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टकराव: आप के शीर्ष नेताओं में अब खुली जंग
Updated Wed, 11 Mar 2015 03:28 PM IST
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आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच चल रहा टकराव मंगलवार को खुलकर सामने आ गया। वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पीएसी से निकाले जाने के बाद अरविंद केजरीवाल के करीबियों ने पहली बार औपचारिक रूप से दोनों नेताओं पर वार किया है।
मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और पंकज गुप्ता ने आरोप लगाया कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। दोनों ने केजरीवाल की छवि खराब करने की भी कोशिश की तभी उन्हें पीएसी से निकाला गया। दूसरी तरफ दोनों नेताओं ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए जल्द ही इस बारे में पूरा खुलासा करने की बात कही है।
मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और पंकज गुप्ता ने आरोप लगाया कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। दोनों ने केजरीवाल की छवि खराब करने की भी कोशिश की तभी उन्हें पीएसी से निकाला गया। दूसरी तरफ दोनों नेताओं ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए जल्द ही इस बारे में पूरा खुलासा करने की बात कही है।
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दोनों नेताओं ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
मंगलवार सुबह सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और पंकज गुप्ता ने मीडिया में बयान जारी किया। इसमें विस्तार से दोनों नेताओं को पीएसी से बाहर निकालने की वजह गिनाई गई हैं। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के उस फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें बैठक की जानकारी सार्वजनिक नहीं करनी थी। बयान में कहा गया है कि बावजूद इसके मीडिया में बयान दिए जा रहे हैं। इससे माहौल बन रहा है कि कार्यकारिणी का फैसला अलोकतांत्रिक और गैर-जिम्मेदाराना था। लिहाजा दोनों नेताओं को निकालने की वजहें सार्वजनिक करनी पड़ रही हैं।
वहीं, योगेंद्र यादव ने भी पार्टी पर उनके खिलाफ विधायकों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के चार साथियों के आधिकारिक बयान से खुली और पारदर्शी संवाद की संभावना जगी है। यह भी उम्मीद है कि इस विषय पर पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों पर गलत तरीके से बनाए जा रहे दबाव पर रोक लगेगी। प्रशांत भूषण ने कहा कि वह यह आरोप झूठे हैं। मैं तीन-चार दिनों में सभी आरोपों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दूंगा।
प्रशांत पर आरोप
1. चुनाव के दौरान प्रशांत भूषण ने दूसरे प्रदेशों के कार्यकर्ताओं को फोन कर दिल्ली आने से रोका। प्रशांत का कहना था कि वह खुद भी दिल्ली के चुनाव में प्रचार नहीं कर रहे हैं। इस बार पार्टी को हराना जरूरी है। तभी अरविंद का दिमाग ठिकाने आएगा। इसकी पुष्टि अंजलि दमानिया भी कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, प्रशांत ने लोगों को चंदा देने से भी रोका।
2. प्रशांत की कोशिश थी कि पार्टी को 20-22 सीटों से ज्यादा न मिलें। पार्टी के हारने से परिवर्तन मुमकिन होगा।
3. पूरे चुनाव के दौरान प्रशांत ने बार-बार धमकी दी कि वह मीडिया के सामने दिल्ली चुनाव में पार्टी की तैयारियों को बर्बाद कर देंगे।
4. आरोप है कि भाजपा द्वारा संचालित संस्था ‘अवाम’ ने चुनावों के दौरान आप को बदनाम किया। अवाम को प्रशांत भूषण ने समर्थन किया था। शांति भूषण ने तो अवाम के पक्ष में और आप के खिलाफ खुलकर बयान दिए थे।
योगेंद्र पर आरोप
ऐसे सबूत हैं कि केजरीवाल की छवि खराब करने के लिए योगेंद्र यादव ने अखबारों में खबरें छपवाईं। अगस्त 2014 की एक खबर इसका प्रमाण भी है। निजी बातचीत में कई बड़े मीडिया कर्मियों ने भी माना कि योगेंद्र उनसे अरविंद की छवि खराब करने के लिए अनौपचारिक बातें करते थे।