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2012 मारुति प्लांट हिंसा केसः अदालत शनिवार को सुनाएगी 31 दोषियों पर फैसला

Fri, 17 Mar 2017 04:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Fri, 17 Mar 2017 04:40 PM IST
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2012 maruti suzuki plant violence case, court verdict on 30 accused to come today

मारुति सुजुकी प्रकरण में बीते शुक्रवार को अदालत अपने फैसले में 117 श्रमिक आरोपियों को सबूतों व गवाहों के अभाव में बरी कर चुकी है और 31 श्रमिक आरोपियों को दोषी करार देते हुए उनकी सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने आज बहस के बाद दोष‌ियों पर अपना फैसला श‌न‌िवार(18 मार्च) तक सुरक्ष‌ित रख ल‌िया है।

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अदालत ने 31 श्रमिक आरोपियों में से 13 आरोपियों को हत्या व अन्य आपराधिक धाराओं में दोषी करार दिया है, जिससे श्रमिक संगठनों में रोष है। शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी गोयल की अदालत में 31 श्रमिक आरोपियों की सजा पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस हुई। विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि व सदस्य भी बड़ी संख्या में लघु सचिवालय आए थे, ज‌िसे देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम क‌िए गए थे।
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अदालत ने जिन लोगों को हत्या का दोषी करार किया है। उसमें राम मेहर, संदीप ढिल्लो, राम विलास, पवन कुमार, सर्वजीत सिंह, सोहन कुमार, प्रदीप गुर्जर, अजमेर सिंह, जियालाल, सुरेश कुमार, अमरजीत भांबी व योगेश कुमार हैं। इसके अलावा अन्य 18 लोगों को मारपीट व बलवा करने के आरोप में दोषी पाया गया है।

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गुरुग्राम से बावल तक के हजारों श्रमिकों ने किया खाने का बहिष्कार

2012 maruti suzuki plant violence case, court verdict on 30 accused to come today
मारुति मामले को लेकर गुरुग्राम से लेकर बावल तक की कंपनियों के कर्मचारियों कैंटीन के खाने का बहिष्कार किया। - फोटो : अमर उजाला

मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में 18 जुलाई 2012 की घटना को लेकर गुरुग्राम अदालत के निर्णय से आहत विभिन्न कंपनियों के हजारों श्रमिकों ने कंपनियों की कैंटीन के खाने का बहिष्कार किया।

खाने का यह बहिष्कार गुरुग्राम, मानेसर, धारूहेड़ा व बावल स्थित औद्योगिक बेल्ट में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों ने किया। उनका कहना है कि अदालत ने 31 कर्मचारियों को घटना के लिए दोषी करार दिया है। उनका कहना है कि फैसले को बड़ी अदालत में चुनौती दी जाएगी। बृहस्पतिवार को हर कंपनी की कैंटीन सूनी नजर आई।

बता दें कि गुरुग्राम अदालत ने बीते शुक्रवार को मारुति मामले में 117 लोगों को बरी करने के साथ-साथ 31 लोगों को दोषी करार दिया था। इस मामले में शुक्रवार को दोषियों को सजा सुनाई जा सकती है।

कर्मचारियों ने अपने साथियों के समर्थन में खाना नहीं खाया

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​कर्मचारियों को दोषी करार किए जाने पर गुरुग्राम से बावल तक के श्रमिक वर्ग में नाराजगी है। एटक पदाधिकारी अनिल पंवार ने बताया कि सभी श्रमिक एक हैं। मारुति के सभी प्लांटों सहित अन्य सभी कंपनियों में भी कर्मचारियों ने अपने साथियों के समर्थन में खाना नहीं खाया।

मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू ने दावा किया कि खाने का बहिष्कार पूरी तरह सफल रहा। हीरो मोटो कॉर्प, बेलसोनिका, होंडा, सोना कोयो, मुंजाल शोवा, हेमा एंडयूरेंस, सत्यम ऑटो, ऑर्कोटेक, नपिनो ऑटो सहित सैकड़ों कंपनियों में श्रमिकों ने अपनी एकता का परिचय दिया और लंच व डिनर का बहिष्कार किया।

सभी ने भूखे रहकर दिन और रात की शिफ्ट में काम किया। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष सतबीर सिंह ने कहा कि श्रमिकों के साथ प्रदेश भर में अन्याय हो रहा है। अब समय आ गया है जब श्रमिकों को अपने हितों के लिए एकजुट होना चाहिए।

फैसले के वक्त जुटेंगे सैकड़ों कर्मचारी
शुक्रवार को दोषी करार दिए गए कर्मचारियों को अदालत द्वारा क्या सजा सुनाई जाती है, इस पर सभी की नजर है। कर्मचारी नेताओं व ट्रेड यूनियनों का कहना है कि अदालत के निर्णय को सुनने के बाद श्रमिक यूनियनों की बैठक होगी, इसके बाद आगामी रणनीति तय की जाएगी। मामले को ऊपरी अदालत में ले जाया जाएगा।

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