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Delhi NCR News: अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में भाग लेने मॉरीशस से प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे 31 अक्तूबर को उद्घाटन, 35 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं और आर्य समाज के आदर्शों को समर्पित अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 का शुभारंभ 30 अक्तूबर से होगा। इसमें भाग लेने के लिए मॉरीशस से एक प्रतिष्ठित और बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है। यह वैश्विक सम्मेलन दो नवंबर तक रोहिणी में आयोजित किया जाएगा। महासम्मेलन में दुनिया भर से दो लाख से अधिक आर्य समाज के अनुयायी और विद्वान हिस्सा लेंगे। महासम्मेलन का उद्घाटन 31 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
पीएम के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस खास पल में शामिल होंगे। सम्मेलन में मॉरीशस, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और सूरीनाम सहित 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। महासम्मेलन के दौरान वैदिक दर्शन, शिक्षा, सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक विविधता और विश्व बंधुत्व पर केंद्रित कई सत्र आयोजित होंगे।
प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आर्य समाज के योगदान और महर्षि दयानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन न केवल आर्य समाज के 150 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा का उत्सव है, बल्कि आधुनिक समाज में वैदिक सिद्धांतों की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करेगा। सम्मेलन का उद्देश्य विश्वभर में एकता, सद्भाव और मानवता के आदर्शों को सशक्त करना है। आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने 1875 में की थी। उन्होंने सत्य, समानता और धर्म के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण का आह्वान किया था। आर्य समाज ने भारतीय समाज में नारी सशक्तिकरण, सबके लिए शिक्षा, जातिगत भेदभाव और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के उन्मूलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, संगठन ने पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं और आर्य समाज के आदर्शों को समर्पित अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 का शुभारंभ 30 अक्तूबर से होगा। इसमें भाग लेने के लिए मॉरीशस से एक प्रतिष्ठित और बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है। यह वैश्विक सम्मेलन दो नवंबर तक रोहिणी में आयोजित किया जाएगा। महासम्मेलन में दुनिया भर से दो लाख से अधिक आर्य समाज के अनुयायी और विद्वान हिस्सा लेंगे। महासम्मेलन का उद्घाटन 31 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
पीएम के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस खास पल में शामिल होंगे। सम्मेलन में मॉरीशस, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और सूरीनाम सहित 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। महासम्मेलन के दौरान वैदिक दर्शन, शिक्षा, सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक विविधता और विश्व बंधुत्व पर केंद्रित कई सत्र आयोजित होंगे।
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प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आर्य समाज के योगदान और महर्षि दयानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन न केवल आर्य समाज के 150 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा का उत्सव है, बल्कि आधुनिक समाज में वैदिक सिद्धांतों की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करेगा। सम्मेलन का उद्देश्य विश्वभर में एकता, सद्भाव और मानवता के आदर्शों को सशक्त करना है। आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने 1875 में की थी। उन्होंने सत्य, समानता और धर्म के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण का आह्वान किया था। आर्य समाज ने भारतीय समाज में नारी सशक्तिकरण, सबके लिए शिक्षा, जातिगत भेदभाव और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के उन्मूलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, संगठन ने पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
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