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Delhi NCR News: 4 वर्षीय बच्ची की कार से कुचलने से हुई थी मौत, माता-पिता को 40.37 लाख का मुआवजा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने उत्तर दिल्ली में 4 वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में उसके माता-पिता को 40.37 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि दुर्घटना तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई। 2020 में उत्तर दिल्ली में एक तेज रफ्तार कार ने 4 वर्षीय बच्ची को कुचल दिया था, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतका के माता-पिता ने ट्रिब्यूनल में दावा याचिका दायर की थी।
16 जुलाई को सुनाए गए आदेश में पीठासीन अधिकारी सुनील कुमार ने कहा, मोटर दुर्घटना मामलों में कानून ऑफ टॉर्ट्स के तहत ट्रिब्यूनल रेस इप्सा लोक्खितुर (लैटिन भाषा का शब्द जिसका अर्थ है घटना स्वयं बोलती है) के सिद्धांत का अनुपालन करता है। इस सिद्धांत के आधार पर साक्ष्य का भार पीड़ित से हटकर आरोपी पर हो जाता है। यह सिद्धान्त कहता है कि घटना इतनी स्पष्ट है कि लापरवाही साबित करने के लिए किसी साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद यह साबित होता है कि दुर्घटना रिस्पॉन्डेंट ड्राइवर द्वारा लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण हुई। इससे मृतका को घातक चोटें आईं। ट्रिब्यूनल ने गाड़ी के ड्राइवर और मालिक को संयुक्त रूप से और अलग-अलग मुआवजे की राशि चुकाने का निर्देश दिया है। गाड़ी अनइंश्योर्ड थी। आदेश में ब्याज सहित भुगतान करने को भी कहा गया है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने उत्तर दिल्ली में 4 वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में उसके माता-पिता को 40.37 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि दुर्घटना तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई। 2020 में उत्तर दिल्ली में एक तेज रफ्तार कार ने 4 वर्षीय बच्ची को कुचल दिया था, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतका के माता-पिता ने ट्रिब्यूनल में दावा याचिका दायर की थी।
16 जुलाई को सुनाए गए आदेश में पीठासीन अधिकारी सुनील कुमार ने कहा, मोटर दुर्घटना मामलों में कानून ऑफ टॉर्ट्स के तहत ट्रिब्यूनल रेस इप्सा लोक्खितुर (लैटिन भाषा का शब्द जिसका अर्थ है घटना स्वयं बोलती है) के सिद्धांत का अनुपालन करता है। इस सिद्धांत के आधार पर साक्ष्य का भार पीड़ित से हटकर आरोपी पर हो जाता है। यह सिद्धान्त कहता है कि घटना इतनी स्पष्ट है कि लापरवाही साबित करने के लिए किसी साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद यह साबित होता है कि दुर्घटना रिस्पॉन्डेंट ड्राइवर द्वारा लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण हुई। इससे मृतका को घातक चोटें आईं। ट्रिब्यूनल ने गाड़ी के ड्राइवर और मालिक को संयुक्त रूप से और अलग-अलग मुआवजे की राशि चुकाने का निर्देश दिया है। गाड़ी अनइंश्योर्ड थी। आदेश में ब्याज सहित भुगतान करने को भी कहा गया है।
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