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बयान में पेनिट्रेशन शब्द न होने से आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा दुष्कर्म की चार साल की पीड़िता के बयान में पेनिट्रेशन शब्द का जिक्र न होना आरोपी को बरी करने का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने चार साल छह महीने की बच्ची से बलात्कार के मामले में आरोपी मुन्ना कुमार को दोषी करार दिया है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट इस फैसले पर भी सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक छोटी बच्ची से तकनीकी कानूनी भाषा की अपेक्षा कर गंभीर गलती की है। 10 अगस्त 2008 को पीड़िता पड़ोसी आरोपी के पास ट्यूशन पढ़ने गई थी। घर लौटने पर उसके निजी अंग से खून बह रहा था। बच्ची ने बताया था कि आरोपी ने उसके साथ अभद्रता की थी। मेडिको-लीगल रिपोर्ट के अनुसार में बच्ची का हाइमन 1.2 सेमी फट चुका था। बावजूद ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के बयान में पेनिट्रेशन शब्द न होने का हवाला देते हुए आरोपी को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर केवल शील भंग की धारा 354 का दोषी ठहराया था।
हाईकोर्ट ने कहा, चार साल की बच्ची कानूनी या मेडिकल शब्दावली समझकर बयान नहीं दे सकती। उसके बयान को उसकी उम्र, आसपास की परिस्थितियों और स्वाभाविक तरीके से देखना चाहिए। उसके बाल-सुलभ शब्दों में दिए गए बयान से स्पष्ट रूप से पेनिट्रेटिव यौन उत्पीड़न का संकेत मिलता है। खंडपीठ ने आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराकर मामले की सुनवाई 10 सितंबर तक टाल दी है।
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा दुष्कर्म की चार साल की पीड़िता के बयान में पेनिट्रेशन शब्द का जिक्र न होना आरोपी को बरी करने का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने चार साल छह महीने की बच्ची से बलात्कार के मामले में आरोपी मुन्ना कुमार को दोषी करार दिया है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट इस फैसले पर भी सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक छोटी बच्ची से तकनीकी कानूनी भाषा की अपेक्षा कर गंभीर गलती की है। 10 अगस्त 2008 को पीड़िता पड़ोसी आरोपी के पास ट्यूशन पढ़ने गई थी। घर लौटने पर उसके निजी अंग से खून बह रहा था। बच्ची ने बताया था कि आरोपी ने उसके साथ अभद्रता की थी। मेडिको-लीगल रिपोर्ट के अनुसार में बच्ची का हाइमन 1.2 सेमी फट चुका था। बावजूद ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के बयान में पेनिट्रेशन शब्द न होने का हवाला देते हुए आरोपी को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर केवल शील भंग की धारा 354 का दोषी ठहराया था।
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हाईकोर्ट ने कहा, चार साल की बच्ची कानूनी या मेडिकल शब्दावली समझकर बयान नहीं दे सकती। उसके बयान को उसकी उम्र, आसपास की परिस्थितियों और स्वाभाविक तरीके से देखना चाहिए। उसके बाल-सुलभ शब्दों में दिए गए बयान से स्पष्ट रूप से पेनिट्रेटिव यौन उत्पीड़न का संकेत मिलता है। खंडपीठ ने आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराकर मामले की सुनवाई 10 सितंबर तक टाल दी है।
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