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Delhi NCR News: युवती की ओवरी में दुर्लभ गांठ से बढ़ा पुरुष हार्मोन, भारी हुई आवाज और चेहरे पर उगे बाल
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एम्स में जांच के दौरान सामने आई चौंकाने वाली वजह, मासिक धर्म भी हो गया था बंद, सर्जरी से गांठ निकाली तो सामान्य हुआ टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। करीब 20 साल की युवती के शरीर में तेजी से ऐसे बदलाव होने लगे कि डॉक्टर भी हैरान रह गए। मासिक धर्म बंद हो गया, चेहरे पर असामान्य रूप से बाल बढ़ने लगे और आवाज भारी होने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य हार्मोनल गड़बड़ी माना गया, लेकिन जांच में इसकी वजह बायीं ओवरी (अंडाशय) में मौजूद एक दुर्लभ गांठ (लेडिग सेल ट्यूमर) निकली। एम्स, नई दिल्ली के डॉक्टरों ने सर्जरी से इसे निकाला, जिसके बाद युवती के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर सामान्य हो गया।
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केस स्टडी : शुरुआती जांच में नहीं मिली बीमारी की वजह
युवती को पहले मासिक धर्म होता था, लेकिन बाद में बंद हो गया। इसके साथ चेहरे और शरीर पर असामान्य रूप से बाल बढ़ने तथा आवाज भारी होने जैसे लक्षण भी सामने आए। डॉक्टरों ने पहले उन ग्रंथियों की जांच की, जो शरीर में हार्मोन बनाती हैं। जन्म से होने वाली एक ऐसी बीमारी की भी जांच की गई, जिसमें एड्रिनल ग्रंथियों के काम करने में गड़बड़ी होती है। हालांकि, इन जांचों से समस्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई। इसके बाद पेट के निचले हिस्से की एमआरआई और पीईटी स्कैन कराया गया। इन जांचों में युवती की बायीं ओवरी में 3.1 गुणा 4.7 सेंटीमीटर की गांठ दिखाई दी। सर्जरी से इसे निकालने के बाद जांच में पता चला कि यह लेडिग सेल ट्यूमर था।
पुरुष हार्मोन का स्तर पांच गुना से भी ज्यादा मिला
एम्स के मेडिसिन और हार्मोन संबंधी बीमारियों के विभाग की डॉ. मनस्विनी भट्ट के मुताबिक, युवती के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 8.43 नैनोमोल प्रति लीटर था, जबकि सामान्य स्तर 1.5 नैनोमोल प्रति लीटर से कम होना चाहिए। यानी इसकी मात्रा सामान्य से पांच गुना से भी अधिक थी। इसी वजह से उसके शरीर में पुरुषों जैसे लक्षण तेजी से उभर रहे थे।
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सर्जरी से मिली राहत
एम्स के हार्मोन संबंधी बीमारियों के विभाग के डॉ. विवेका पी. ज्योत्सना और डॉ. राजेश खड़गावत के अनुसार, इस मामले में खून की जांच के साथ स्कैन भी अहम साबित हुए। एक जांच में टेस्टोस्टेरोन का स्तर काफी कम दिखाई दिया था, लेकिन आगे की जांच से गांठ का पता लगाने में मदद मिली। सर्जरी के बाद हार्मोन का स्तर सामान्य हो गया।
ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से लें सलाह
एम्स के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. मोहम्मद अली ओसामा और डॉ. संदीप आर. माथुर के मुताबिक, महिलाओं में कम समय के भीतर चेहरे या शरीर पर असामान्य रूप से बाल बढ़ने लगें, आवाज भारी होने लगे या मासिक धर्म बंद हो जाए, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनके पीछे अंडाशय या एड्रिनल ग्रंथियों में गांठ जैसी वजह भी हो सकती है। समय पर जांच से बीमारी का पता लगाने में मदद मिलती है।
जानिए, क्या है लेडिग सेल ट्यूमर
यह एक दुर्लभ गांठ है, जो मुख्य रूप से पुरुषों के अंडकोष में और बहुत कम मामलों में महिलाओं के अंडाशय में बनती है। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर रहित होती है और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलती। हालांकि, करीब 5 से 10 प्रतिशत मामलों में इसके कैंसरयुक्त होने की आशंका रहती है। यह बच्चों और वयस्कों, दोनों में हो सकती है।
देश में पहले भी सामने आए ऐसे मामले
