{"_id":"6adb642f330274e3b1087b89","slug":"a-double-crisis-for-delhis-air-local-pollution-persists-while-smoke-from-neighbors-pours-in-rapidly-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-160398-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली की सांसों पर दोहरा संकट: अपना प्रदूषण घटा, पड़ोसियों का धुआं तेजी से घुला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली की सांसों पर दोहरा संकट: अपना प्रदूषण घटा, पड़ोसियों का धुआं तेजी से घुला
विज्ञापन
पीएम2.5 में दिल्ली के स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी 23 से 25 अक्तूबर के बीच 35.08 से घटकर 29.44 फीसदी होने का अनुमान, जबकि पड़ोसी जिलों का योगदान 41.96 से बढ़कर 45.58 फीसदी तक पहुंचने की आशंका
कमजोर हवा के चलते 25 और 26 अक्तूबर को प्रदूषण और घना होने का भी अंदेशा
संतोष कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली की हवा पर दोहरा दबाव है। एक ओर स्थानीय स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी घटने का अनुमान है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी जिलों से आने वाला धुआं हवा में तेजी से घुल रहा है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के मुताबिक, 23 अक्तूबर को दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी 35.085 फीसदी थी, जो 25 अक्तूबर तक घटकर 29.447 फीसदी रह सकती है। इसके उलट पड़ोसी जिलों की हिस्सेदारी 41.965 से बढ़कर 45.580 फीसदी होने का अनुमान है।
शुक्रवार के आकलन में दिल्ली के स्थानीय स्रोतों का योगदान करीब 36 फीसदी और आसपास के 19 जिलों का हिस्सा लगभग 41 फीसदी रहा। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और बुलंदशहर से प्रदूषण का योगदान तेजी से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता सिर्फ स्थानीय उत्सर्जन से तय नहीं होती। हवा की दिशा, रफ्तार और मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को प्रभावित करती हैं। इसलिए दिल्ली में पाबंदियां लगाने के साथ पड़ोसी जिलों में भी उत्सर्जन घटाना जरूरी है।
विज्ञापन
तीन जिलों की हिस्सेदारी में तेज उछाल
आईआईटीएम के डीएसएस के अनुसार, 22 अक्तूबर को दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में गौतमबुद्ध नगर की हिस्सेदारी करीब 5.5 फीसदी थी, जो 25 अक्तूबर तक बढ़कर 12 फीसदी हो सकती है। इसी अवधि में गाजियाबाद का योगदान 4.5 से बढ़कर 8.9 फीसदी और बुलंदशहर का हिस्सा लगभग 1.4 से बढ़कर 8.1 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।
हरियाणा में एक जैसा नहीं प्रदूषण का रुझान
हरियाणा के जिलों में प्रदूषण के योगदान का रुझान अलग रहने की संभावना है। गुरुग्राम की हिस्सेदारी 23 अक्तूबर को करीब 7.5 फीसदी तक पहुंचने के बाद 25 अक्तूबर को घटकर 2.3 फीसदी हो सकती है। झज्जर, सोनीपत और पानीपत के योगदान में भी कमी के संकेत हैं, जबकि फरीदाबाद की हिस्सेदारी चार फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है।
पिछले साल भी एक-तिहाई से ज्यादा था बाहरी प्रदूषण
आईआईटीएम के मुताबिक, 5 से 19 अक्तूबर 2025 के दौरान एनसीआर के 19 जिलों की दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में औसत हिस्सेदारी 34.52 फीसदी रही थी। इसमें हरियाणा के 11 जिलों का औसत योगदान 24.7 फीसदी और उत्तर प्रदेश के छह जिलों का 8.4 फीसदी था। हरियाणा में सोनीपत और झज्जर, जबकि उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद प्रमुख योगदान देने वाले जिले रहे।
दिल्ली की सीमा पर अटकती है प्रदूषण से लड़ाई
