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आप विधायकों की सदस्यता के मामले में अब 21 जुलाई को होगी सुनवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 14 Jul 2016 06:59 PM IST
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डीयू पहुंचे आप नेता
- फोटो : अमर उजाला
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संसदीय सचिव बने आम आदमी पार्टी (आप) विधायकों की सदस्यता के मामले में चुनाव आयोग अब 21 जुलाई को सुनवाई करेगा। बृहस्पतिवार दोपहर बाद चली करीब बीस मिनट की सुनवाई के बाद आयोग ने सभी पक्षों को दोबारा बुलाया है।
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सभी विधायक अपने वकीलों के साथ आयोग पहुंचकर अपना पक्ष रखेंगे। दरअसल, चुनाव आयोग में वकील प्रशांत पटेल ने एक याचिका डाल रखी है कि दिल्ली में संसदीय सचिव का पद लाभ के पद के दायरे में आता है।
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लिहाजा इस पद पर काम कर रहे 21 आप विधायकों की सदस्यता रद की जाये। आयोग इस मामले की सुनवाई कर रहा है। बृहस्पतिवार को कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन व पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और भाजपा की तरफ से विवेक गर्ग आयोग पहुंचे और इस मामले में खुद को पार्टी बनाने की मांग की।
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आप विधायक जरनैल सिंह ने सुनवाई के बाद बताया कि आयोग ने दोनों पार्टियों की सुनने के बाद कहा कि उनकी अर्जी से जुड़े कागजात सभी विधायकों को मुहैया कराया जाये।
जिससे विधायकों को इसे देखने का मौका मिल जाये। उन्होंने बताया कि आयोग ने सुनवाई की अगली तारीख 21 जुलाई तय की है। उस दिन सभी आप विधायक अपने-अपने वकीलों के साथ आयोग पहुंचकर अपना पक्ष रखेंगे।
जानिए क्या है मामला
आप नेता
- फोटो : अमर उजाला
सरकार बनने के बाद 2015 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने आप के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। जून, 2015 को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा में कानून संशोधन करके मंत्रियों के संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से बाहर निकालने का प्रयास किया।
लेकिन जून, 2016 को राष्ट्रपति ने इस बिल को खारिज कर दिया था। इसी बीच प्रशांत पटेल नाम के वकील ने इस पद को लाभ का पद बताते हुये आयोग में अर्जी लगाई। मार्च, 2016 में चुनाव आयोग ने 21 विधायकों को नोटिस जारी किया।
इसमें विधायकों से सवाल किया गया कि वह कैसे लाभ के पद के दायरे में नहीं आते। और क्यों न उनकी विधान सभा सदस्यता रद कर दी जाये। मई 2016 में आप विधायकों ने अपना जवाब चुनाव आयोग को भेज दिया था। इसमें सभी ने बताया है कि उन्होंने किसी
21 विधायकों पर लटकी है तलवार
1. जरनैल सिंह, राजौरी गार्डन
2. जरनैल सिंह, तिलक नगर
3. नरेश यादव, मेहरौली
4. अल्का लांबा, चांदनी चौक
5. प्रवीण कुमार, जंगपुरा
6. राजेश ऋषि, जनकपुरी
7. राजेश गुप्ता, वजीरपुर
8. मदन लाल, कस्तूरबा नगर
9. विजेंद्र गर्ग, राजिंदर नगर
10. अवतार सिंह, कालकाजी
11. शरद चौहान, नरेला
12. सरिता सिंह, रोहताश नगर
13. संजीव झा, बुराड़ी
14. सोम दत्त, सदर बाजार
15. शिव चरण गोयल, मोती नगर
16. अनिल कुमार बाजपई, गांधी नगर
17. मनोज कुमार, कोंडली
18. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर
19. सुखबीर दलाल, मुंडका
20. कैलाश गहलोत, नजफगढ़
21. आदर्श शास्त्री, द्वारका
लेकिन जून, 2016 को राष्ट्रपति ने इस बिल को खारिज कर दिया था। इसी बीच प्रशांत पटेल नाम के वकील ने इस पद को लाभ का पद बताते हुये आयोग में अर्जी लगाई। मार्च, 2016 में चुनाव आयोग ने 21 विधायकों को नोटिस जारी किया।
इसमें विधायकों से सवाल किया गया कि वह कैसे लाभ के पद के दायरे में नहीं आते। और क्यों न उनकी विधान सभा सदस्यता रद कर दी जाये। मई 2016 में आप विधायकों ने अपना जवाब चुनाव आयोग को भेज दिया था। इसमें सभी ने बताया है कि उन्होंने किसी
21 विधायकों पर लटकी है तलवार
1. जरनैल सिंह, राजौरी गार्डन
2. जरनैल सिंह, तिलक नगर
3. नरेश यादव, मेहरौली
4. अल्का लांबा, चांदनी चौक
5. प्रवीण कुमार, जंगपुरा
6. राजेश ऋषि, जनकपुरी
7. राजेश गुप्ता, वजीरपुर
8. मदन लाल, कस्तूरबा नगर
9. विजेंद्र गर्ग, राजिंदर नगर
10. अवतार सिंह, कालकाजी
11. शरद चौहान, नरेला
12. सरिता सिंह, रोहताश नगर
13. संजीव झा, बुराड़ी
14. सोम दत्त, सदर बाजार
15. शिव चरण गोयल, मोती नगर
16. अनिल कुमार बाजपई, गांधी नगर
17. मनोज कुमार, कोंडली
18. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर
19. सुखबीर दलाल, मुंडका
20. कैलाश गहलोत, नजफगढ़
21. आदर्श शास्त्री, द्वारका