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आप में घमासान: पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई के पक्ष में नहीं, बागियों के प्रति नरम केजरीवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Aug 2018 11:30 PM IST
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फाइल फोटो
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आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब इकाई में छिड़े घमासान के बीच आप संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विरोधी विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी कोशिश आपसी संवाद से बीच का रास्ता निकालने की है। हालांकि, बगावत पर लोगों में सख्त संदेश देने वाले सुखपाल सिंह खैरा पर गाज गिर सकती है। वहीं, विवाद से आगे बढ़ते हुए पंजाब में पार्टी का मुख्य फोकस संगठन मजबूत करने पर होगा।
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दरअसल, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैरा को हटाने के बाद से आप की प्रदेश इकाई में पिछले कई दिनों से घमासान मचा हुआ है। नए नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा की नियुक्ति के विरोध में बृहस्पतिवार को बठिंडा में कनवेंशन कर चीमा के नेतृत्व को खारिज कर दिया। वहीं, शीर्ष नेतृत्व की भी मुखालफत की। विरोध की अगुवाई सुखपाल सिंह खैरा ही कर रहे हैं। कनवेंशन में सात विधायक शामिल हुए थे।
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उधर, बाकी 11 विधायकों ने देर रात अरविंद केजरीवाल व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया से मुलाकात की। इस दौरान पंजाब के मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने पंजाब में पार्टी के हालात पर चिंता जाहिर की, लेकिन केजरीवाल व सिसोदिया सभी बागी विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के हक में नहीं हैं।
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13 को चंडीगढ़ में बैठक
पार्टी की पंजाब इकाई की 13 अगस्त को चंडीगढ़ में बैठक है। मनीष सिसोदिया के अलावा संभव है कि इसमें अरविंद केजरीवाल भी शिरकत करें। इस दौरान पार्टी के पंजाब अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। फिलहाल सह संयोजक के तौर पर यह जिम्मेदारी डॉ. बलबीर निभा रहे हैं। वहीं, विवादों के बीच जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ रहे संगठन को दोबारा से मजबूती देने की दिशा में पार्टी आगे बढ़ेगी।
चीमा का बचाव करेगी पार्टी
पार्टी नेतृत्व नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा की नियुक्ति का बचाव उनकी दलित पृष्ठभूमि के आधार पर करेगा। बीते दिनों भी केजरीवाल व सिसोदिया ने इसी लाइन पर चीमा का बचाव किया था। पार्टी का मानना है कि इससे पंजाब में पार्टी के जनाधार को मजबूत करने में मदद मिलेगी।