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सौरभ भारद्वाज का केंद्र पर हमला, बोले- मेट्रो किराया आप बढ़ाएं और जमीन दिल्ली सरकार दे

Wed, 10 Jul 2019 07:14 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Wed, 10 Jul 2019 07:14 PM IST
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AAP charged double standards on Centeral government
आप नेता सौरभ भारद्वाज - फोटो : Social Media

आम आदमी पार्टी मुख्यालय में हुई एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में मेट्रो फेज 4 को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच में काफी ज्यादा पत्र व्यवहार हुआ है। इसी संबंध में ईपीसीए ने भी एक रिपोर्ट बनाकर सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है।

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उन्होंने कहा कि ईपीसीए के चेयरमैन भूरे लाल जी, जो कि दिल्ली में चल रही सीलिंग के सिलसिले में भी बहुचर्चित हैं, उनका नाम बहुत अच्छे और सख्त अधिकारियों में आता था। परंतु जिस प्रकार से ईपीसीए ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में रखी है, उसको लेकर मेरे मन में संदेह पैदा हुआ है।
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ईपीसीए द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को अगर ध्यान से पढ़ा जाए तो यह साफ तौर पर नजर आता है कि यह पूरी की पूरी रिपोर्ट भाजपा की तरफ झुकी हुई है।

दिल्ली सरकार ने मेट्रो फेस 4 के संबंध में दो बातें रखी है। पहली, कि फेस वन, टू और थ्री में मेट्रो के लिए जो जमीन खरीदी जाती थी, उसके लिए आधा पैसा दिल्ली सरकार देती थी और आधा पैसा केंद्र सरकार देती थी।  दूसरा, कि मेट्रो को चलाने में जो भी घाटा होता था, उसको भी केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार आधा-आधा वहन करती थी। परंतु यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि मेट्रो फेस 4 में केंद्र सरकार का कहना है, कि मेट्रो के लिए जो जमीन खरीदी जानी है, उसका सारा पैसा दिल्ली सरकार दे, और मेट्रो को चलाने में जो भी घाटा होगा वह सारा घाटा भी दिल्ली सरकार ही वहन करें, जो की कतई ठीक नहीं है।
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सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब मेट्रो में किराया बढ़ाने की बात हो तो केंद्र सरकार कहती है कि निर्णय हम लेंगे। जब मेट्रो में महिलाओं के लिए फ्री राइड का मुद्दा होता है तो केंद्र सरकार कहती है इस पर निर्णय हम लेंगे। परंतु जब मेट्रो फेज 4 के लिए जमीन खरीदने की बात आती है तो केंद्र सरकार कहती है कि सारा पैसा दिल्ली सरकार देगी, घाटा वहन करने की बात हो, तो वह भी दिल्ली सरकार देगी। जो कि बिल्कुल अमानवीय और असंवैधानिक है।

ईपीसीए की कार्य नीति पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक तरफ तो ईपीसीए कहती है कि मेट्रो दिल्ली के लिए बेहद जरूरी है, इससे दिल्ली में प्रदूषण का स्तर घटेगा। दूसरी ओर जब दिल्ली सरकार मेट्रो के लिए 6 कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव देती है, तो ईपीसीए मात्र तीन कॉरिडोर बनाने की बात करती है। जब दिल्ली सरकार 6 कॉरिडोर के लिए पैसा देने को तैयार है तो तीन कॉरिडोर क्यों? क्योंकि केंद्र सरकार ऐसा चाहती है।

इस पूरे प्रकरण को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईपीसीए केंद्र सरकार के अधीन आने वाला एक संस्थान बन गया है। ईपीसीए के चेयरमैन भूरे लाल जी ने अपने जीवन काल में जो ख्याति कमाई थी, वह इस एक प्रकरण से धूमिल होती नजर आ रही है।

ईपीसीए द्वारा प्रस्तुत कि गई रिपोर्ट पर बात करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ईपीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 कॉरिडोर में से 3 जगह मेट्रो की ज़रूरत नही है, जैसे लाजपत नगर से साकेत, इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ, रिठाला से बवाना होते हुए नरेला तक मेट्रो की जरूरत नही है। सिर्फ 3 फेस की बात ईपीसीए और केंद्र सरकार कर रही है। 

दिए गए इन तीनों कॉरिडोर पर बात करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह दो प्रकार से गलत है। पहला तो यह कि इन तीनों जगहों पर रहने वाले दिल्लीवासियों को मेट्रो की सेवाओं से वंचित किया जा रहा है। दूसरा यह कि दिल्ली सरकार का सारा पैसा दिल्ली के करदाताओं से आता है, तो केंद्र सरकार इन कॉरिडोर का सारा खर्चा दिल्ली सरकार के ऊपर डाल कर क्यों दिल्ली के करदाताओं पर भार बढ़ाना चाहती है?

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि इस संबंध में मैंने ईपीसीए के चेयरमैन भूरे लाल जी को एक पत्र लिखकर दोबारा से इस प्रकरण पर विचार करने का अनुरोध किया है। मुझे पूरी आशा है कि जिस प्रकार की उनकी छवि रही है, वह इस प्रकरण पर दोबारा विचार करके सही निर्णय लेंगे।

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