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Delhi NCR News: पहचान नहीं, प्रतिभा की जीत, ट्रांस क्रिकेट में चैंपियन कप्तान बने येलोहिम आद्विक
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फटे जूतों से चैंपियन कप्तान तक: येलोहिम आद्विक ने लैंगिक पहचान के संघर्षों को हराया
काजल कुमारी
नई दिल्ली। येलोहिम आद्विक ने आर्थिक तंगी और लैंगिक पहचान के संघर्षों को पार कर क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है। कभी फटे जूतों में खेलने वाले आद्विक आज ट्रांसजेंडर क्रिकेट में चैंपियन कप्तान हैं। उन्होंने साबित किया कि जुनून और हौसले के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
आद्विक का क्रिकेट से रिश्ता बचपन में ही जुड़ गया था। दसवीं कक्षा में उनका चयन राज्य स्तरीय क्रिकेट कैंप के लिए हुआ। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज, खिलाड़ी और जिला टीम के कप्तान के रूप में पहचान बनाई। आर्थिक तंगी के कारण उनके पास अभ्यास के लिए अच्छे जूते नहीं थे। उनके कोच ने प्रतिभा पहचान कर उन्हें पहला क्रिकेट जूता दिलाया और प्रेरित किया। लैंगिक पहचान से जुड़े विवादों के कारण उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें नौकरी करनी पड़ी, जिससे खेल छूट गया। एक क्रिकेट अकादमी से टीम मैनेजर बनने का अवसर मिला, जिसने उनका जुनून फिर जगाया। उन्होंने कोचिंग और अंपायरिंग की जिम्मेदारियां भी संभालीं।
ट्रांसजेंडर क्रिकेट में ऐतिहासिक जीत
साल 2022 में आद्विक ने ट्रांसमैन के रूप में अपनी पहचान स्वीकार की। इसके बाद उन्हें नौकरी और खेल दोनों में नए संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने पंजाब में आयोजित ट्रांसजेंडर क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों को एकजुट किया। आद्विक खुद कोच बने और तमाम चुनौतियों के बीच टीम को पहली बार चैंपियन बनाया। उन्होंने दूसरी बार मिश्रित ट्रांसजेंडर टीम की कप्तानी करते हुए लगातार दूसरा खिताब जीता।
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बहुमुखी प्रतिभा और भविष्य का सपना
आद्विक क्रिकेट के अलावा मॉडल, नृत्य निर्देशक, नर्तक और सामाजिक प्रभावकार के रूप में भी सक्रिय हैं। उनका कहना है कि खिलाड़ी की पहचान उसकी मेहनत और प्रतिभा से होनी चाहिए, लैंगिक पहचान से नहीं। हालांकि उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला, लेकिन उनकी उपलब्धि ने समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की। अब उनका सपना एक राष्ट्रीय खेल टूर्नामेंट आयोजित करना है। इस टूर्नामेंट में हर संघर्षशील खिलाड़ी बिना भेदभाव अपनी प्रतिभा साबित कर सके।
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काजल कुमारी
नई दिल्ली। येलोहिम आद्विक ने आर्थिक तंगी और लैंगिक पहचान के संघर्षों को पार कर क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है। कभी फटे जूतों में खेलने वाले आद्विक आज ट्रांसजेंडर क्रिकेट में चैंपियन कप्तान हैं। उन्होंने साबित किया कि जुनून और हौसले के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
आद्विक का क्रिकेट से रिश्ता बचपन में ही जुड़ गया था। दसवीं कक्षा में उनका चयन राज्य स्तरीय क्रिकेट कैंप के लिए हुआ। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज, खिलाड़ी और जिला टीम के कप्तान के रूप में पहचान बनाई। आर्थिक तंगी के कारण उनके पास अभ्यास के लिए अच्छे जूते नहीं थे। उनके कोच ने प्रतिभा पहचान कर उन्हें पहला क्रिकेट जूता दिलाया और प्रेरित किया। लैंगिक पहचान से जुड़े विवादों के कारण उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें नौकरी करनी पड़ी, जिससे खेल छूट गया। एक क्रिकेट अकादमी से टीम मैनेजर बनने का अवसर मिला, जिसने उनका जुनून फिर जगाया। उन्होंने कोचिंग और अंपायरिंग की जिम्मेदारियां भी संभालीं।
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ट्रांसजेंडर क्रिकेट में ऐतिहासिक जीत
साल 2022 में आद्विक ने ट्रांसमैन के रूप में अपनी पहचान स्वीकार की। इसके बाद उन्हें नौकरी और खेल दोनों में नए संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने पंजाब में आयोजित ट्रांसजेंडर क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों को एकजुट किया। आद्विक खुद कोच बने और तमाम चुनौतियों के बीच टीम को पहली बार चैंपियन बनाया। उन्होंने दूसरी बार मिश्रित ट्रांसजेंडर टीम की कप्तानी करते हुए लगातार दूसरा खिताब जीता।
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बहुमुखी प्रतिभा और भविष्य का सपना
आद्विक क्रिकेट के अलावा मॉडल, नृत्य निर्देशक, नर्तक और सामाजिक प्रभावकार के रूप में भी सक्रिय हैं। उनका कहना है कि खिलाड़ी की पहचान उसकी मेहनत और प्रतिभा से होनी चाहिए, लैंगिक पहचान से नहीं। हालांकि उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला, लेकिन उनकी उपलब्धि ने समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की। अब उनका सपना एक राष्ट्रीय खेल टूर्नामेंट आयोजित करना है। इस टूर्नामेंट में हर संघर्षशील खिलाड़ी बिना भेदभाव अपनी प्रतिभा साबित कर सके।