देश में इस दुर्लभ गांठ के मामले पहले भी प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 1992 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज से एक मामला सामने आया था। वर्ष 2009 में दिल्ली में आईसीएमआर और सफदरजंग अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों ने ऐसा मामला पाया था। वर्ष 2010 में कोलकाता में दो मामले सामने आए थे, जिनमें एक गांठ कैंसर रहित और दूसरी कैंसरयुक्त थी। इसी वर्ष चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डॉक्टरों ने एक वयस्क पुरुष में इस ट्यूमर का मामला पाया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। करीब 20 साल की युवती के शरीर में तेजी से ऐसे बदलाव होने लगे कि डॉक्टर भी हैरान रह गए। मासिक धर्म बंद हो गया, चेहरे पर असामान्य रूप से बाल बढ़ने लगे और आवाज भारी होने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य हार्मोनल गड़बड़ी माना गया, लेकिन जांच में इसकी वजह बायीं ओवरी (अंडाशय) में मौजूद एक दुर्लभ गांठ (लेडिग सेल ट्यूमर) निकली। एम्स, नई दिल्ली के डॉक्टरों ने सर्जरी से इसे निकाला, जिसके बाद युवती के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर सामान्य हो गया।
केस स्टडी : शुरुआती जांच में नहीं मिली बीमारी की वजह
युवती को पहले मासिक धर्म होता था, लेकिन बाद में बंद हो गया। इसके साथ चेहरे और शरीर पर असामान्य रूप से बाल बढ़ने तथा आवाज भारी होने जैसे लक्षण भी सामने आए। डॉक्टरों ने पहले उन ग्रंथियों की जांच की, जो शरीर में हार्मोन बनाती हैं। जन्म से होने वाली एक ऐसी बीमारी की भी जांच की गई, जिसमें एड्रिनल ग्रंथियों के काम करने में गड़बड़ी होती है। हालांकि, इन जांचों से समस्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई। इसके बाद पेट के निचले हिस्से की एमआरआई और पीईटी स्कैन कराया गया। इन जांचों में युवती की बायीं ओवरी में 3.1 गुणा 4.7 सेंटीमीटर की गांठ दिखाई दी। सर्जरी से इसे निकालने के बाद जांच में पता चला कि यह लेडिग सेल ट्यूमर था।
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पुरुष हार्मोन का स्तर पांच गुना से भी ज्यादा मिला
एम्स के मेडिसिन और हार्मोन संबंधी बीमारियों के विभाग की डॉ. मनस्विनी भट्ट के मुताबिक, युवती के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 8.43 नैनोमोल प्रति लीटर था, जबकि सामान्य स्तर 1.5 नैनोमोल प्रति लीटर से कम होना चाहिए। यानी इसकी मात्रा सामान्य से पांच गुना से भी अधिक थी। इसी वजह से उसके शरीर में पुरुषों जैसे लक्षण तेजी से उभर रहे थे।
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सर्जरी से मिली राहत
एम्स के हार्मोन संबंधी बीमारियों के विभाग के डॉ. विवेका पी. ज्योत्सना और डॉ. राजेश खड़गावत के अनुसार, इस मामले में खून की जांच के साथ स्कैन भी अहम साबित हुए। एक जांच में टेस्टोस्टेरोन का स्तर काफी कम दिखाई दिया था, लेकिन आगे की जांच से गांठ का पता लगाने में मदद मिली। सर्जरी के बाद हार्मोन का स्तर सामान्य हो गया।
ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से लें सलाह
एम्स के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. मोहम्मद अली ओसामा और डॉ. संदीप आर. माथुर के मुताबिक, महिलाओं में कम समय के भीतर चेहरे या शरीर पर असामान्य रूप से बाल बढ़ने लगें, आवाज भारी होने लगे या मासिक धर्म बंद हो जाए, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनके पीछे अंडाशय या एड्रिनल ग्रंथियों में गांठ जैसी वजह भी हो सकती है। समय पर जांच से बीमारी का पता लगाने में मदद मिलती है।
जानिए, क्या है लेडिग सेल ट्यूमर
यह एक दुर्लभ गांठ है, जो मुख्य रूप से पुरुषों के अंडकोष में और बहुत कम मामलों में महिलाओं के अंडाशय में बनती है। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर रहित होती है और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलती। हालांकि, करीब 5 से 10 प्रतिशत मामलों में इसके कैंसरयुक्त होने की आशंका रहती है। यह बच्चों और वयस्कों, दोनों में हो सकती है।
देश में पहले भी सामने आए ऐसे मामले
देश में इस दुर्लभ गांठ के मामले पहले भी प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 1992 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज से एक मामला सामने आया था। वर्ष 2009 में दिल्ली में आईसीएमआर और सफदरजंग अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों ने ऐसा मामला पाया था। वर्ष 2010 में कोलकाता में दो मामले सामने आए थे, जिनमें एक गांठ कैंसर रहित और दूसरी कैंसरयुक्त थी। इसी वर्ष चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डॉक्टरों ने एक वयस्क पुरुष में इस ट्यूमर का मामला पाया था।