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पांचवें वित्त आयोग की 50 फीसदी सिफारिशें मंजूर, सरकार ने विधानसभा के पटल पर रखी रिपोर्ट

Fri, 04 Jan 2019 04:51 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 04 Jan 2019 04:51 AM IST
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50 percent recommendations of Fifth Finance Commission approved
मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली सरकार ने पांचवें दिल्ली वित्त आयोग की करीब 50 फीसदी सिफारिशें मंजूर कर ली है। जबकि 29 सिफारिशों को मानने से इंकार कर दिया है। दिल्ली सरकार ने विधानसभा के पटल पर बृहस्पतिवार को वित्त आयोग की रिपोर्ट रखी। आयोग की सिफारिशों को एक अप्रैल 2016 से लागू किया गया है। इस दौरान सरकार ने चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों पर की गई, कार्यवाही की रिपोर्ट भी सदन में पेश की। सरकार ने चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों को मानने से इंकार कर दिया है।

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दरअसल, दिल्ली सरकार अभी तीसरे वित्त आयोग की सिफारिशों के हिसाब से निगमों का हिस्सा देती है। दिल्ली सरकार के कुल टैक्स संग्रहण का 10.5 फीसदी निगम के खाते में जाता है। पांचवें वित्त आयोग की सिफारिशों में इसे दो फीसदी बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 तक यह हिस्सा सरकार से निगम को मिलता रहेगा। इस बीच अगला वित्त आयोग  सिफारिशें देगा, जिसके अनुसार 2021-22 से करों को बंटवारा होगा।
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दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक, पांचवें वित्त आयोग ने कुल 171 सिफारिशें दी थीं। इसमें से 88 को ज्यों का त्यों मान लिया गया है। जबकि कर बंटवारे से जुड़ी 21 सिफारिशों को कुछ संशोधनों के साथ स्वीकार किया गया है। 17 सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर इन पर सरकार काम करेगी। 13 सिफारिशें को लागू करने का जिम्मा निगमों पर छोड़ दिया गया है। सरकार इसे निगम की राय के हिसाब से लागू करेगी। जबकि 29 को दिल्ली सरकार ने मानने से इंकार कर दिया है। 
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सतेंद्र जैन ने बताया कि सरकार पांचवें वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक तीनों निगमों को कुल कर संग्रहण का 12.5 फीसदी हिस्सा देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि सरकार अभी तक तीसरे वित्त आयोग की सिफारिशों से ज्यादा रकम निगमों को दी है। कई बार यह हिस्सा 16-18 फीसदी तक चला गया है। लेकिन दिल्ली सरकार इस रकम की रिकवरी नहीं करेगी। निगमों को राहत देते हुये सरकार ने फैसला लिया है कि पहले किए गए भुगतान को वापस नहीं लिया जाएगा।


चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों को मानने से सरकार ने किया इंकार
सत्येंद्र जैन के मुताबिक, केंद्र सरकार की बेरुखी के रवैए से दिल्ली सरकार चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों को  लागू नहीं कर सकी है। चौथे वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि डीडीए व नगर निगम पर दिल्ली सरकार का पूरा अधिकार होगा। वहीं, आयोग ने कहा था कि केंद्र सरकार दूसरे राज्यों की तरह ही दिल्ली सरकार को भी केंद्रीय करों में हिस्सेदारी देगी। इस बारे में दिल्ली सरकार ने केंद्र्र सरकार को पत्र भी लिखा था। लेकिन केंद्र सरकार वित्त आयोग की सिफारिशों से राजी नहीं हुयी। लिहाजा दिल्ली सरकार भी चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं कर सकी है। 

पांचवें वित्त आयोग के हिसाब से निगमों को कितना मिलेगा पैसा
वित्तीय वर्ष     टैक्स कलेक्शन  निगमों का हिस्सा
2016-17      31140        3892.5
2017-18      38700        4837.5
2018-19      43276        5409.5
2019-20      48763        6095.37            
2020-21      54984        6873
नोट: सभी राशि करोड़ में है।

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