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956 इंडस्ट्री की रिपोर्ट एनजीटी ने मांगी
अमर उजाला, साहिबाबाद
Updated Thu, 08 May 2014 02:00 PM IST
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गंगा को प्रदूषित कर रही उप्र की 956 इंडस्ट्रीज पर ताला लग सकता है। सिंभावली के शुगर मिल व डेयरी केस की सुनवाई के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश की साढ़े नौ सौ इंडस्ट्रीज की रिपोर्ट भी तलब की है।
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जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से गंगा प्रदूषण का कारण बनी हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गंगा बेसिन प्राधिकरण के अफसरों को सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश हैं।
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सिंभावली की फैक्ट्रियों और डेयरी के खिलाफ गंगा प्रदूषण का आरोप लगाते हुए कृष्णकांत ने कुछ महीने पहले एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। एनजीटी की ओर से मामले को प्राथमिकता पर लिया गया।
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एनजीटी ने सीपीसीबी, पीसीबी के प्रतिनिधिमंडल से फैक्ट्रियों की सर्वे कर रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने रिपोर्ट देखने के बाद सीपीसीबी और पीसीबी से फिर प्रदेश की सभी ऐसी फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रीज की सूची मांगी, जो गंगा प्रदूषण का कारण बन रही हैं।
सीपीसीबी ने एनजीटी में ऐसी 956 इंडस्ट्रीज की सूची सौंपी। जिन्हें नोटिस भेजा जा चुका है। छह मई को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इन फैक्ट्रियों का सर्वे करके रिपोर्ट बनाने के लिए निर्देश दिया गया।
एनजीटी ने सर्वे के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गंगा बेसिन प्राधिकरण से एक-एक अधिकारियों का चयन करने के साथ ही रिपोर्ट चार जुलाई को सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है। सर्वे का काम अधिकारियों के चयन के बाद शुरू किया जाएगा।
प्रदूषण बढ़ाने में नोएडा की 16 कंपनियां भी शामिल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के जस्टिस स्वतंत्र कुमार के आदेश के बाद गंगा को प्रदूषण करने वाली नोएडा की 16 कंपनियों को 4 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। एनजीटी के आदेश के बाद केंद्र व यूपी के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ऐसी कंपनियों को नोटिस जारी किया था। जन सशक्तिकरण संस्था के कृष्णकांत सिंह हूण ने एनजीटी में याचिका दायर की थी।