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फरीदाबाद के डॉक्टरों ने बच्ची की ऐसे जटिल कैंसर से बचाई जान जिसके दुनिया में हैं केवल 9 मरीज

Thu, 26 Oct 2017 12:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 Oct 2017 12:03 PM IST
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6 year old girl suffering from larva gland cancer, faridabad doctors saved her in critical operation
लार्वा ग्रंथ‌ि में कैंसर से पीड़‌ित थी ये बच्ची - फोटो : अमर उजाला

फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने बिहार निवासी छह वर्षीय बच्ची स्वीटी को नया जीवन दिया है। बच्ची को चार वर्ष की आयु में ही लार ग्रंथि में कैंसर हो गया था।

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अस्पताल का दावा है कि ऐसे बहुत ही कम केस पूरी दुनिया में देखने को मिलते हैं। अभी इस बच्ची को मिलाकर करीब 9 ही मामले सामने आए हैं, जिनमें लार ग्रंथि में कैंसर होने के बाद इतनी कम उम्र के मरीज का जीवन बचाया गया हो।
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अस्पताल के कैंसर केयर डिपार्टमेंट के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुमंत गुप्ता ने दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि यह सर्जरी जटिल जरूर थी, लेकिन वह मरीज की जान बचा पाए। डॉ. सुमंत कहते हैं कि जो माता-पिता यह सोचते हैं कि कैंसर लाइलाज है तो यह सर्जरी उन लोगों के लिए सीख है।
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कम उम्र में कैंसर लाइलाज नहीं होता है। वहीं, डॉ. शिवम वत्सल ने बताया कि ऐसे जटिल मामलों में चेहरे की नसों को नुकसान होने की आशंका ज्यादा थी, लेकिन इस केस में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

चार साल की उम्र में हुई बीमारी

6 year old girl suffering from larva gland cancer, faridabad doctors saved her in critical operation
डेमो इमेज
स्वीटी के परिजनों ने बताया कि वे बिहार के मूल निवासी हैं। फरीदाबाद में पिता नौकरी करते हैं। करीब दो वर्ष पहले स्वीटी जब चार वर्ष की थी, तो उसके गाल पर सूजन और फोड़े जैसा दिखाई देने लगा।

काफी समय तक परिजन मालिश व इलाज करवाते रहे, लेकिन जब फायदा नहीं पहुंचा, तो फरीदाबाद के ही ईएसआई अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने सर्जरी की। इसके बाद भी जब स्वीटी का स्वास्थ्य ठीक नहीं हुआ, तो वे सर्वोदय अस्पताल पहुंचे, जहां तमाम मेडिकल टेस्ट के बाद 13 अक्तूबर को ऑपरेशन किया गया।

दो बार जांच के बाद कैंसर की पुष्टि
डॉक्टरों ने बताया कि जब स्वीटी की बायोप्सी की गई, तो दो बार जांच के बाद कैंसर की पुष्टि हुई। करीब छह महीने बाद वह वापस अस्पताल आई, तो उसकी स्थिति और भी गंभीर बनी हुई थी। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को ट्यूमर कर्णमूलीय की गहरी पाली में मिला। काफी चुनौतियों के साथ इस ऑपरेशन को सफलता तक पहुंचाया गया।
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