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) में स्वच्छ वायु एवं सतत गतिशीलता कार्यक्रम की कार्यक्रम प्रबंधक शांभवी शुक्ला के मुताबिक, प्रदूषित हवा प्रशासनिक सीमाएं नहीं देखती। उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आने वाला प्रदूषण दिल्ली को प्रभावित करता है, जबकि दिल्ली की हवा भी पड़ोसी क्षेत्रों पर असर डालती है। इसलिए पूरे एनसीआर को एक इकाई मानकर रणनीति बनानी होगी। वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के साथ सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क मजबूत करना भी जरूरी है।
हवाओं के रुख और रफ्तार बदलने से बढ़ेगा यूपी का हिस्सा
शुक्रवार दोपहर तक उत्तर-पश्चिम दिशा से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं शाम को उत्तर-पूर्व दिशा से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने लगीं। आईआईटीएम के अनुसार, शनिवार सुबह हवा पूर्व दिशा से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। दोपहर में इसकी दिशा उत्तर-पूर्व और गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। रविवार को भी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। सोमवार शाम हवा फिर उत्तर-पश्चिम दिशा से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।
डीएसएस के दायरे में 19 जिले: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत और गौतमबुद्ध नगर; हरियाणा के फरीदाबाद, रोहतक, रेवाड़ी, भरतपुर, सोनीपत, भिवानी, अलवर, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़, करनाल, झज्जर और गुरुग्राम।
--
कमजोर हवाओं से प्रदूषकों का फैलाव होगा मुश्किल
आईआईटीएम के अनुसार, मिक्सिंग डेप्थ शुक्रवार को 2,750 मीटर, शनिवार को 3,000 मीटर, रविवार को 1,800 मीटर और सोमवार को घटकर 700 मीटर रह सकती है। मिक्सिंग डेप्थ कम होने से प्रदूषकों के फैलाव के लिए उपलब्ध वायुमंडलीय परत सीमित हो जाती है।
-वेंटिलेशन इंडेक्स भी शुक्रवार के 20,000 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से घटकर सोमवार को 1,500 तक पहुंच सकता है। 6,000 या इससे अधिक का स्तर प्रदूषकों के फैलाव के लिए बेहतर माना जाता है। इन परिस्थितियों के चलते 25 और 26 अक्तूबर को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की आशंका है।
नोट: सभी आंकड़े आईआईटीएम के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) पर आधारित हैं।
विज्ञापन
कमजोर हवा के चलते 25 और 26 अक्तूबर को प्रदूषण और घना होने का भी अंदेशा
संतोष कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली की हवा पर दोहरा दबाव है। एक ओर स्थानीय स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी घटने का अनुमान है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी जिलों से आने वाला धुआं हवा में तेजी से घुल रहा है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के मुताबिक, 23 अक्तूबर को दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी 35.085 फीसदी थी, जो 25 अक्तूबर तक घटकर 29.447 फीसदी रह सकती है। इसके उलट पड़ोसी जिलों की हिस्सेदारी 41.965 से बढ़कर 45.580 फीसदी होने का अनुमान है।
विज्ञापन
शुक्रवार के आकलन में दिल्ली के स्थानीय स्रोतों का योगदान करीब 36 फीसदी और आसपास के 19 जिलों का हिस्सा लगभग 41 फीसदी रहा। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और बुलंदशहर से प्रदूषण का योगदान तेजी से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता सिर्फ स्थानीय उत्सर्जन से तय नहीं होती। हवा की दिशा, रफ्तार और मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को प्रभावित करती हैं। इसलिए दिल्ली में पाबंदियां लगाने के साथ पड़ोसी जिलों में भी उत्सर्जन घटाना जरूरी है।
