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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   90 years of Lodhi Gardens: A unique journey from village to heritage

90 साल का लोधी गार्डन: गांव से विरासत तक का अनोखा सफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:08 PM IST
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- औपनिवेशिक दौर में उजड़ा बस्ती का जीवन, आज बना दिल्ली का ग्रीन लंग्स और सांस्कृतिक धरोहर
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ज्योति सिंह
नई दिल्ली। राजधानी के प्रतिष्ठित हरित स्थलों में शामिल लोधी गार्डन ने 90 वर्षों का सफर पूरा कर लिया है। आज यह जगह सुबह की सैर, योग और सुकून के लिए जानी जाती है, लेकिन कभी यहां एक जीवंत गांव बसा करता था। खेत, बस्तियां और उनके बीच खड़े ऐतिहासिक मकबरे, यही इसकी असली पहचान थी। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि इतिहास, विस्थापन और पुनर्निर्माण की कहानी है।
मकबरों के बीच बसता था जीवन-
15वीं-16वीं शताब्दी में सैय्यद वंश और लोदी वंश के दौरान यहां कई ऐतिहासिक संरचनाएं बनीं। मुहम्मद शाह का मकबरा और सिकंदर लोदी का मकबरा इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धुरी रहे। समय के साथ इनके आसपास बस्तियां बस गईं और यह इलाका एक जीवंत गांव बन गया, जहां इतिहास और आम जीवन साथ-साथ चलते थे।
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1936: जब गांव से बना पार्क -
ब्रिटिश शासनकाल में 1936 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड विलिंगडन की पत्नी लेडी विलिंगडन के प्रयासों से यहां बसे गांवों को हटाकर इसे एक व्यवस्थित उद्यान में बदल दिया गया। उस समय इसका नाम ‘लेडी विलिंगडन पार्क’ रखा गया। यह बदलाव औपनिवेशिक शहरी योजना का हिस्सा था, जिसमें ऐतिहासिक स्थलों को सार्वजनिक स्थानों के रूप में विकसित किया गया।
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आजादी के बाद नई पहचान -
स्वतंत्रता के बाद इस उद्यान का नाम बदलकर लोधी गार्डन कर दिया गया। वर्ष 1968 में अमेरिकी वास्तुकार जोसेफ स्टीन ने इसका पुनर्विकास किया, जिसमें प्राकृतिक विस्तार, खुले लॉन और ग्लास हाउस जैसी संरचनाएं जोड़ी गईं। इससे यह आधुनिक दिल्ली के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो गया। इस उद्यान के भीतर मौजूद संरचनाएं इसे एक जीवित संग्रहालय बनाती हैं।

इतिहास को संजोए जीवित संग्रहालय -
लोधी गार्डन में मौजूद बड़ा गुम्बद, शीश गुम्बद और अठपुला जैसी संरचनाएं इंडो-इस्लामिक वास्तुकला की झलक प्रस्तुत करती हैं। करीब 90 एकड़ में फैले इस उद्यान में 100 से अधिक प्रजातियों के पेड़-पौधे हैं। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा लगाए गए क्यूआर कोड और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की हेरिटेज वॉक इसे और खास बनाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लोधी गार्डन सिर्फ हरियाली का केंद्र नहीं, बल्कि शहरी विकास का ऐसा मॉडल है, जहां विरासत संरक्षण और आधुनिक जरूरतों के बीच संतुलन देखने को मिलता है।
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