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सरकार हो या परिवार पानी बंद करने का नहीं अधिकार : कोर्ट
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- अपने ही घर में पानी की सप्लाई न मिलने से परेशान महिला की सप्लाई तुरंत बहाल करने का कोर्ट ने दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
रोहिणी जिला ने एक आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। जिला न्यायाधीश विक्रम (लिंक जज) ने पीतमपुरा के लोक विहार क्षेत्र में रहने वाली महिला रश्मि सेठी के दूसरे मंजिल पर स्थित फ्लैट में पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं। मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा है। आरोप था कि पहली मंजिल पर रह रहे परिवार के सदस्यों ने रश्मि सेठी की पानी की सप्लाई बंद कर दी थी, जिसके कारण उन्हें अपने ही घर में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रही थी। दिल्ली जल बोर्ड से अलग कनेक्शन लेने की प्रक्रिया भी सह-मालिक की एनओसी नहीं मिलने के कारण अटक गई थी।
केस का विवरण रश्मि सेठी ने मुकदमे में अंतरिम राहत मांगी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। अपील पर सुनवाई करते हुए जिला न्यायाधीश ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पानी जैसी बुनियादी नागरिक सुविधा को रोके रखना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे अपीलकर्ता को अपूरणीय क्षति हो रही है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुकदमे के अंतिम निर्णय तक महिला को पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश का संपत्ति के स्वामित्व या अधिकार संबंधी विवाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदालत ने कहा कि संपत्ति विवाद चाहे जो हो, पानी जैसी आवश्यक सुविधा को बाधित नहीं किया जा सकता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
रोहिणी जिला ने एक आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। जिला न्यायाधीश विक्रम (लिंक जज) ने पीतमपुरा के लोक विहार क्षेत्र में रहने वाली महिला रश्मि सेठी के दूसरे मंजिल पर स्थित फ्लैट में पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं। मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा है। आरोप था कि पहली मंजिल पर रह रहे परिवार के सदस्यों ने रश्मि सेठी की पानी की सप्लाई बंद कर दी थी, जिसके कारण उन्हें अपने ही घर में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रही थी। दिल्ली जल बोर्ड से अलग कनेक्शन लेने की प्रक्रिया भी सह-मालिक की एनओसी नहीं मिलने के कारण अटक गई थी।
केस का विवरण रश्मि सेठी ने मुकदमे में अंतरिम राहत मांगी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। अपील पर सुनवाई करते हुए जिला न्यायाधीश ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पानी जैसी बुनियादी नागरिक सुविधा को रोके रखना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे अपीलकर्ता को अपूरणीय क्षति हो रही है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुकदमे के अंतिम निर्णय तक महिला को पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश का संपत्ति के स्वामित्व या अधिकार संबंधी विवाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदालत ने कहा कि संपत्ति विवाद चाहे जो हो, पानी जैसी आवश्यक सुविधा को बाधित नहीं किया जा सकता।
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