गाने, मंत्र, नृत्य और श्लोक सब कुछ अपने क्लासिकल फॉर्म में दिखाई पड़ेगा।
पूरा नाट्य मंचन पद्य शैली में होगा यानी हर किरदार गायन शैली में अपनी बात कहेगा। कोई प्रॉम्टिंग नहीं होगी। हर किरदार ने अपनी कहानी याद कर रखी है। राम के जीवन के एक क्षण को आप तीन साल तक कह सकते हैं, सुन सकते हैं। ऐसे में राम की पूरी कहानी को केवल तीन घंटे में कहना बहुत कठिन कार्य था, लेकिन मैंने और मेरे पुत्र सिद्धांत इस्सर ने इस काम को कठिन मेहनत के बाद पूरा किया। हमने इस शो को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी का उपयोग करते हुए डिजाइन किया है। भारत में नाट्य और सिनेमा कला प्रेमियों को बिल्कुल नया अनुभव होने जा रहा है।
प्रश्न- आपके पुत्र सिद्धांत इस्सर इस नाटक में भगवान राम का पात्र निभा रहे हैं। बेटा राम और सामने पिता रावण के किरदार में। कैसा अनुभव रहा है?
उत्तर- (हंसते हुए) बहुत अच्छा अनुभव रहा है। शायद हम लोग इस तरह आमने-सामने आकर अपने रिश्ते में कहीं गहराई महसूस कर रहे हैं। लेकिन जब आप नाटक के मंच पर होते हैं, तो आपके दिमाग में केवल अपने पात्र को सबसे अच्छे ढंग से निभाने की सोच रहती है। हमें बहुत अच्छा अनुभव हुउआ है, दर्शकों को भी बहुत अच्छा अनुभव होने जा रहा है।
प्रश्न- कुछ आपके नाटक से अलग हटकर बात। आजकल बॉलीवुड की फिल्मों पर लगातार विवाद हो रहा है। नया विवाद द केरल स्टोरी को लेकर है। आपकी इस मुद्दे पर राय क्या है?
उत्तर- देखिए, मैं बहुत खुलकर यह बात कहना चाहता हूं कि यदि कोई समस्या है, तो उस पर विचार-विमर्श होना चाहिए। बुराई को छुपाने से गंदगी समाप्त नहीं होती। इसे खत्म करना है तो समाज को उस पर जागरूक करना चाहिए, इस पर चर्चा होनी चाहिए। मैं कहूंगा कि यदि समाज में कुछ लोग हैं, जो गलत तरीके से बेटियों को फंसाकर उन्हें गलत रास्ते पर ले जा रहे हैं, तो हमें अपनी बेटियों को इसके बारे में जागरूक करना चाहिए। घटना एक है या एक हजार, इससे अंतर नहीं पड़ता। किसी एक के साथ भी गलत न होने पाए, यह हम सबका उद्देश्य होना चाहिए।