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Delhi NCR News: सीबीआई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त सरकारी अधिकारी को चार साल की सजा सुनाई
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विशेष सीबीआई अदालत ने एक भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त सरकारी अधिकारी नीरज खत्री को चार साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि संदेश जाए। विशेष न्यायाधीश छवि कपूर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक दुराचार के मामले में पहले दोषी ठहराए गए नीरज खत्री के खिलाफ सजा पर दलीलें सुन रही थीं। सीबीआई ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार समाज की प्रगति की इच्छा को नष्ट कर देता है और दोषी को कोई नरमी नहीं दी जानी चाहिए।
खत्री के वकील ने नरमी की मांग करते हुए कहा कि वह क्रोनिक स्पाइनल डिसऑर्डर से पीड़ित हैं, लगातार पीठ दर्द और निचले अंगों में सुन्नता की समस्या है। यह भी कहा गया कि उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और परिवार का भरण-पोषण करने का कोई वास्तविक साधन नहीं है। 6 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने कहा, भ्रष्टाचार के मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि निरोधक संदेश जाए। उचित सजा लगाना ही वह तरीका है जिससे अदालतें अपराधियों के खिलाफ समाज की न्याय की पुकार का जवाब देती हैं।” अदालत ने कहा कि अनावश्यक सहानुभूति और अपर्याप्त सजा न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन अनुपातहीन रूप से कठोर सजा से भी बचना चाहिए।
अदालत ने नोट किया कि खत्री को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीबीआई के दो अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है और उन मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित कर रखा है, जहां उनकी अपीलें लंबित हैं। अदालत ने कहा, “इस प्रकार, उनके आपराधिक इतिहास को साफ नहीं कहा जा सकता। इसलिए उन्हें नरमी देने और न्यूनतम सजा देने का कोई आधार नहीं है।” हालांकि अदालत ने खत्री की उम्र और सरकारी सेवा से पहले ही बर्खास्त किए जाने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सात साल की सजा नहीं दी।
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नई दिल्ली।
विशेष सीबीआई अदालत ने एक भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त सरकारी अधिकारी नीरज खत्री को चार साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि संदेश जाए। विशेष न्यायाधीश छवि कपूर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक दुराचार के मामले में पहले दोषी ठहराए गए नीरज खत्री के खिलाफ सजा पर दलीलें सुन रही थीं। सीबीआई ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार समाज की प्रगति की इच्छा को नष्ट कर देता है और दोषी को कोई नरमी नहीं दी जानी चाहिए।
खत्री के वकील ने नरमी की मांग करते हुए कहा कि वह क्रोनिक स्पाइनल डिसऑर्डर से पीड़ित हैं, लगातार पीठ दर्द और निचले अंगों में सुन्नता की समस्या है। यह भी कहा गया कि उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और परिवार का भरण-पोषण करने का कोई वास्तविक साधन नहीं है। 6 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने कहा, भ्रष्टाचार के मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि निरोधक संदेश जाए। उचित सजा लगाना ही वह तरीका है जिससे अदालतें अपराधियों के खिलाफ समाज की न्याय की पुकार का जवाब देती हैं।” अदालत ने कहा कि अनावश्यक सहानुभूति और अपर्याप्त सजा न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन अनुपातहीन रूप से कठोर सजा से भी बचना चाहिए।
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अदालत ने नोट किया कि खत्री को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीबीआई के दो अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है और उन मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित कर रखा है, जहां उनकी अपीलें लंबित हैं। अदालत ने कहा, “इस प्रकार, उनके आपराधिक इतिहास को साफ नहीं कहा जा सकता। इसलिए उन्हें नरमी देने और न्यूनतम सजा देने का कोई आधार नहीं है।” हालांकि अदालत ने खत्री की उम्र और सरकारी सेवा से पहले ही बर्खास्त किए जाने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सात साल की सजा नहीं दी।
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