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बालकनी में सिमटता 'बचपन': एम्स में आ रहे 60% बच्चे छज्जे से गिरकर घायल, फ्लैट सिस्टम से घरों में कैद मासूम

Thu, 18 May 2023 07:55 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 18 May 2023 07:55 AM IST
सार

डॉक्टरों का कहना है कि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने को हैं। ऐसे में बच्चे अधिकतर समय घरों पर रहेंगे। छोटे बच्चे ज्यादा नटखट होते हैं और उनका स्वभाव बालकनी, सीढ़ी व ऊंची जगहों पर खेलने का होता है। वह बार-बार उसकी तरफ जाते हैं।

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60 Percent of children coming to AIIMS trauma center injured by falling from balcony
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

बालकनी, सीढ़ी व ऊंचाई पर खेल रहे नन्हें बच्चों को लेकर की जा रही लापरवाही जिंदगी तक छीन रही हैं। एम्स में ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए आ रहे ऊंचाई से गिरकर चोटिल हुए बच्चों में 60 फीसदी बालकनी से गिरकर घायल होते हैं। इनमें से अधिकतर बच्चों के सिर में गंभीर चोट होती है। जबकि काफी बच्चे अत्यधिक गंभीर अवस्था में आते हैं। इन गंभीर बच्चों में से काफी बच्चे उपचार के दौरान दम तोड़ देते हैं, जबकि थोड़ी सी सतर्कता से इन बच्चों को बचाया जा सकता है। ऐसे में एम्स ने सुरक्षित बालकनी अभियान को तेज बच्चों को चोटिल होने से बचाने का निर्णय लिया है। 

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डॉक्टरों का कहना है कि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने को हैं। ऐसे में बच्चे अधिकतर समय घरों पर रहेंगे। छोटे बच्चे ज्यादा नटखट होते हैं और उनका स्वभाव बालकनी, सीढ़ी व ऊंची जगहों पर खेलने का होता है। वह बार-बार उसकी तरफ जाते हैं, ऐसे समय में अभिभावकों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। यदि अभिभावक इन्हें ऊंचाई की तरफ जाने से रोक लेते हैं तो दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकता है। एम्स के न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता का कहना है कि पिछले पांच माह में एम्स के ट्रामा सेंटर में 50 बच्चे भर्ती हुए। 

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औसतन 10 बच्चे हर माह सिर में लगी गंभीर व मध्यम चोट के कारण अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। इनमें से 20 फीसदी मरीज उपचार के दौरान दम तोड़ देते हैं। उनका कहना है कि देखा गया कि यहां आने वाले ज्यादातर बच्चे 10 फीट से कम की ऊंचाई से गिरे हैं। ऊंचाई से गिरकर चोटिल होने वाले इन मामलों को रोका जा सकता है। अभिभावकों को इसका विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। 

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अधिकतर घरों की बालकनी के सहारे बच्चे
दिल्ली में बढ़ती भीड़ में फ्लैट सिस्टम तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों के पास खेलने के लिए बालकनी ही उपलब्ध रहती है। दिल्ली में लाखों की संख्या में फ्लैट हैं और बच्चे अक्सर इनकी बालकनी में ही दिखते हैं।

छोटे बच्चे होते हैं ज्यादा नटखट 
18 माह से सात साल के बच्चे ज्यादा नटखट होते हैं। एम्स में ट्रामा सेंटर में आए बच्चों के आंकड़े बताते हैं कि इस उम्र के बच्चे बालकनी की तरफ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। पिछले साल 18 माह की महिरा और सात साल की मानसी की मौत बालकनी से गिरकर हुई। दोनों बच्चों ने अंगदान किए थे। डॉक्टरों का कहना देखा गया है कि लड़कियों के मुकाबले लड़के ज्यादा नटखट होते हैं। एम्स के ट्रामा सेंटर में रोजाना औसतन तीन बच्चे भर्ती रहते हैं।

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