नोएडा: एटीएस के बुके प्रोजेक्ट में हादसा, शटरिंग पर गिरी दीवार, 2 मजदूरों की मौत
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सेक्टर-132 में एटीएस के बुके प्रोजेक्ट में 7 फुट ऊंची दीवार बाहर की ओर लगी शटरिंग पर जा गिरी। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई। गुस्साए मजदूरों ने ठेकेदार के साइट मुंशी को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। पीड़ित परिवारों की तरफ से पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी गई है।
सुबह करीब साढे़ 10 बजे पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी मजदूर सनी (20) व मुर्तजा (26) शटरिंग पर खड़े होकर टावर सी की 14वीं मंजिल की दीवार पर डिजाइन बना रहे थे। अचानक सात फुट ऊंची दीवार भरभराकर दोनों के ऊपर गिर गई। इससे लोहे की शटरिंग भी गिर गई। दोनों मजदूर नीचे गिरे गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मजदूरों की मदद से घायलों को जेपी अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
मजदूरों का गुस्सा फूटा, बोले- नहीं थे सुरक्षा इंतजाम
एक्सप्रेसवे कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-132 में सोमवार सुबह एटीएस के बुके प्रोजेक्ट में हादसे के बाद सैकड़ों मजदूर मौके पर एकत्र हो गए और ठेकेदार के मुंशी को पीटना शुरू कर दिया। पुलिस ने किसी तरह मुंशी को छुड़ाया। मजदूरों का आरोप है कि शटरिंग ठीक से नहीं लगाई गई थी और जाल भी नहीं लगा था।
एटीएस की शटरिंग गिरने की जानकारी मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार मिश्रा और सीओ अवनीश कुमार मौके पर पहुंचे। इनकी कार्रवाई से मजदूर का आक्रोश कम नहीं हुआ। मजदूरों का आरोप है कि न तो घटनास्थल को सील कराया गया और न ही बिल्डर या उसके किसी प्रतिनिधि को बुलाया गया। मजदूरों ने मुआवजे की भी मांग की, लेकिन उनको किसी तरह शांत कर दिया गया। मजदूरों का आरोप है कि बिल्डर की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है। बिल्डर ने अपने प्रचार-प्रसार के लिए भवन से बाहर निकले सरिये कटवा दिए। सरिये होते तो शटरिंग गिरने के बाद भी मजदूर बच सकते थे। मजदूरों ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग में ऐसी सामग्री लगवाई जा रही है कि काम करने के दौरान ही दीवारेें गिर रही हैं। प्रचार करने के लिए मजदूर से दीवार तैयार कराई जा रही थी, ताकि एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले लोगों को इसका डिजाइन आकर्षित कर सके। लोहे की शटरिंग को ठीक से नहीं बनाया गया था और सपोर्ट भी काफी कम थी।
इसी माह शटरिंग गिरने से हुई थी 4 लोगों की मौत
नोएडा के सेक्टर-94 के बीपीटीपी कैपिटल सिटी के प्रोजेक्ट में बीते 7 अक्तूूबर को बिल्डर-ठेकेदार की लापरवाही से 18वीं मंजिल पर लगी ऊंची शटरिंग ट्रैक्टर की टक्कर से गिर गई थी। इसमें 4 मजूदरों की मौत हुई थी और 5 लोग गंभीर घायल हो गए थे। इस मामले में प्रशासन ने ठेकेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इस प्रोजेक्ट में भी जाल का प्रयोग नहीं जा रहा था।
शटरिंग गिरने से दो मजदूरों की मौत होने के मामले में अभी किसी की ओर से शिकायत नहीं आई है। तहरीर आती है तो मामला दर्ज किया जाएगा। कोई तहरीर नहीं देता है तो भी पुलिस अपनी ओर से कार्रवाई करेगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- सुधा सिंह, एसपी सिटी नोएडा।
मृतकों के परिजनों को दिए जाएंगे 14-14 लाख मुआवजा
पुलिस और प्रशासन के प्रयासों के बाद भी बिल्डरों पर कोई असर नहीं हो रहा है। प्रशासन के साफ निर्देश हैं कि बिना जाल के कोई काम नहीं किया जाए, मगर फिर भी बिल्डर और ठेकेदार भवन नियमावली का पालन नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने पुष्टि की है कि सोमवार को एटीएस बिल्डर के प्रोजेक्ट में हुए हादसे में लापरवाही के कारण ही दो मजदूरों की जान गई। श्रम विभाग में दोनों मजदूर रजिस्टर्ड थे। उनके परिजनों को 14-14 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
दरअसल, डीएम बीएन सिंह ने पिछले दिनों हुए हादसे के बाद सभी प्राधिकरणों और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि मजदूरों की सुरक्षा समेत बिल्डर साइटों पर सारे मानकों का पालन कराया जाए। सुरक्षा के लिए सबसे अहम जाल होता है। एटीएस की साइट पर जाल नाममात्र के लिए ही लगा था। सोमवार को शटरिंग पर दीवार गिरी तो सबसे पहले जाल टूटकर गिरा। इसके बाद दोनों मजूदूर 14वीं मंजिल से नीचे गिरे। उन दोनों के ऊपर शटरिंग के लोहे के पाइप भी गिरे। आसपास काम कर रहे मजदूरों ने उन्हें निकालने का प्रयास किया, लेकिन उसमें काफी देर लग गई थी। मजदूरों की मानें तो शटरिंग ऊंची होने के कारण हिल रही थी और लचीलापन आ गया था। दीवार का वजन पड़ा तो शटरिंग गिर गई। अधिकारियों ने बताया कि शटरिंग को मजबूत बनाने के लिए बीच में ठोस सपोर्ट नहीं लगाया गया था। 7 अक्तूबर को हुए हादसे के समय भी शटरिंग और जाल लगाने में लापरवाही बरती गई थी और 4 लोगों की मौत हो गई थी।
बिल्डर की चलती है मनमानी
प्रदूषण बढ़ने के कारण बिल्डरों ने तेजी से काम कराना शुरू कर दिया है। एक नवंबर से सभी बिल्डरों के काम बंद कराने के आदेश दिए गए हैं, इसलिए काफी संख्या में मजूदर लगाए जा रहे हैं। इस दौरान बिल्डर और उनके ठेकेदार नियमों की भी धज्ज्यिां उड़ा रहे हैं। बिल्डरों की साइट पर प्रदूषण बोर्ड और प्राधिकरण के अधिकारी नियमित भ्रमण नहीं करते। इससे उनकी मनमानी चलती है। एक्सप्रेसवे कोतवाली के इंस्पेक्टर हंसराज भदौरिया का कहना है कि जांच में पाया गया कि जाल नाममात्र का लगा हुआ था। शटरिंग में भी सपोर्ट सिस्टम मजबूत नहीं था। इसी कारण दोनों मजदूरों की मौत हुई है। अगर सपोर्ट और जाल मजबूत होते तो शायद मजदूरों की जान बच सकती थी।
श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थे मजदूर
पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी मुर्तजा और सनी की मौत के बाद श्रम कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे। उपश्रमायुक्त पीके सिंह ने बताया कि दोनों मजदूर रजिस्टर्ड थे और उनको बोर्ड की ओर से 5 लाख 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही नियोजनकर्ता से भी 8 से 10 लाख रुपये दिलाए जाएंगे। इससे मृतकों के परिजनों को करीब 14 लाख रुपये तक मिलेंगे।