हड़ताल पर जा सकते हैं एम्स के तीन हजार कर्मचारी, मरीज सुविधा भत्ता नहीं मिलने से हैं परेशान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश का सबसे बड़ा चिकित्सीय संस्थान एम्स जहां लगातार नए-नए चिकित्सीय रिकॉर्ड कायम कर रहा है। वहीं जिनकी बदौलत ये उपलब्धियां मिल रही हैं, उनमें शामिल कर्मचारियों को 24 साल से कोई सौगात नहीं दे पाया है। इसका खामियाजा अगले सप्ताह एम्स आने वाले हजारों मरीजों को उठाना पड़ सकता है। एम्स में 14 कैडर के करीब तीन हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने एम्स प्रबंधन के खिलाफ अब लंबी लड़ाई का फैसला लिया है। इनकी मानें तो अगले सप्ताह प्रबंधन के खिलाफ ये लोग लामबंद होने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि कर्मचारी अगले सप्ताह हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि एम्स में कर्मचारियों को मरीज सुविधा भत्ता नहीं दिया जाता। जबकि कर्मचारियों का दावा है कि संस्थान में एक डॉक्टर से ज्यादा मरीज की सेवा पैरामेडिकल कर्मचारी को करनी होती है। डॉक्टर सुबह और शाम राउंड लगाकर चले जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी 14-14 घंटे कुर्सी पर बैठ मरीजों के सैंपल एकत्रित करते हैं, उनकी जांच करते हैं। सैंपल का रिकॉर्ड रखते हैं। बावजूद इसके मरीज सुविधा भत्ता (हॉस्पिटल पेशेंट केयर एलाउंस) इन्हें नहीं मिल रहा। पिछले दो वर्ष में कई बार प्रदर्शन और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तक से आश्वासन लेने के बाद अबकी बार ये कर्मचारी आर पार की लड़ाई के विचार में है।
एम्स के ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह बताते हैं कि एम्स में रेडियोथैरेपी, लैब, फिजियोथैरेपी, ईएनटी, रेडियो डायग्नोस सहित करीब 14 कैडर के तहत ग्रुप ए और बी श्रेणी में कर्मचारी पदस्थ हैं। नियमों के अनुसार इन कर्मचारियों को प्रति मरीज सुविधा भत्ता मिलता है। इसे एचपीसीए कहते हैं। ग्रुप ए के कर्मचारियों को प्रति माह 5300 व ग्रुप बी के कर्मचारियों को 4100 रुपये के आसपास मिलना चाहिए। हाल ही में केंद्र सरकार के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के कर्मचारियों ने कोर्ट के आदेश पर ये प्राप्त भी किए हैं। बावजूद इसके एम्स प्रबंधन अब तक कर्मचारियों की आवाज नहीं सुन सका है। इतना ही नहीं 24 साल से कोर्डिनेशन कमेटी गठित नहीं हुई है। इसकी वजह से कर्मचारियों का वेतनमान और भत्तों में किसी भी तरह की वृद्घि नहीं हुई है। जबकि 90 से लेकर अब तक कर्मचारियों पर कार्य दबाव क्षमता से कई गुना बढ़ा है।
साल भर में फाइल तैयार नहीं कर सके निदेशक
कर्मचारियों का कहना है कि एम्स में इन दिनों भगवान भरोसे ही काम हो रहा है। पिछले एक वर्ष से एम्स के निदेशक और अन्य अधिकारी एक फाइल तक तैयार करके मंत्रालय को नहीं भेज पाए हैं। जब भी वे इस बारे में बात करते हैं तो प्रबंधन के शीर्ष अधिकारी टालमटोल कर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं।