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मिट्टी का बर्तन बेचने वाले 42 परिवारों को हालात सामान्य होने का इंतजार
Mon, 20 Apr 2020 05:55 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 20 Apr 2020 05:55 PM IST
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मटका
कभी मिट्टी के बर्तन बेचकर गुजारा करने वाले 42 परिवारों को फिर से बिक्री शुरू होने का इंतजार है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी घड़ा, सुराही की बिक्री से इन परिवारों के चेहरे पर एक बार फिर खुशियां लौटने की उम्मीद है। कोरोना संक्रमण से देशवासियों को महफूज रखने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान बर्तनों की बिक्री न होने पर भी बचत की रकम से अपने परिवारों का गुजारा किया।
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कमी पड़ी तो उधार का भी सहारा लिया, लेकिन देशवासियों की बेहतरी के लिए सड़क के किनारे झुग्गियों में रात बिताने वाले परिवार के सभी सदस्य खुद का बचाव करते हुए लोगों से यही अपील कर रहे हैं कि अभी खुद को घर में रखने से पहले की तरह जिंदगी बिताने का फिर मौका मिल सकेगा। सभी परिवार लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द हालात सामान्य हो सके।
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30 वर्षीय सूरज ने कहा कि एक बार राशन बांटने वाले आए थे, लेकिन पैसे जैसे-जैसे कम हो रहे हैं, मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हालांकि गर्मी बढ़ने के साथ अब मिट्टी के घड़े और सुराही की बिक्री होने की उम्मीद पर ही सभी परिवारों को इंतजार है। गर्मियों में मिट्टी के बर्तनों की मांग अधिक होती है और यह शुद्ध भी है, इसलिए मौसम के भरोसे ही दिन बिता रहे हैं।
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चित्तौड़ (राजस्थान) निवासी 62 वर्षीय शेर सिंह कहते हैं कि एहतियात के सभी कदम उठाए जा रहे हैं। लॉकडाउन का पूरी तरह पालन कर रहे हैं ताकि इस बीमारी से देश को छुटकारा मिले। पिछले 28 दिनों से बिक्री बंद है और अब बचत के रुपये खत्म होने के बाद उधार से काम चला रहे हैं। कई बार बच्चों के लिए दूध और राशन की भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।