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मनोवैज्ञानिकों की भी कल्पना से परे है 4 साल के बच्चे का अश्लील हरकत करना, जताई ये चिंताएं

Thu, 23 Nov 2017 02:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Nov 2017 02:35 PM IST
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4 year old rape accused case: even psychologists are shocked from the incident and are worried

दिल्ली में साढ़े चार साल की उम्र में एक बच्चे द्वारा अपनी सहपाठी के साथ किए गए अश्लील कृत्य ने मनोविज्ञान को भी चौंका दिया है। द्वारका के एक स्कूल की यह घटना मनोवैज्ञानिकों को असंभव सी लग रही है।

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इनका कहना है कि एक वक्त था जब मनोविज्ञान 10 वर्ष की आयु के ऊपर के बच्चों के मानसिक बदलाव पर जागरूक करता था। समय के साथ साथ यह आयु घटकर 7 से 8 वर्ष तक आ गई। लेकिन साढ़े चार साल की उम्र में इस तरह का अपराध डॉक्टरों के लिए अनोखी और बेहद गंभीर है।
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पूर्वी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. श्रुति श्रीवास्तव ने कहा कि साढ़े चार वर्ष की आयु में किसी बच्चे से इस तरह के कृत्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

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डॉक्टरों को है ये आशंका

4 year old rape accused case: even psychologists are shocked from the incident and are worried

आशंका है कि यह घटना दो बच्चों के बीच खेल का ही एक हिस्सा हो, क्योंकि तीन वर्ष तक की आयु में आते आते बच्चा महज लिंग का अंतर समझ पाता है। उसकी सोच विकसित होना भी शुरू नहीं होती है।

वह लड़का है या लड़की, कौन परिवार का है और कौन बाहर का? यह सब समझने में ही बच्चा साढ़े तीन साल से ऊपर का हो जाता है। हालांकि इस वक्त जिस तरह फोन और कंप्यूटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है, उस हिसाब से बच्चों का मानसिक स्तर प्रभावित होता है।

ऐसे बच्चों और उनके माता पिता के लिए डॉक्टर काउंसलिंग भी करते हैं। लेकिन साढ़े चार साल के बच्चे का यह मामला मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्तर पर सवाल खड़े करता है। बहरहाल, इस घटना में पुलिस ने भी केस दर्ज किया है।

ऐसे में मनोवैज्ञानिक फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। हालांकि उन्होंने उन सभी माता पिताओं को आगाह किया है जिनके बच्चे अक्सर टीवी, कंप्यूटर और फोन में बेवजह वक्त की बर्बादी करते हैं।

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गाइडलाइंस

4 year old rape accused case: even psychologists are shocked from the incident and are worried

बीते दिनों स्कूलों में बच्चों के साथ हुई घटनाओं को लेकर सीबीएसई समेत शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गाइडलाइंस तैयार की थी। इन दिशा-निर्देशों में केवल शारीरिक ही नहीं सामाजिक सुरक्षा पर भी ध्यान रखा गया।

स्कूलों को जारी दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि स्कूलों में सीसीटीवी मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही स्कूल स्टाफ का साइकोमेट्रिक टेस्ट किए जाएं।

यह हैं दिशा-निर्देश
- स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। जिससे क्लास रूम, लैब, लाइब्रेरी, कॉरिडोर, खाली पड़े कमरों तथा शौचालय के बाहर के स्थान को कवर हो सके। 
- परिसर में कोई भी गुप्त जगह नहीं होनी चाहिए। 
- स्कूल में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति प्रिंसिपल, टीचर, चपरासी, व अन्य स्टाफ के विषय में जानकारी रखी जाए। 
- स्कूल परिसर में डॉक्टर व नर्स की तैनाती हो। 
- स्कूलों में सुरक्षा के लिए एक टास्क फोर्स का गठन होना चाहिए। 
- स्कूलों में अलमारियों व शेल्फ की ठीक से जांच हो यह देखा जाए कि वहां कोई खतरनाक वस्तु ना छुपाई जा सके। 
- सुरक्षा सुझाव के लिए सुरक्षा संबंधी शिकायत बॉक्स लगाए जाएं।

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