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एक साल बाद भी नहीं लागू हुआ केजरीवाल सरकार का ये अहम फैसला, अब फिर होगी कैबिनेट बैठक

Sat, 25 Feb 2017 10:24 AM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Feb 2017 10:24 AM IST
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aap cabinet to meet for rehab colonies ownership
kejriwal - फोटो : अमर उजाला

पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक सस्ते में देने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट फिर बैठेगी।

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सितंबर, 2015 में जो मूल आवंटी को प्रति वर्गमीटर 500 रुपये और खरीदार को 2000 रुपये प्रति वर्गमीटर भुगतान पर मकान या फ्लैट्स फ्री होल्ड करने का फैसला किया था, वो अभी तक लागू नहीं हो सका है।
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मामला विभाग की तरफ से कुछ पॉश पुनर्वास कॉलोनियों से अधिक चार्ज वसूलने के विभाग के सुझाव को लेकर अटका हुआ है। सूत्र बताते हैं कि अगले एक-दो दिन में कैबिनेट विभाग की आपत्तियों पर फैसला लेने बैठेगी।

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ऐसी हैं पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वालों की समस्याएं

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : file photo

राजधानी की 45 पुनर्वास कॉलोनियों में 3 लाख से अधिक परिवार रहते हैं। ये अभी तक लीज रेंट या लाइसेंस शुल्क चुकाते हैं। फ्री होल्ड नहीं होने के कारण ये अपना मकान खरीद-बेच नहीं सकते। अगर कहीं बेचते भी हैं तो पक्की रजिस्ट्री नहीं होती, पावर ऑफ अटार्नी करानी होती है जिस पर लोन नहीं मिलता।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने 16 सितंबर, 2015 को मूल आवंटी के लिए 500 रुपये प्रति वर्गमीटर और आवंटी से फ्लैट के खरीदार को 2000 रुपये प्रति वर्गमीटर शुल्क पर मालिकाना हक देने का फैसला किया था।

लेकिन शहरी विकास विभाग ने इसमें सत्यनिकेतन और कालकाजी के आसपास की कुछ कॉलोनियों को इतनी कम कीमत पर मालिकाना हक दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी और अंतिम आदेश या अधिसूचना कैबिनेट फैसले के 17 महीने बाद भी नहीं हो सकी है।

शीला कार्यकाल में सर्किल रेट का 30 फीसदी शुल्क चुकाने का फैसला

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आप मेनिफेस्टो - फोटो : SELF

2007 तक के आवंटी को सर्किल रेट का 30 फीसदी और उसके बाद का मालिकाना हक रखने वालों को सर्किल रेट का 100 फीसदी चुकाकर फ्री होल्ड किए जाने का फैसला शीला दीक्षित सरकार का था।

मालिक की तरह रह रहे पुनर्वास कॉलोनी निवासियों ने इस कीमत को अधिक शुल्क करार देकर बहुत कम लोगों ने फ्री होल्ड कराने की दिलचस्पी दिखाई है।

पहले कांग्रेस और अब आप मानती हैं इन्हें अपना वोट बैंक
इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पुनर्वास कॉलोनियां सबसे अधिक बनाई गई थीं। उसके बाद 1987, 1992 में भी 25-25 गज के मकान दिए गए थे। इन कॉलोनियों में रहने वालों को पहले कांग्रेस और अब आम आदमी पार्टी अपना वोटबैंक मानती हैं। यही वजह है कि सरकार एमसीडी चुनाव से पहले इस योजना को अंतिम रूप देना चाहती है।

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