इस फॉर्मूले से दिल्ली में बन सकती है BJP की सरकार
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राजधानी में सरकार बनेगी या दिल्ली इसी तरह चलती रहेगी, इस सवाल का जवाब जानने के लिए सभी राजनीतिक दल इच्छुक हैं। केंद्र सरकार के पाले से राज निवास तक गेंद पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। सरकार बनाने के लिए बुलावा राजनिवास से आना है, इसलिए सोमवार को सबकी नजरें वहीं रहेगी।
तर्क है कि 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ में सरकार को जवाब दाखिल करना है, इसलिए इससे पहले जरूर कुछ होगा। एक बड़ा तबका सारी कवायद सिर्फ कोर्ट में जवाब दाखिल करने या अगली तारीख लेने की प्रक्रिया से भी जोड़कर देख रहा है।
उनका कहना है कि बेशक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय मौका मिलने पर सरकार बनाने की कोशिश की बात कर रहे हैं लेकिन वास्तविक नंबर कोई नहीं बता रहे हैं।
खरीद-फरोख्त से दूर रहने की बात भी कर रहे हैं। फिर सरकार कैसे बनेगी। वहीं दूसरी तरफ यह बात सामने आ रही है कि भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी होने का हवाला देकर सरकार बनाने का न्यौता उपराज्यपाल देंगे।
इस फॉर्मूले में दिख रही है संभावना
विधानसभा में इस समय 67 सदस्य हैं। सरकार बनाने के लिए 34 का मत चाहिए। भाजपा के पास शिरोमणि अकाली दल समेत 29 विधायक हैं। निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन व आप से निकाले गए विनोद कुमार बिन्नी का साथ मिलने पर 31 हो जाएंगे।
ऐसे में पांच विधायकों की अनुपस्थिति का फॉर्मूला काम आ सकता है। इससे अल्पमत की सरकार बन सकती है, जो 6 महीना बिना किसी रुकावट चल सकती है। दूसरे दल के विधायक दिल्ली से बाहर होने, अस्पताल में भर्ती होने या किसी अन्य बड़े कारण का हवाला देकर अनुपस्थित हो सकते हैं।
विश्लेषक भी मानते हैं कि उपराज्यपाल भाजपा के नेता को शपथ दिलवा दें। बहुमत सिद्घ करने में पार्टी व्हीप के बावजूद दूसरे दल के विधायक अनुपस्थित हो जाएं तो दलबदल कानून में सदस्यता बचाई जा सकती है।