विज्ञापन
तीन जिलों की हिस्सेदारी में तेज उछाल
आईआईटीएम के डीएसएस के अनुसार, 22 अक्तूबर को दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में गौतमबुद्ध नगर की हिस्सेदारी करीब 5.5 फीसदी थी, जो 25 अक्तूबर तक बढ़कर 12 फीसदी हो सकती है। इसी अवधि में गाजियाबाद का योगदान 4.5 से बढ़कर 8.9 फीसदी और बुलंदशहर का हिस्सा लगभग 1.4 से बढ़कर 8.1 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।
हरियाणा में एक जैसा नहीं प्रदूषण का रुझान
हरियाणा के जिलों में प्रदूषण के योगदान का रुझान अलग रहने की संभावना है। गुरुग्राम की हिस्सेदारी 23 अक्तूबर को करीब 7.5 फीसदी तक पहुंचने के बाद 25 अक्तूबर को घटकर 2.3 फीसदी हो सकती है। झज्जर, सोनीपत और पानीपत के योगदान में भी कमी के संकेत हैं, जबकि फरीदाबाद की हिस्सेदारी चार फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है।
पिछले साल भी एक-तिहाई से ज्यादा था बाहरी प्रदूषण
आईआईटीएम के मुताबिक, 5 से 19 अक्तूबर 2025 के दौरान एनसीआर के 19 जिलों की दिल्ली के पीएम2.5 प्रदूषण में औसत हिस्सेदारी 34.52 फीसदी रही थी। इसमें हरियाणा के 11 जिलों का औसत योगदान 24.7 फीसदी और उत्तर प्रदेश के छह जिलों का 8.4 फीसदी था। हरियाणा में सोनीपत और झज्जर, जबकि उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद प्रमुख योगदान देने वाले जिले रहे।
दिल्ली की सीमा पर अटकती है प्रदूषण से लड़ाई
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) में स्वच्छ वायु एवं सतत गतिशीलता कार्यक्रम की कार्यक्रम प्रबंधक शांभवी शुक्ला के मुताबिक, प्रदूषित हवा प्रशासनिक सीमाएं नहीं देखती। उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आने वाला प्रदूषण दिल्ली को प्रभावित करता है, जबकि दिल्ली की हवा भी पड़ोसी क्षेत्रों पर असर डालती है। इसलिए पूरे एनसीआर को एक इकाई मानकर रणनीति बनानी होगी। वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के साथ सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क मजबूत करना भी जरूरी है।
हवाओं के रुख और रफ्तार बदलने से बढ़ेगा यूपी का हिस्सा
शुक्रवार दोपहर तक उत्तर-पश्चिम दिशा से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं शाम को उत्तर-पूर्व दिशा से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने लगीं। आईआईटीएम के अनुसार, शनिवार सुबह हवा पूर्व दिशा से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। दोपहर में इसकी दिशा उत्तर-पूर्व और गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। रविवार को भी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। सोमवार शाम हवा फिर उत्तर-पश्चिम दिशा से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।
डीएसएस के दायरे में 19 जिले: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत और गौतमबुद्ध नगर
कमजोर हवाओं से प्रदूषकों का फैलाव होगा मुश्किल
आईआईटीएम के अनुसार, मिक्सिंग डेप्थ शुक्रवार को 2,750 मीटर, शनिवार को 3,000 मीटर, रविवार को 1,800 मीटर और सोमवार को घटकर 700 मीटर रह सकती है। मिक्सिंग डेप्थ कम होने से प्रदूषकों के फैलाव के लिए उपलब्ध वायुमंडलीय परत सीमित हो जाती है।
-वेंटिलेशन इंडेक्स भी शुक्रवार के 20,000 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से घटकर सोमवार को 1,500 तक पहुंच सकता है। 6,000 या इससे अधिक का स्तर प्रदूषकों के फैलाव के लिए बेहतर माना जाता है। इन परिस्थितियों के चलते 25 और 26 अक्तूबर को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की आशंका है।
नोट: सभी आंकड़े आईआईटीएम के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) पर आधारित हैं।