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Delhi: स्कूल फीस बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग, AAP ने कहा- जनता से राय ली जाए

Fri, 08 Aug 2025 08:59 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 08 Aug 2025 08:59 PM IST
सार

आम आदमी पार्टी का स्कूल फीस बिल को लेकर कहना है कि जब तक इस पर जनता की रायशुमारी नहीं ली जाती है, तब तक पिछले साल की फीस को ही माना जाए और उसी के बराबर फीस ली जाए। साथ ही इस साल की बढ़ी फीस को रद्द किया जाए।

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Aam Aadmi Party demanded to send the school fee bill to the select committee
आतिशी - फोटो : x/aap

विस्तार

आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार से एक बार फिर स्कूल फीस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि इस बिल पर अभी तक किसी से कोई रायशुमारी नहीं की गई है। इसलिए इसे सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए। सिलेक्ट कमेटी में ‘‘आप’’ और भाजपा के विधायक होंगें। कमेटी द्वारा बिल पर जनता से राय ली जाए। जब तक जनता की रायशुमारी नहीं ली जाती है, तब तक पिछले साल की फीस को ही माना जाए और उसी के बराबर फीस ली जाए। साथ ही इस साल की बढ़ी फीस को रद्द किया जाए।

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उधर, अनिल झा ने कहा कि शिक्षा पर पूरी सरकार का ध्यान केवल पब्लिक स्कूलों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। यह विधेयक अगस्त में लाया गया है। अगर यह बिल मार्च-अप्रैल में लाया जाता, तो पब्लिक स्कूल फीस नहीं बढ़ाते, जिन्होंने बेतहाशा फीस बढ़ा दी? तब अभिभावक स्कूलों के दरवाजों पर खड़े होकर रोते रहे और सरकार के पास मदद मांगते रहे, लेकिन सरकार ने जानबूझकर इसे तब नहीं लाया। 
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अनिल झा ने कहा कि भाजपा के एक विधायक ने तो कह ही दिया कि यह ऐसा विधेयक है, जो स्कूलों को फीस बढ़ाने का अधिकार देता है। यह मूल रूप से शिक्षा के बाजारीकरण को बढ़ावा दे रहा है, जो पूंजीपतियों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। एक-एक स्कूल के पास 50-50 करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) है। वे इन एफडी के जरिए स्कूल का पूरा खर्च चलाते हैं, फिर भी फीस बढ़ाते हैं। कमाल की बात है कि जूते स्कूल से ही खरीदने पड़ते हैं, यूनिफॉर्म स्कूल से ही खरीदनी पड़ती है, खेल के नाम पर अलग पैसे लिए जाते हैं और विभिन्न आयोजनों के नाम पर भी अलग-अलग पैसे वसूले जाते हैं। इससे मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी जाती है। 
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अनिल झा ने कहा कि जिन स्कूलों को सरकारी जमीन आवंटित की गई है, वे भी अभिभावकों से सारा पैसा वसूल रहे हैं। मुझे लगता है कि यह सब जनता के खिलाफ है। हम इस पर व्यापक चर्चा चाहते हैं, चाहे वह जीएसटी का मामला हो, स्कूलों में फीस वृद्धि का मामला हो या शिक्षा पर लाए गए पारदर्शिता विधेयक का मामला हो। लेकिन सरकार किसी भी मुद्दे पर सुनने को तैयार नहीं है। अब हम सड़क से लेकर सदन तक हम आंदोलन कर सकते हैं। जब हम बात करते हैं, तो में मार्शल आउट कर दिया जाता है।

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