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Delhi NCR News: भलस्वा में 43 एकड़ जमीन हुई खाली, दिसंबर तक खत्म हो जाएगी डंपसाइट
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शहरी विकास मंत्री ने साइट का दौरा कर की कामकाज की समीक्षा
रोज 15 हजार टन कचरे की हो रही बायो-माइनिंग, खाली जमीन पर बनेंगी नई सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
भलस्वा लैंडफिल साइट में 43 एकड़ जमीन खाली हो गई है जो दोबारा इस्तेमाल के लायक है। दिल्ली सरकार का दावा है कि कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का काम अब तेज हो गया है। दिसंबर तक पूरी डंपसाइट खत्म हो जाएगी। शुक्रवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने साइट का दौरा कर कामकाज की समीक्षा की। मंत्री ने बायो-माइनिंग और कचरा निस्तारण की प्रगति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून से पहले ज्यादा से ज्यादा काम पूरा किया जाए।
मंत्री ने कहा कि भलस्वा साइट पर करीब 96 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायो-माइनिंग के जरिए निस्तारण किया जा चुका है। फिलहाल यहां करीब 21 लाख मीट्रिक टन कचरा बाकी है। लगातार बढ़ रही प्रोसेसिंग क्षमता से दिल्ली को जल्द कूड़े के पहाड़ों से राहत मिलेगी। भलस्वा साइट पर पहले जहां रोज करीब 8 हजार टन कचरे का निस्तारण होता था, अब यह क्षमता बढ़कर 15 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके लिए मशीनों और संसाधनों की संख्या भी बढ़ाई गई है। भलस्वा, ओखला और गाजीपुर की तीनों लैंडफिल साइटों पर अब तक 255 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पुराने कचरे का निस्तारण किया जा चुका है। इससे करीब 75 एकड़ जमीन दोबारा उपयोग के लायक बनी है। अकेले भलस्वा साइट पर 43 एकड़ जमीन खाली कराई गई है। यहां पांच एकड़ में बांस के पौधे लगाए गए हैं, जबकि करीब 12 एकड़ जमीन पर आधुनिक फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग फैसिलिटी तैयार की जा रही है।
रिकाॅर्ड कचरे का निपटान किया
आशीष सूद ने बताया कि 2025-26 में तीनों साइटों पर रिकॉर्ड 74 लाख टन कचरे का निस्तारण किया गया है। ओखला और भलस्वा साइट को इसी साल खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि गाजीपुर में भी तेजी से काम चल रहा है। मंत्री ने बताया कि साइट पर आग और मिथेन गैस के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
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रोज 15 हजार टन कचरे की हो रही बायो-माइनिंग, खाली जमीन पर बनेंगी नई सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
भलस्वा लैंडफिल साइट में 43 एकड़ जमीन खाली हो गई है जो दोबारा इस्तेमाल के लायक है। दिल्ली सरकार का दावा है कि कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का काम अब तेज हो गया है। दिसंबर तक पूरी डंपसाइट खत्म हो जाएगी। शुक्रवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने साइट का दौरा कर कामकाज की समीक्षा की। मंत्री ने बायो-माइनिंग और कचरा निस्तारण की प्रगति देखी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून से पहले ज्यादा से ज्यादा काम पूरा किया जाए।
मंत्री ने कहा कि भलस्वा साइट पर करीब 96 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायो-माइनिंग के जरिए निस्तारण किया जा चुका है। फिलहाल यहां करीब 21 लाख मीट्रिक टन कचरा बाकी है। लगातार बढ़ रही प्रोसेसिंग क्षमता से दिल्ली को जल्द कूड़े के पहाड़ों से राहत मिलेगी। भलस्वा साइट पर पहले जहां रोज करीब 8 हजार टन कचरे का निस्तारण होता था, अब यह क्षमता बढ़कर 15 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके लिए मशीनों और संसाधनों की संख्या भी बढ़ाई गई है। भलस्वा, ओखला और गाजीपुर की तीनों लैंडफिल साइटों पर अब तक 255 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पुराने कचरे का निस्तारण किया जा चुका है। इससे करीब 75 एकड़ जमीन दोबारा उपयोग के लायक बनी है। अकेले भलस्वा साइट पर 43 एकड़ जमीन खाली कराई गई है। यहां पांच एकड़ में बांस के पौधे लगाए गए हैं, जबकि करीब 12 एकड़ जमीन पर आधुनिक फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग फैसिलिटी तैयार की जा रही है।
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रिकाॅर्ड कचरे का निपटान किया
आशीष सूद ने बताया कि 2025-26 में तीनों साइटों पर रिकॉर्ड 74 लाख टन कचरे का निस्तारण किया गया है। ओखला और भलस्वा साइट को इसी साल खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि गाजीपुर में भी तेजी से काम चल रहा है। मंत्री ने बताया कि साइट पर आग और मिथेन गैस के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
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