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आप का संकट: राघव चड्ढा के बयान से उठा पार्टी में तूफान, अपने ही नेताओं के निशाने पर; भाजपा के 'प्रवचन' शुरू
Sat, 04 Apr 2026 07:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 04 Apr 2026 07:16 AM IST
सार
राज्यसभा सांसद को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनके वीडियो संदेश ने पार्टी की आंतरिक राजनीति चर्चा में है। राघव ने खुद को जनता की आवाज बताते हुए पार्टी पर ही गंभीर सवाल खड़े किए है। जवाब में आप के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके राजनीतिक रुख और भूमिका पर ही सवाल उठा दिए। आप के भीतर उठे इस विवाद ने विरोधी दलों को भी सक्रिय कर दिया है।
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राघव चड्ढा
- फोटो : twitter @raghav_chadha
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विस्तार
आम आदमी पार्टी के भीतर मतभेद अब खुलकर सार्वजनिक टकराव में बदलते नजर आ रहे हैं। राज्यसभा सांसद को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनके वीडियो संदेश ने पार्टी की आंतरिक राजनीति चर्चा में है। राघव ने खुद को जनता की आवाज बताते हुए पार्टी पर ही गंभीर सवाल खड़े किए है। जवाब में आप के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके राजनीतिक रुख और भूमिका पर ही सवाल उठा दिए। आप के भीतर उठे इस विवाद ने विरोधी दलों को भी सक्रिय कर दिया है।
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प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि किसी सांसद को बोलने से रोकना लोकतंत्र के खिलाफ है। वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे अंदरूनी लड़ाई करार देते हुए आप पर भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष के आरोप लगाए। कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद उदित राज ने भी राघव से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की और कहा कि अगर वे नाराज हैं तो खुलकर सामने आएं।
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राघव चड्ढा विवाद, आप के भीतर लोकतंत्र खत्म होने के संकेत : भाजपा
आम आदमी पार्टी में जारी विवाद के बीच प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पार्टी नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर पहुंच चुका है और नेतृत्व केवल बाहर से एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का हालिया वीडियो इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के भीतर संवाद और लोकतंत्र खत्म हो चुका है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि जब एक वरिष्ठ नेता को अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़े तो यह पार्टी की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले स्वाति मालीवाल भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा चुकी हैं, जिससे साफ है कि असंतोष लगातार बढ़ रहा है। सचदेवा के मुताबिक, आम आदमी पार्टी अब एक व्यक्ति केंद्रित संगठन बन गई है, जहां स्वतंत्र राय रखने वाले नेताओं को या तो किनारे कर दिया जाता है या दबाया जाता है।
भाजपा नेता ने राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। यह कदम दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व आलोचना से डरता है और असहमति को स्वीकार करने की क्षमता नहीं रखता। सचदेवा ने आरोप लगाया कि जिन सिद्धांतों, पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र पर आम आदमी पार्टी की स्थापना हुई थी, वे अब खत्म हो चुके हैं।
राघव पर आप का हमला, मोदी के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे?
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सामने आए उनके बयान पर पलटवार किया है। पार्टी ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक निर्णय बताते हुए चड्ढा पर आरोप लगाया कि वह लंबे समय से पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे। जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसी भी पार्टी में नेतृत्व और पदों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया है। अगर कोई सदस्य पार्टी के सामूहिक फैसलों जैसे वॉकआउट या विरोध का समर्थन नहीं करता और व्हिप के खिलाफ जाता है तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने समय-समय पर उनकी जिम्मेदारियां बदली हैं। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने अरविंद केजरीवाल से निडरता और संघर्ष का पाठ सीखा है, लेकिन राघव चड्ढा इस कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि चड्ढा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव से लेकर पंजाब के अधिकारों के मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। गुजरात में कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और अन्य जनहित के मुद्दों पर भी उन्होंने सदन में आवाज नहीं उठाई। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो डर गया, समझो मर गया की सीख पार्टी की पहचान है, लेकिन राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से न तो प्रधानमंत्री मोदी से सवाल कर रहे हंै और न ही बड़े राष्ट्रीय मुद्दे उठा रहे हैं।