फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   accident rate increasing on yamuna expressway

एक्सप्रेसवे के नजदीक सरकारी अस्पताल न होने से दम तोड़ रहे लोग

Fri, 08 Apr 2016 02:34 PM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 08 Apr 2016 02:34 PM IST
विज्ञापन
accident rate increasing on yamuna expressway
- फोटो : अमर उजाला

यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे को हादसों का एक्सप्रेसवे कहें तो गलत नहीं होगा। यहां हर साल होने वाले हादसों में घायलों और मृतकों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।

विज्ञापन


आसपास सरकारी अस्पताल की कमी घायलों के आंकड़ों को मौत में बदलने में सहयोगी की भूमिका निभा रही है। वहीं, घटनास्थल पर पहुंचने में पुलिस की देरी लापरवाही का नमूना पेश करती है। खास बात यह है कि घायलों की मदद को पहुंची एंबुलेंस में सुविधाओं का अभाव होता है।
विज्ञापन


ऐसा लगता है कि यह केवल मृतकों को ढोने के लिए है। ऐसे में दुर्घटना में घायल होने वाला पीड़ित कराहता हुआ भगवान से अपनी जान बचाने की गुहार करता है। आखिर वह करे भी तो क्या?
विज्ञापन
विज्ञापन


केस:1
आसपास अस्पताल होता तो पापा आज जिंदा होते
मथुरा निवासी अभिषेक नागर के पिता डॉ. रमेश नागर की मौत मार्च में यमुना एक्सप्रेसवे पर हो गई। बेटे की मानें तो आसपास अस्पताल होता तो आज पापा साथ होते। रमेश बाइक पर बेटा-बेटी के साथ जा रहे थे। इस दौरान हुए हादसे में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। अभिषेक को भाई-बहन के  फोन से पिता के बारे में सूचना मिली थी। उस समय तक पुलिस भी वहां नहीं पहुंची थी। हादसे के बाद रमेश नागर करीब एक से डेढ़ घंटे तक वहीं पड़े रहे और मृत्यु हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब गंभीर रूप से घायल भाई-बहन का मथुरा के जिला अस्पताल में ढंग से इलाज नहीं हुआ। बकौल अभिषेक जब वह वहां पहुंचे तो बच्चों की सही तरीके से मरहम पट्टी भी नहीं हुई थी। वहां से उन्होंने बच्चों को रेफर करवाकर निजी क्लीनिक में भर्ती कराया। फिलहाल, एक माह में इलाज में चार लाख रुपये खर्च हो गए। अभिषेक ने प्रॉपर्टी बेचकर इलाज कराया।

केस:2
बिल चुकाओ नहीं तो यहां से जाने नहीं देंगे
यमुना एक्सप्रेसवे पर नोएडा निवासी दो मजदूर अजय व संजय (बदला नाम) गंभीर रूप से जख्मी हो गए। परिजनों के मुताबिक दुर्घटना के बाद उन्हें पुलिस ने एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। जब होश आया तो उनके सामने निजी अस्पताल का बिल पड़ा हुआ था। इसमें दो दिन में करीब एक लाख रुपये बना दिए गए थे। जब उन्होंने बिल के पैसे नहीं होने की मजबूरी बताई तो अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बंधक जैसी हालत में डाल दिया। किसी तरह से बातचीत के बाद वह कुछ पैसे चुकाकर अस्पताल रूपी जेल से छूटे। फिर वह वहां से जिला अस्पताल में दाखिल होने पहुंचे तो वहां आईसीयू नहीं होने से उन्हें दाखिला देने से इंकार कर दिया गया। तब उनके परिजन उन्हें लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक दर-दर की ठोकरें खाते फिरते रहे।

तुरंत इलाज पर 50 फीसदी की बच सकती है जान
लॉ कमीशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर सड़क हादसों के दौरान घायलों को तुरंत इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाए तो घायलों की संख्या के 50 फीसदी की जान बचाई जा सकती है। लिहाजा, दुर्घटना के दौरान आसपास इलाज की सुविधा बेहद जरूरी हो जाती है।

यूपी में 2015 में मरे 17666 लोग
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2015 के दौरान सड़क हादसों में 17666 लोगों की मृत्यु हो गई। इसमें 67 प्रतिशत पुरुष और 33 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहीं। कुल 23205 व्यक्ति दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। इसमें 72 प्रतिशत पुरुष व 28 प्रतिशत महिलाएं रहीं।

शाम 3 बजे से 6 बजे के बीच ज्यादा हादसे
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के वर्ष 2013 और 14 के आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि शाम तीन बजे से छह बजे तक सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं (17.26 प्रतिशत) हुई हैं। इसके बाद शाम छह बजे से रात नौ बजे के बीच 16.92 प्रतिशत। वहीं, सबसे कम दुर्घटना रात 12 बजे से सुबह तीन बजे के बीच 5.78 प्रतिशत रही।

सड़क दुर्घटनाओं में अगर घायलों को तुरंत मदद मिले तो यह बेहतर कदम होगा। यही नहीं जरूरी उपायों को अपनाकर सड़क हादसों को भी रोका जा सकता है।-पीयूष तिवारी, फाउंडर-सीईओ, सेव लाइफ फाउंडेशन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed