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दिल्ली की हिंसाः एसीपी ने बताया, महिलाओं और बच्चों की मौत की अफवाह से बिगड़े हालात
Sun, 01 Mar 2020 05:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 01 Mar 2020 05:41 AM IST
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घायल एसीपी अनुज कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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चांद बाग इलाके में बीते 24 फरवरी को हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतनलाल की मौत हो गई थी जबकि शाहदरा पुलिस उपायुक्त अमित शर्मा व गोकुलपुरी एसीपी आईपीएस अनुज कुमार गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। तबीयत में सुधार होने के बाद अनुज कुमार ने आपबीती का खुलासा किया।
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अनुज ने बताया कि सड़क पर भीड़ लगातार बढ़ रही थी। भीड़ बढ़ते-बढ़ते 2500 से 3000 के बीच पहुंच गई। इस दौरान किसी ने अफवाह फैला दी कि पुलिस के हमले में कुछ महिलाओं और बच्चों की मौत हो गई है। इसके बाद भीड़ उग्र हो गई और वहां मौजूद 200 पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाने लगे। हमले में रतनलाल के अलावा अमित शर्मा और अनुज बुरी तरह घायल हो गए।
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तीनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां रतनलाल को मृत घोषित कर दिया गया। अनुज ने बताया कि घिरने के बाद भी वह सख्त एक्शन नहीं ले पाए, चूंकि भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी थे।
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अनुज कुमार ने बताया कि हिंसा के दौरान जब वजीराबाद रोड को बंद करने को बंद करने के लिए ट्रैफिक को सामान्य रखने का प्रयास किया जाने लगा। पुलिस को देखकर भीड़ वहां बढ़ने लगी।
अनुज ने बताया कि पहले लोगों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे नहीं माने और भीड़ बढ़ने लगी। इस बीच कुछ लोगों ने बच्चों और महिलाओं के मरने की अफवाह फैला दी। प्रदर्शन स्थल के पास निर्माण कार्य चलने की वजह से वहां पर पत्थर व ईंटें मौजूद थी। भीड़ ने इनसे पुलिस पर हमला कर दिया।
हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लेकिन भीड़ पीछे नहीं हटी और उनका हमला जारी रहा। हमले में पुलिस उपायुक्त अमित शर्मा, एसीपी अनुज, रतनलाल समेत कुल 11 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए।