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Delhi NCR News: दो अस्पतालों से एक माह में निकला 25.7 टन बायो-मेडिकल कचरा
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जीटीबी और आरजीएसएसएच में 311 जनरेशन प्वाइंट से हुआ संग्रह, चार श्रेणियों में निस्तारण
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली।
गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) से अगस्त 2026 में कुल 25,710.58 किलोग्राम बायो-मेडिकल कचरा निकला। अस्पताल प्रशासन ने इसकी मासिक रिपोर्ट दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को सौंपी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वार्ड, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और ओपीडी समेत 311 जनरेशन प्वाइंट से कचरा एकत्र किया गया। संक्रमण और पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए इसे चार श्रेणियों में अलग कर निस्तारित किया गया।
अगस्त में सबसे अधिक लाल श्रेणी का कचरा निकला, जिसका वजन 11,738.30 किलोग्राम रहा। इसमें इस्तेमाल प्लास्टिक ट्यूब, कैथेटर, सीरिंज और आईवी बोतलें शामिल हैं। इसके बाद पीली श्रेणी में 11,699.36 किलोग्राम कचरा दर्ज हुआ। इसमें मानव ऊतक, पट्टियां, संक्रमित रुई और एक्सपायर्ड दवाइयां शामिल होती हैं। नीली श्रेणी में कांच की शीशियां और एम्प्यूल समेत 2,003.79 किलोग्राम कचरा निकला। वहीं, सफेद श्रेणी में सुई, ब्लेड और अन्य नुकीली धातु की वस्तुओं समेत 269.13 किलोग्राम कचरा रहा।
अधिकृत एजेंसी कर रही निस्तारण
बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित संग्रह, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी अधिकृत एजेंसी मेसर्स एसएमएस वाटर ग्रेस प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यह कार्य दिल्ली स्वास्थ्य सेवा के अनुबंध के तहत किया जा रहा है। कचरे की निगरानी और निस्तारण का विवरण डीपीसीसी को उपलब्ध कराया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली।
गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) से अगस्त 2026 में कुल 25,710.58 किलोग्राम बायो-मेडिकल कचरा निकला। अस्पताल प्रशासन ने इसकी मासिक रिपोर्ट दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को सौंपी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वार्ड, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और ओपीडी समेत 311 जनरेशन प्वाइंट से कचरा एकत्र किया गया। संक्रमण और पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए इसे चार श्रेणियों में अलग कर निस्तारित किया गया।
अगस्त में सबसे अधिक लाल श्रेणी का कचरा निकला, जिसका वजन 11,738.30 किलोग्राम रहा। इसमें इस्तेमाल प्लास्टिक ट्यूब, कैथेटर, सीरिंज और आईवी बोतलें शामिल हैं। इसके बाद पीली श्रेणी में 11,699.36 किलोग्राम कचरा दर्ज हुआ। इसमें मानव ऊतक, पट्टियां, संक्रमित रुई और एक्सपायर्ड दवाइयां शामिल होती हैं। नीली श्रेणी में कांच की शीशियां और एम्प्यूल समेत 2,003.79 किलोग्राम कचरा निकला। वहीं, सफेद श्रेणी में सुई, ब्लेड और अन्य नुकीली धातु की वस्तुओं समेत 269.13 किलोग्राम कचरा रहा।
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अधिकृत एजेंसी कर रही निस्तारण
बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित संग्रह, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी अधिकृत एजेंसी मेसर्स एसएमएस वाटर ग्रेस प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यह कार्य दिल्ली स्वास्थ्य सेवा के अनुबंध के तहत किया जा रहा है। कचरे की निगरानी और निस्तारण का विवरण डीपीसीसी को उपलब्ध कराया गया है।
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